बिहार विधानसभा चुनाव का दूसरा और अंतिम चरण अब पूरी तरह से जनता के हवाले हो गया है। चुनाव प्रचार का शोर रविवार, 9 नवंबर की शाम को पूरी तरह से थम गया है। अब सभी उम्मीदवार 11 नवंबर को होने वाले मतदान की तैयारी में जुट गए हैं।1
1. दूसरा चरण एक नज़र में (The Second Phase at a Glance)
यह चरण बिहार की सत्ता का फैसला करने में सबसे निर्णायक (Decisive) माना जा रहा है।
| विवरण (Detail) | जानकारी (Information) |
| प्रचार समाप्त | रविवार, 9 नवंबर की शाम को |
| मतदान की तारीख | मंगलवार, 11 नवंबर |
| कुल सीटें | 122 विधानसभा सीटें |
| कुल जिले | 20 जिले |
| कुल उम्मीदवार | लगभग 1302 उम्मीदवार मैदान में |
| मतदाताओं की संख्या | 3.7 करोड़ से अधिक मतदाता |
| नतीजा (Counting) | 14 नवंबर को |
सीधा मतलब: इन 122 सीटों पर जनता का वोट ही तय करेगा कि बिहार में किसकी सरकार बनेगी— NDA की वापसी होगी या महागठबंधन सत्ता में आएगा।
2. प्रचार के आखिरी दिन की गर्माहट (The Final Push)
प्रचार थमने से पहले, 9 नवंबर को दोनों प्रमुख गठबंधनों (NDA और महागठबंधन) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। इसे ‘तूफानी प्रचार’ भी कहा जाता है, जिसमें बड़े नेता एक दिन में कई रैलियाँ करते हैं।
- NDA के स्टार प्रचारक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ताबड़तोड़ रैलियां कीं।
- NDA का मुख्य मुद्दा: उन्होंने अपने ‘विकास’ कार्यों को गिनाया और ‘जंगलराज’ की वापसी न होने देने की अपील की।
- उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जैसे बड़े नेताओं ने भी पूरे आत्मविश्वास के साथ NDA की जीत का दावा किया।2
- महागठबंधन के स्टार प्रचारक: मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने कई सभाएं कीं।
- महागठबंधन का मुख्य मुद्दा: उनका पूरा ज़ोर ‘रोज़गार’ (नौकरी) और ‘बदलाव’ पर रहा। तेजस्वी यादव की रैलियों में युवाओं की भारी भीड़ देखने को मिली, जिसे महागठबंधन ‘बदलाव की लहर’ बता रहा है।
- अन्य नेता: लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने भी अंतिम दिन अपनी रैलियों में NDA के भीतर अपनी मज़बूत उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की।
3. अब क्या होगा? (What Happens Next?)
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, एक बार प्रचार थमने के बाद, इन 122 निर्वाचन क्षेत्रों में कोई भी सार्वजनिक सभा, रैली, या रोड शो नहीं किया जा सकता।
| तारीख | कार्य |
| 9 नवंबर शाम | चुनाव प्रचार का शोर पूरी तरह बंद |
| 10 नवंबर | डोर-टू-डोर कैंपेन (घर-घर जाकर प्रचार): उम्मीदवार और उनके समर्थक छोटी-छोटी टोलियां बनाकर घर-घर जाकर वोट मांगेंगे। इस दिन ‘स्टार प्रचारक’ (बाहर के बड़े नेता) इन क्षेत्रों में नहीं रह सकते। |
| 11 नवंबर | मतदान (Voting): सुबह 7 बजे से मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। |
| 14 नवंबर | मतगणना (Counting): वोटों की गिनती होगी और बिहार की नई सरकार का फैसला आएगा। |
खास बात: कुछ संवेदनशील (Sensitive) और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में मतदान का समय थोड़ा कम (शाम 5 बजे तक) रखा गया है, जबकि बाकी जगहों पर सामान्य समय तक वोटिंग होगी।
4. दूसरे चरण में दिग्गजों की साख दांव पर (Key Candidates at Stake)
दूसरे चरण की इन 122 सीटों पर कई बड़े और कद्दावर नेताओं की किस्मत का फैसला होना है।
- नीतीश मंत्रिमंडल के मंत्री: कई वर्तमान मंत्री और बड़े नेता इस चरण में चुनाव लड़ रहे हैं, जैसे –
- बिजेंद्र प्रसाद यादव (सुपौल सीट)
- नीतीश मिश्रा (झंझारपुर सीट)
- प्रेम कुमार (गया टाउन सीट)
- सुमित कुमार सिंह (चकाई सीट)
- लेशी सिंह (धमदाहा सीट)
- इन मंत्रियों के जीतने या हारने से सीधे NDA के प्रदर्शन पर असर पड़ेगा।
- महागठबंधन के दिग्गज: महागठबंधन के भी कई प्रमुख उम्मीदवार इस चरण में मैदान में हैं, जिनके नतीजे पूरे गठबंधन के भविष्य को तय करेंगे।
इन सीटों पर कई जगह सीधा मुकाबला है, तो कई जगह बहुकोणीय (Multilateral) लड़ाई है, यानी 3 या 4 उम्मीदवार मज़बूत टक्कर में हैं।
सारांश (Summary):
बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण का प्रचार 9 नवंबर को खत्म हो चुका है।3 अब 11 नवंबर को 20 जिलों की 122 सीटों पर 3.7 करोड़ से ज़्यादा मतदाता वोट डालकर 1302 उम्मीदवारों का भाग्य ईवीएम में बंद कर देंगे।4 अब नेताओं की बारी खत्म हुई और जनता की बारी शुरू हो गई है।