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बेनीपट्टी का ‘ब्राह्मण’ गढ़: क्या NDA की ‘रिकॉर्ड तोड़’ जीत दोहराई जाएगी या महागठबंधन करेगा पलटवार? 2025 का चुनावी रण-संग्राम!

बेनीपट्टी विधानसभा (सीट क्रम संख्या 32) बिहार के मधुबनी जिले की एक महत्वपूर्ण सीट है, जिसे ब्राह्मण बहुल क्षेत्र माना जाता है। इस सीट पर लंबे समय तक कांग्रेस का दबदबा रहा है, लेकिन वर्तमान में यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कब्जे में है।

प्रमुख दावेदार और पिछला परिणाम (2020):

उम्मीदवार पार्टी प्राप्त वोट जीत का अंतर
विनोद नारायण झा (विजेता) BJP (NDA) 78,862 32,652 वोट
भावना झा INC (महागठबंधन) 46,210
राजेश कुमार यादव निर्दलीय (तीसरे स्थान पर) 8,920

विनोद नारायण झा/NDA (BJP) की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण

अनुकूल तथ्य/विश्लेषण विवरण
रिकॉर्ड तोड़ प्रचंड जीत 2020 के चुनाव में BJP के विनोद नारायण झा ने कांग्रेस की भावना झा को 32,652 वोटों के बड़े अंतर से हराया था, जो 21% से अधिक का मार्जिन था। यह एकतरफा जनादेश क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ और NDA के प्रति मतदाताओं के गहरे भरोसे को दर्शाता है।
ब्राह्मण-बहुल सीट पर मजबूत पकड़ बेनीपट्टी एक ब्राह्मण बहुल सीट है और BJP ने इसी समीकरण को साधते हुए अनुभवी नेता विनोद नारायण झा को उम्मीदवार बनाया है। ब्राह्मण मतदाताओं का NDA के प्रति ठोस समर्थन (Solid Vote Bank) इस सीट पर BJP की सबसे बड़ी ताकत है।
NDA का कोर वोट बैंक विनोद नारायण झा की जीत सिर्फ ब्राह्मण वोटों पर आधारित नहीं है। NDA का व्यापक कोर वोट बैंक (ब्राह्मण, वैश्य, और अन्य सवर्ण/पिछड़ा वर्ग) एकसाथ एकजुट होकर मतदान करता है, जिसे भेदना महागठबंधन के लिए अत्यंत कठिन है।
विकास के कार्य और सरकारी योजनाएं स्थानीय लोगों के बीच विधायक के कार्यकाल में सड़क, पुल-पुलिया और बिजली के क्षेत्र में हुए कार्यों को लेकर सकारात्मक चर्चा है। साथ ही, नगर पंचायत का दर्जा मिलना भी एक उपलब्धि मानी जाती है, जिसका लाभ NDA को मिल सकता है।

भावना झा/महागठबंधन (कांग्रेस) की जीत की राह और BJP उम्मीदवार की हार के संभावित प्रतिकूल तथ्य

प्रतिकूल तथ्य/विश्लेषण (BJP की हार के संभावित कारण) विवरण
स्थानीय मुद्दों पर एंटी-इनकम्बेंसी विधायक के कार्यकाल में स्थायी बस स्टैंड, केंद्रीय विद्यालय और प्रमुख नदियों पर पुल (जैसे खसियाघाट) जैसी पुरानी मांगें पूरी नहीं हुई हैं। बेनीपट्टी बाजार में जलनिकासी और नाले के अभाव को लेकर भी स्थानीय लोगों में असंतोष है। ये स्थानीय मुद्दे सत्ता विरोधी लहर को हवा दे सकते हैं।
विपक्ष का मजबूत मुकाबला कांग्रेस की भावना झा इस सीट पर पूर्व विधायक रह चुकी हैं (2015 में विजेता)। उनका अपना व्यक्तिगत जनाधार है और वह महिला होने के नाते सहानुभूति और अतिरिक्त समर्थन जुटाने की क्षमता रखती हैं। उनका मुकाबला व्यक्तिगत और कड़ा होता है।
M-Y समीकरण की एकजुटता महागठबंधन (RJD-कांग्रेस) का मुस्लिम-यादव (M-Y) समीकरण इस सीट पर सबसे बड़ा चुनौती है। यदि महागठबंधन, जिसमें यादव और मुस्लिम मतदाता एक महत्वपूर्ण संख्या में हैं, अपनी पूरी ताकत से एकजुट होकर भावना झा को वोट करता है, तो मुकाबला टक्कर का हो सकता है। 2020 में निर्दलीय उम्मीदवार (यादव) ने 8,920 वोट काटकर महागठबंधन को नुकसान पहुंचाया था। इस बार ऐसी वोट-कटवा स्थिति न होने पर महागठबंधन की संभावनाएँ बढ़ेंगी।
ब्राह्मण वोटों का विभाजन यदि विनोद नारायण झा से असंतुष्ट कोई अन्य मजबूत ब्राह्मण उम्मीदवार (चाहे वह निर्दलीय हो या किसी अन्य दल का) मैदान में उतरता है, तो BJP के कोर वोट बैंक में सेंध लग सकती है, जिसका सीधा फायदा महागठबंधन को मिलेगा।

निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):

बेनीपट्टी विधानसभा सीट पर मुकाबला NDA के स्थापित जनाधार और विधायक के विकास कार्यों तथा महागठबंधन के M-Y समीकरण और विपक्ष के मजबूत उम्मीदवार के बीच होगा।

2025 के चुनाव में, BJP के विनोद नारायण झा (NDA) मजबूत स्थिति में हैं।1 2020 में 32,652 वोटों का भारी अंतर इस बात का प्रमाण है कि NDA का गठबंधन और जातीय समीकरण इस सीट पर बहुत मजबूत है। महागठबंधन के लिए यह अंतर कम करना और जीत हासिल करना एक बहुत बड़ी चुनौती होगी, खासकर तब जब ब्राह्मण और सवर्ण मतदाता BJP के साथ मजबूती से खड़े हैं।

संभावित विजेता: विनोद नारायण झा (BJP – NDA)। (एकतरफा जीत का बड़ा अंतर, ब्राह्मण-बहुल सीट पर NDA का मजबूत आधार और अनुभवी नेतृत्व उन्हें प्रबल दावेदार बनाता है। महागठबंधन की एकमात्र उम्मीद सत्ता विरोधी लहर और M-Y समीकरण की 100% एकजुटता पर टिकी है।)

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