बिहपुर विधानसभा सीट: एक विश्लेषणात्मक संभावना (2025)
बिहपुर सीट भागलपुर जिले में स्थित है और इसे राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील माना जाता है। यहाँ पिछले 20 सालों से मुख्य मुकाबला राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच रहा है।
संभावित विजेता उम्मीदवार (NDA/BJP के कुमार शैलेंद्र):
वर्तमान राजनीतिक समीकरणों और 2025 चुनाव से पहले की घोषणाओं के अनुसार, NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के उम्मीदवार और वर्तमान विधायक कुमार शैलेंद्र (BJP) के जीतने की अधिक संभावना हो सकती है।
| जीत के पक्ष में मजबूत विश्लेषण और तथ्य |
| 1. गठबंधन की मजबूती (NDA): 2025 के चुनाव में NDA एकजुट होकर लड़ रहा है, जिसमें भाजपा, जदयू (JDU), लोजपा (रामविलास) जैसी पार्टियाँ शामिल हैं। बिहपुर सीट पर JDU के पूर्व विधायक शैलेश कुमार मंडल (जो 2020 में RJD से लड़े थे) का भाजपा को समर्थन मिलने से NDA को अतिरिक्त ताकत मिलेगी। |
| 2. 2020 का प्रदर्शन और एंटी-इनकम्बेंसी पर काबू: 2020 के चुनाव में कुमार शैलेंद्र ने RJD के शैलेश कुमार मंडल को 6,129 वोटों के अंतर से हराया था। यह जीत पिछले चुनावों में RJD की लगातार जीत के बाद आई थी, जो यह दर्शाती है कि वह RJD के मजबूत आधार में सेंध लगाने में सफल रहे थे। |
| 3. प्रमुख जातिगत समीकरण (यादव-विरोधी गोलबंदी): बिहपुर में यादव मतदाताओं की बड़ी संख्या है, जो परंपरागत रूप से RJD का आधार रहे हैं। हालांकि, यादव-विरोधी वोटों (जैसे भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण, कुर्मी और पासवान) का NDA के पक्ष में एकीकरण अक्सर जीत का निर्णायक कारक बन जाता है। |
| 4. राष्ट्रीय/राज्य स्तरीय नेतृत्व का प्रभाव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (NDA में) की लोकप्रियता का लाभ स्थानीय उम्मीदवार को मिल सकता है। |
विपक्ष (महागठबंधन या अन्य) के लिए प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी:
महागठबंधन (MGB) या इंडिया गठबंधन की ओर से इस बार बिहपुर में मुख्य रूप से वीआईपी (VIP) की उम्मीदवार अर्पणा कुमारी चुनाव लड़ रही हैं, क्योंकि RJD ने इस बार अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है (RJD के शैलेश कुमार मंडल अब JDU में हैं)।
| हार के पक्ष में प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी |
| 1. महागठबंधन में RJD उम्मीदवार की अनुपस्थिति: सबसे बड़ा प्रतिकूल तथ्य यह है कि RJD ने इस सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारा है और यह सीट VIP को दी गई है। बिहपुर में RJD का बड़ा यादव वोट बैंक है, और RJD उम्मीदवार की अनुपस्थिति से इस वोट का बंटवारा हो सकता है। यह यादव वोट VIP को उतना ट्रांसफर नहीं हो सकता, जितना वह RJD उम्मीदवार को होता। |
| 2. यादव वोट बैंक का बिखराव: 2020 में RJD को 66,809 वोट मिले थे। यदि यह बड़ा यादव वोट बैंक इस बार VIP को पूरी तरह से ट्रांसफर नहीं होता है, तो NDA की राह आसान हो जाएगी। VIP के पास बिहपुर में RJD जैसा मजबूत आधार नहीं है। |
| 3. बदलती चुनावी प्रवृत्ति: बिहपुर के मतदाताओं की चुनावी प्रवृत्ति बदलती रही है। यह सीट 1952 से अब तक लगातार दो बार एक ही पार्टी को कम ही मिली है (2010 में BJP जीती, 2015 में RJD, 2020 में BJP)। अगर यह रुझान जारी रहा तो यह NDA के खिलाफ जा सकता है। |
| 4. स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा: यदि महागठबंधन (VIP) उम्मीदवार को बाहरी माना जाता है या वह स्थानीय मुद्दों पर वर्तमान विधायक को घेरने में विफल रहते हैं, तो इसका नुकसान हो सकता है। |
| 5. बाढ़ और कृषि मुद्दे: यह क्षेत्र गंगा और कोसी नदी के बीच पड़ता है, जहाँ बाढ़ और कृषि के मुद्दे प्रमुख हैं। यदि मौजूदा विधायक बाढ़ प्रभावित जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं, तो इसका लाभ विपक्ष उठा सकता है, भले ही उम्मीदवार नया हो। |
निष्कर्ष:
बिहपुर में मुकाबला हमेशा कड़ा रहा है (2020 में जीत का अंतर केवल 4.20% था)।1 हालांकि, RJD के मजबूत स्थानीय उम्मीदवार (शैलेश कुमार मंडल) के NDA के साथ आ जाने और महागठबंधन से RJD के सीधे उम्मीदवार की अनुपस्थिति के कारण, NDA उम्मीदवार कुमार शैलेंद्र का पलड़ा भारी दिख रहा है। उनकी जीत का रास्ता विपक्ष के वोट बैंक के बिखराव और NDA के परंपरागत समर्थकों के पूर्ण एकीकरण पर निर्भर करेगा।
