बिस्फी विधानसभा (सीट क्रम संख्या 35) बिहार के मधुबनी जिले की एक हाई-प्रोफाइल सीट है, जिसे ब्राह्मण और मुस्लिम मतदाताओं का गढ़ माना जाता है। यह सीट अपने कड़े और ध्रुवीकृत चुनावी मुकाबलों के लिए जानी जाती है, जहाँ मुकाबला अक्सर सीधे भाजपा बनाम राजद के बीच होता है।
प्रमुख दावेदार और पिछला परिणाम (2020):
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट | जीत का अंतर |
| हरिभूषण ठाकुर बचौल (विजेता) | BJP (NDA) | 86,787 | 10,241 वोट |
| फैयाज अहमद | RJD (महागठबंधन) | 76,505 | – |
हरिभूषण ठाकुर बचौल/NDA (BJP) की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण
| अनुकूल तथ्य/विश्लेषण | विवरण |
| ब्राह्मण वोटों का मजबूत ध्रुवीकरण | बिस्फी को ब्राह्मण बहुल सीट माना जाता है। हरिभूषण ठाकुर बचौल खुद ब्राह्मण समुदाय से आते हैं और उनके पक्ष में ब्राह्मण वोटों का एकतरफा और मजबूत ध्रुवीकरण होता है। 2020 में भी यह ध्रुवीकरण उनकी जीत का मुख्य कारण बना था। |
| “मोदी फैक्टर” और राष्ट्रीय मुद्दे | विधायक की मुखर राष्ट्रीय पहचान और हिंदुत्ववादी छवि उन्हें भाजपा के कोर समर्थक, सवर्ण (ब्राह्मण/राजपूत/भूमिहार) और अति-पिछड़े (EBC) वोटों को मजबूती से गोलबंद करने में मदद करती है। प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता और राष्ट्रीय मुद्दे उनके लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट हैं। |
| विधायक की सक्रियता और विकास कार्य | कुछ स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, विधायक बचौल क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे हैं और उनके कार्यकाल में ग्रामीण सड़कों, पावर सबस्टेशन, सामुदायिक भवनों और महाकवि विद्यापति जन्मस्थली के सुंदरीकरण जैसे कई विकास कार्य हुए हैं। यह एंटी-इनकम्बेंसी को कम करने में मदद कर सकता है। |
| NDA गठबंधन की एकजुटता | यदि 2025 में NDA (BJP-JDU) एकजुट होकर चुनाव लड़ता है, तो भाजपा को JDU के अति-पिछड़ा और महादलित वोट बैंक का लाभ मिलेगा, जो RJD के M-Y समीकरण को काटने के लिए निर्णायक हो सकता है। |
फैयाज अहमद/महागठबंधन (RJD) की जीत की राह और BJP उम्मीदवार की हार के संभावित प्रतिकूल तथ्य
| प्रतिकूल तथ्य/विश्लेषण (BJP की हार के संभावित कारण) | विवरण |
| RJD का मजबूत M-Y (मुस्लिम-यादव) आधार | फैयाज अहमद एक मुस्लिम उम्मीदवार हैं और RJD के पास इस सीट पर मुस्लिम (निर्णायक संख्या) और यादव (प्रमुख संख्या) का मजबूत M-Y कोर वोट बैंक है। यदि ये दोनों समुदाय एकजुट होकर RJD को वोट देते हैं, तो 10,241 वोटों का अंतर आसानी से पाटा जा सकता है। |
| उच्च शिक्षा, बाढ़ और रोज़गार का मुद्दा | बिस्फी बाढ़-ग्रस्त क्षेत्र है, और यहाँ डिग्री कॉलेज या उच्च शिक्षण संस्थानों की कमी, पेयजल की समस्या और बेरोज़गारी के कारण मौसमी पलायन बड़े स्थानीय मुद्दे हैं। RJD इन अधूरी विकास परियोजनाओं को उठाकर भाजपा के खिलाफ जनता के असंतोष को भुना सकती है। |
| सीट ध्रुवीकरण का जोखिम | हालांकि ध्रुवीकरण आमतौर पर भाजपा के पक्ष में काम करता है, लेकिन मुस्लिम वोटों का पूर्ण ध्रुवीकरण RJD उम्मीदवार के पक्ष में होता है। यदि RJD यादवों और मुस्लिमों को एक साथ लाने में सफल हो जाती है और उसमें अति-पिछड़ा/दलित वोटों का कुछ हिस्सा भी जोड़ लेती है, तो भाजपा उम्मीदवार को शिकस्त मिल सकती है। |
| विधायक का विवादास्पद व्यक्तित्व (संभावित) | विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल का विवादास्पद बयानों के कारण अक्सर मीडिया में बने रहना, उनके गैर-ब्राह्मण और गैर-भाजपा समर्थकों के बीच नकारात्मक धारणा बना सकता है, जिससे उनके वोटों का कुछ हिस्सा महागठबंधन की ओर जा सकता है। |
निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):
बिस्फी का चुनाव 2025 में भी सबसे कांटेदार और ध्रुवीकृत रहने वाला है। यह मुकाबला ब्राह्मण वर्चस्व और ‘मोदी फैक्टर’ (BJP) बनाम M-Y (मुस्लिम-यादव) एकजुटता और स्थानीय असंतोष (RJD) का सीधा युद्ध होगा।
2025 के चुनाव में, यदि RJD उम्मीदवार फैयाज अहमद या उनका कोई मजबूत वैकल्पिक चेहरा मुस्लिम और यादव वोटों को पूरी तरह से एकजुट करने में सफल होते हैं और तेजस्वी यादव की रोजगार की रणनीति काम कर जाती है, तो उनके पास जीत हासिल करने का एक मजबूत मौका होगा। भाजपा की जीत ब्राह्मण वोटों के एकमुश्त ध्रुवीकरण और NDA के अन्य समुदायों के समर्थन को बनाए रखने पर निर्भर करेगी।
संभावित विजेता: फैयाज अहमद (RJD – महागठबंधन)। (अत्यधिक ध्रुवीकरण के बावजूद, RJD का कोर M-Y वोट आधार मजबूत है, और 2020 में केवल 10,241 वोटों के अंतर को पलटने के लिए स्थानीय एंटी-इनकम्बेंसी और अधूरी विकास परियोजनाओं का मुद्दा निर्णायक साबित हो सकता है।)
