परिणाम का पूर्वानुमान (विश्लेषणात्मक संभावना)
बेल्दौर विधानसभा सीट पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार की जीत की संभावना अधिक है। यह सीट 2010 में अस्तित्व में आने के बाद से लगातार जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) के कब्जे में रही है, और हालिया लोकसभा चुनाव के रुझान NDA की मजबूत पकड़ दिखाते हैं।
- संभावित विजेता: पन्ना लाल सिंह पटेल (NDA – JDU) या NDA का कोई अन्य उम्मीदवार।
- महागठबंधन के मुख्य दावेदार: चंदन कुमार उर्फ डॉ. चंदन यादव (महागठबंधन – कांग्रेस/RJD) या कोई अन्य मजबूत RJD उम्मीदवार।
जीत/हार का निर्णायक विश्लेषण (अनुकूल और प्रतिकूल तथ्य)
बेल्दौर विधानसभा क्षेत्र में मुख्य रूप से कुर्मी (लव-कुश), यादव, मुस्लिम, अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और अनुसूचित जाति (SC) के मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यह सीट JDU के पन्ना लाल सिंह पटेल के लिए व्यक्तिगत गढ़ रही है, जिन्होंने यहाँ से लगातार 2010, 2015 और 2020 में जीत हासिल की है।
1. NDA (JDU) उम्मीदवार की जीत के पक्ष में विश्लेषण (अनुकूल तथ्य)
पन्ना लाल सिंह पटेल या NDA उम्मीदवार की संभावित जीत के मुख्य कारण और अनुकूल तथ्य निम्नलिखित हैं:
- लोकसभा चुनाव 2024 का अभूतपूर्व रुझान (सबसे बड़ा तथ्य):
- सांख्यिकी: 2024 के लोकसभा चुनाव में, NDA के उम्मीदवार (LJP-RV) को बेल्दौर विधानसभा क्षेत्र में 47,288 वोटों की विशाल बढ़त मिली। यह दर्शाता है कि NDA के सभी कोर वोट बैंक (लव-कुश, सवर्ण, EBC) पूरी तरह एकजुट थे।
- JDU का ‘अभेद किला’ बनना: बेल्दौर 2010 में बनी, और JDU ने यहाँ से लगातार तीन चुनाव (2010, 2015, 2020) जीते हैं। यह मतदाता के मन में JDU के प्रति एक गहरा विश्वास और वफादारी को दिखाता है।
- NDA गठबंधन की एकजुटता: 2020 में, LJP ने अपना उम्मीदवार खड़ा किया था, जिसने JDU के वोटों में की सेंध लगाई। इस बार LJP (राम विलास) के NDA में वापस आने से, JDU के कोर लव-कुश वोट और LJP के दलित/अन्य EBC वोट एकजुट होंगे, जिससे जीत का अंतर बहुत बड़ा हो सकता है।
- व्यक्तिगत पकड़ और छवि: पन्ना लाल सिंह पटेल की इस क्षेत्र में एक पुरानी और स्थापित राजनीतिक छवि है, जिसका लाभ उन्हें व्यक्तिगत रूप से मिलता है।
2. महागठबंधन (कांग्रेस/RJD) उम्मीदवार की हार/चुनौती के पक्ष में विश्लेषण (प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी)
महागठबंधन (RJD/कांग्रेस) उम्मीदवार की राह में आने वाली मुख्य चुनौतियाँ निम्नलिखित हैं:
- ‘MY’ समीकरण का अप्रभावी होना:
- प्रतिकूल तथ्य: बेल्दौर में यादव और मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी संख्या होने के बावजूद, 2020 में महागठबंधन यह सीट हार गया। यह दिखाता है कि JDU का लव-कुश + अति पिछड़ा वर्ग + सवर्ण का समीकरण, NDA गठबंधन के रूप में, महागठबंधन के ‘MY’ समीकरण पर भारी पड़ता है।
- वोट विभाजन (RJD बनाम अन्य): महागठबंधन में RJD के साथ-साथ अन्य छोटे दलों (जैसे VIP, वाम दल) की दावेदारी हो सकती है। यदि RJD या कांग्रेस अपने यादव वोट को पूरी तरह से संगठित नहीं कर पाते हैं और गैर-यादव EBC को आकर्षित करने में विफल रहते हैं, तो उनकी हार तय है।
- 2020 का कम अंतर, बड़ा खतरा:
- सांख्यिकी: 2020 में JDU की जीत का अंतर मात्र था। यह अंतर इसलिए कम था क्योंकि LJP ने वोट काटे थे। इस बार LJP के NDA के साथ होने से, यह वोट सीधे NDA के खाते में जाने की संभावना है, जिससे महागठबंधन के लिए वापसी करना लगभग असंभव हो जाएगा।
- तेजस्वी यादव की लोकप्रियता का परीक्षण: RJD को उम्मीद है कि तेजस्वी यादव की ‘जॉब और विकास’ की अपील पर युवा और EBC का एक वर्ग जातीय आधार को छोड़कर उनके साथ आएगा, लेकिन बेल्दौर के मजबूत जातीय-व्यक्तिगत गढ़ में यह प्रयास चुनौतीपूर्ण होगा।
निष्कर्ष
बेल्दौर विधानसभा सीट पर NDA (JDU) की स्थिति बहुत मजबूत दिखाई देती है।
जीत का कारण: JDU विधायक पन्ना लाल सिंह पटेल की लगातार तीन जीत का रिकॉर्ड और 2024 लोकसभा चुनाव में NDA की लगभग वोटों की भारी बढ़त यह संकेत देती है कि NDA का कोर वोट बैंक एकजुट है। NDA की जीत सुनिश्चित मानी जा सकती है, जब तक कि महागठबंधन का उम्मीदवार यादव-मुस्लिम वोटों को पूरी तरह से एकजुट न कर ले और एंटी-इन्कम्बेंसी के नाम पर EBC का एक बड़ा हिस्सा तोड़ने में सफल न हो जाए, जिसकी संभावना कम है।
