चुनाव का नेतृत्व और मतदान का कार्यक्रम

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का आयोजन चुनाव आयोग द्वारा शेड्यूल की गई तिथियों के अनुसार किया जा रहा है। चुनाव में कुल 243 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से पहले चरण में 121 सीटों पर मतदान होगा और दूसरे चरण में 122 सीटों पर। चुनाव का उद्देश्य लागू सरकार को बदलना या फिर उसी को मजबूत करना है। चुनाव आयोग ने मतदान के दिन सुरक्षा, मतदान केंद्रों की सुविधा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक तैयारी की है।

स्वच्छ, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए करीब 12 लाख से अधिक मतदान कर्मियों की तैनाती की गई है। ईवीएम मशीन और वीवीपैट का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे मतदाताओं को आसान और पारदर्शी मतदान का अनुभव मिले। साथ ही, नई मतदाता सूचियों का प्रकाशन कर दिया गया है, इनमें पहली बार वोट देने वाले युवाओं और दिव्यांग मतदाताओं का विशेष ध्यान रखा गया है।

राजनीतिक दल और प्रमुख प्रत्याशी

बिहार में इस बार चुनाव मुख्य रूप से तीन प्रमुख गठबंधनों के बीच है: राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए), महागठबंधन (राकांपा, कांग्रेस, और वामदल), और तीसरा बड़ा खड़ा क्षेत्रीय दल।

एनडीए सरकार का नेतृत्व जदयू, भाजपा, और लोजपा रामविलास जैसे दल कर रहे हैं। इन दलों ने स्थानीय विकास, सड़कों, बिजली, कृषि कानूनों और बुनियादी ढांचे पर जोर दिया है। भाजपा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विकास के दावों को आधार बनाकर चुनावी मैदान में है।

वहीं, महागठबंधन, मुख्य रूप से आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों का गठबंधन है। इन दलों ने बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई, प्रवासन और जातीय समीकरण को प्रमुख मुद्दा बनाया है। तेजस्वी यादव और गिरिराज सिंह जैसे नेताओं की रैलियाँ जनता में गहरी उम्मीद और उत्साह पैदा कर रही हैं।

प्रत्याशी चयन और टिकट वितरण के दौरान क्षेत्रीय वार्ड-विरोध और जातिगत समीकरण भी चुनावी रणनीति का हिस्सा हैं। पहले चरण में करीब 1300 से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं, इनमें कुछ नए चेहरे और कई अनुभवी नेता शामिल हैं।

मुख्य चुनावी मुद्दे और सामाजिक समीकरण

बिहार की चुनाव से जुड़ी सबसे बड़ी बातें हैं – विकास बनाम बेरोजगारी, जाति-धर्म और सामाजिक समीकरण। इस बार चुनाव का मुख्य केंद्र बिंदु आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय है।

  1. विकास का मुद्दा: एनडीए सरकार ने जिला और सड़क ढांचे, बिजली, जल प्रबंधन, और औद्योगिक निवेश के माध्यम से अपने कार्यकाल का प्रचार किया है। इन योजनाओं को वोटरों के बीच अपने पक्ष में करना चाहती है।

  2. बेरोजगारी और शिक्षा: महागठबंधन बेरोजगारी, स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रवासन जैसे मुद्दों को लेकर जनता का ध्यान खींच रहा है। युवाओं की संख्या अधिक होने के कारण यह मुद्दा निर्णायक है।

  3. जाति-आधारित समीकरण: यादव, महादलित, मुस्लिम और सवर्ण वर्ग के वोट केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। जाति, धर्म, और पिछड़ापन इस चुनाव के मुख्य फैसले लेने वाले कारक हैं।

  4. तोरण और मतदाता जागरूकता: पहली बार वोटर खास तौर पर युवा वर्ग, दिव्यांग, और महिला मतदाताओं को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाए गए हैं।

चुनाव का परिणाम – राजनीतिक परिदृश्य और संभावनाएं

समीक्षक और राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस बार का चुनाव बड़े बदलाव का संकेत दे सकता है। एनडीए वाकई में अपनी सत्ता बरकरार रखने में सफल हो सकता है, या फिर महागठबंधन फिर से सत्ता में लौट सकता है।

अगर एनडीए के पक्ष में जनता का समर्थन बरकरार रहता है, तो योग्यता, विकास और स्थिरता की धारणा वाकई में जीत दिला सकती है। दूसरी ओर, महागठबंधन यदि अपने वोट बैंक को मजबूत कर पाने में सफल होता है, तो नई राजनीति का प्रारंभ हो सकता है।

सामाजिक समीकरण, मतदाताओं की जागरूकता, उम्मीदवारों का प्रदर्शन और चुनावी अखाड़े की रणनीतियाँ निर्णायक भूमिका निभाएंगी। परिणाम 14 नवंबर को आएंगे, और उसके बाद बिहार की नई सरकार का ऐलान होगा।

निष्कर्ष

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 एक ऐतिहासिक दौर से गुजर रहा है, जिसमें विकास और सामाजिक न्याय के बीच टकराव देखने को मिल रहा है। चुनाव प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संपन्न होने की उम्मीद है। पूरी प्रदेश जनता अपने भविष्य का फैसला करने के मकसद से मतदान करने को उत्सुक है। चुनाव का परिणाम न केवल राजनीति की दिशा तय करेगा बल्कि बिहार के सामाजिक और आर्थिक विकास का भी मार्ग प्रशस्त करेगा।

यह मतदान केवल राजनीतिक लड़ाई नहीं है, बल्कि यह बिहार की भावी दिशा का निर्णय भी है। बिहारवासी बड़ी उम्मीदों और विश्वास के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। 14 नवंबर का दिन बिहार में परिवर्तन का संकेत बनकर उभरेगा।

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