बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में दरभंगा जिले की बेनीपुर सीट पर मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है। यह सीट ब्राह्मण बहुल मानी जाती है, और पिछले दो चुनावों से जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) के कब्जे में है, जो अब NDA गठबंधन का हिस्सा है। मौजूदा समीकरणों को देखते हुए, NDA गठबंधन के उम्मीदवार की जीत की संभावना अधिक है।

संभावित विजेता: विनय कुमार चौधरी (जनता दल यूनाइटेड – JDU) – NDA गठबंधन

वर्तमान विधायक विनय कुमार चौधरी ने 2020 में यह सीट जीती थी। JDU को NDA का साथ मिलने और क्षेत्र के जातिगत गणित के कारण, उनकी जीत का पलड़ा भारी दिख रहा है।


विनय कुमार चौधरी (JDU-NDA) की जीत के पक्ष में विस्तृत विश्लेषण और तथ्य:

  1. ब्राह्मण बहुल सीट पर NDA की मजबूत पकड़:
    • बेनीपुर को पारंपरिक रूप से ब्राह्मण बहुल सीट माना जाता है, और अब तक इस सीट से चुने गए सभी विधायक ब्राह्मण समुदाय से ही रहे हैं। JDU के विनय कुमार चौधरी इसी समुदाय से आते हैं।
    • ब्राह्मण मतदाता आमतौर पर NDA के पक्ष में मजबूती से खड़े रहते हैं, जो JDU उम्मीदवार को एक बड़ा आधार प्रदान करता है।
  2. लगातार तीसरी जीत की संभावना (2015 और 2020):
    • JDU इस सीट पर लगातार दो चुनाव (2015 में सुनील चौधरी और 2020 में विनय कुमार चौधरी) जीत चुका है। यह दर्शाता है कि JDU की स्थानीय संगठन और उम्मीदवार की पकड़ मजबूत है।
    • 2020 में, विनय कुमार चौधरी ने कांग्रेस के मिथिलेश कुमार चौधरी को 6,590 वोटों के अंतर से हराया था। यह जीत का अंतर पिछली बार मामूली था, लेकिन मजबूत NDA गठबंधन के कारण यह अंतर बनाए रखना आसान हो सकता है।
  3. जातिगत गणित (NDA के पक्ष में):
    • बेनीपुर में महागठबंधन का मुख्य वोट बैंक मुस्लिम (लगभग 13.70%) और यादव (लगभग 12%) मतदाताओं तक सीमित है, जिनका संयुक्त मत प्रतिशत लगभग 25.70% है। यह आंकड़ा NDA को चुनौती देने के लिए पर्याप्त नहीं है, खासकर जब ब्राह्मण, सवर्ण, और गैर-यादव OBC/EBC मतदाता NDA के पक्ष में लामबंद होते हैं।
  4. लोकसभा चुनाव 2024 का रुझान:
    • इस विधानसभा क्षेत्र में NDA गठबंधन का प्रदर्शन लोकसभा चुनाव में मजबूत रहा है, जो विधानसभा चुनाव में भी निर्णायक साबित हो सकता है।

अन्य उम्मीदवार (मिथिलेश कुमार चौधरी – कांग्रेस/महागठबंधन) की हार के प्रतिकूल तथ्य और आंकड़े:

महागठबंधन (कांग्रेस-RJD) के उम्मीदवार मिथिलेश कुमार चौधरी के लिए यह सीट जीतना कई कारणों से मुश्किल है।

  1. महागठबंधन का कमजोर जातीय समीकरण:
    • इस सीट पर महागठबंधन का पारंपरिक MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण 25.70% के आस-पास है।
    • चूंकि यह सीट ब्राह्मण बहुल है और महागठबंधन ने ब्राह्मण उम्मीदवार (कांग्रेस के मिथिलेश चौधरी) को उतारा है, इसलिए वह सवर्ण वोट बैंक में सेंध नहीं लगा पाते हैं, जबकि NDA सवर्णों का समर्थन आसानी से हासिल कर लेता है।
  2. 2020 में करीबी हार और RJD का सीधा उम्मीदवार न होना:
    • 2020 में, महागठबंधन के उम्मीदवार (कांग्रेस) मिथिलेश कुमार चौधरी को 6,590 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। इस हार से यह स्पष्ट है कि सिर्फ MY समीकरण और कांग्रेस का समर्थन जीत के लिए काफी नहीं है।
    • RJD का सीधा उम्मीदवार न होना भी एक कारक है। RJD के यादव मतदाता कांग्रेस उम्मीदवार को RJD उम्मीदवार जितना मजबूत समर्थन नहीं दे पाते हैं, जिससे वोटों के हस्तांतरण में कमी आती है।
  3. वोटों का बँटवारा (LJP फैक्टर):
    • 2020 में LJP के उम्मीदवार ने 17,616 वोट हासिल किए थे, जो NDA उम्मीदवार की जीत का अंतर 6,590 वोटों से कहीं अधिक था।
    • 2025 में, यदि LJP (रामविलास) NDA से अलग लड़ती है, तो यह महागठबंधन को फायदा पहुंचा सकता है। हालांकि, LJP ने 2020 में भी मिथिलेश चौधरी के ब्राह्मण वोट को काटा था, जो इस बार भी संभावित है, लेकिन यह RJD के पारंपरिक MY वोट पर कोई खास प्रभाव नहीं डालता है।

निष्कर्ष और पूर्वानुमान:

बेनीपुर विधानसभा सीट का चुनावी गणित यह दर्शाता है कि यह एक ब्राह्मण बहुल सीट है, जहां NDA गठबंधन (JDU/BJP) का पारंपरिक वोट बैंक मजबूत स्थिति में है। जबकि महागठबंधन का MY आधार जीत के लिए पर्याप्त नहीं है, और ब्राह्मण उम्मीदवार होने के बावजूद वह सवर्ण मतदाताओं को अपने पाले में नहीं ला पाता है।

पूर्वानुमान: मजबूत जातीय समीकरण और NDA के संगठनात्मक समर्थन के कारण, विनय कुमार चौधरी (JDU-NDA) के इस सीट से जीतने की संभावना प्रबल है।

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