बैकुंठपुर (गोपालगंज जिला) विधानसभा सीट – चुनावी रणभूमि का विश्लेषण
गोपालगंज जिले की बैकुंठपुर विधानसभा सीट बिहार की सबसे जटिल और दिलचस्प सीटों में से एक है। 2020 में यह सीट भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हाथ से फिसलकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के पास चली गई थी।1 2025 का चुनाव वर्तमान विधायक प्रेम शंकर प्रसाद (RJD/महागठबंधन) और पूर्व विधायक मिथिलेश तिवारी (BJP/NDA) के बीच एक सीधा और कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है।
जीतने वाले उम्मीदवार का अनुमान: प्रेम शंकर प्रसाद (राष्ट्रीय जनता दल – RJD / महागठबंधन)
वर्तमान विधायक और महागठबंधन के उम्मीदवार प्रेम शंकर प्रसाद (प्रेम शंकर यादव) को अपनी सीट बचाने में सफल होने का मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
जीत के संभावित विश्लेषण (प्रेम शंकर प्रसाद के पक्ष में):
| विश्लेषण बिंदु | तथ्य और आंकड़े (प्रेम शंकर प्रसाद के पक्ष में) |
| NDA का आंतरिक ‘विद्रोह’ | 2020 में प्रेम शंकर प्रसाद की जीत का सबसे बड़ा कारण NDA का आंतरिक मतभेद था। जेडीयू के पूर्व विधायक मनजीत कुमार सिंह (जो 2010 में जीते थे) ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था और 43,354 वोट प्राप्त किए थे। यह वोट सीधे तौर पर BJP के मिथिलेश तिवारी (56,694 वोट) के सवर्ण/राजपूत/ओबीसी वोट बैंक को काट गया, जिससे RJD उम्मीदवार को (67,807 वोट) 11,113 वोटों से जीत मिली। यदि 2025 में मनजीत सिंह (या कोई अन्य बागी) मैदान में रहते हैं, तो RJD की जीत लगभग तय है। |
| RJD का मजबूत M-Y आधार | यह सीट गोपालगंज जिले में है, जो लालू यादव का गृह जिला है। RJD का पारंपरिक मुस्लिम-यादव (M-Y) समीकरण इस सीट पर एक निर्णायक आधार वोट बैंक है (2020 में 37.01% वोट शेयर)। गठबंधन की एकजुटता RJD को मजबूती देगी। |
| वर्तमान विधायक की सक्रियता | स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, प्रेम शंकर प्रसाद विधायक बनने के बाद क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं और गरीबों के बीच उनकी पैठ मजबूत हुई है। उनके द्वारा क्षेत्र में विकास कार्यों (जैसे बांध पर काम, स्वास्थ्य सुविधाओं) पर जोर दिया गया है, जिसका लाभ उन्हें मिल सकता है। |
| 2024 लोकसभा चुनाव का स्विंग | 2024 के लोकसभा चुनाव में गोपालगंज सीट पर जेडीयू (NDA) की जीत हुई थी, और बैकुंठपुर विधानसभा क्षेत्र में NDA को 16,964 वोटों की बढ़त मिली थी। हालाँकि, विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार और स्थानीय समीकरण अधिक मायने रखते हैं, और मनजीत सिंह की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। |
हारने वाले उम्मीदवार का अनुमान: मिथिलेश तिवारी (भारतीय जनता पार्टी – BJP / NDA)
पूर्व विधायक और BJP के उम्मीदवार मिथिलेश तिवारी इस बार भी मुख्य चुनौती होंगे।
हार के संभावित विश्लेषण (मिथिलेश तिवारी के विपक्ष में):
| विश्लेषण बिंदु | तथ्य और आंकड़े (मिथिलेश तिवारी के विपक्ष में) |
| बागी उम्मीदवार की चुनौती | उनकी हार का सबसे बड़ा और एकमात्र कारण मनजीत कुमार सिंह (निर्दलीय/बागी) की उपस्थिति थी। जब तक NDA गठबंधन मनजीत सिंह को साध नहीं लेता और उन्हें चुनाव लड़ने से नहीं रोकता, तब तक मिथिलेश तिवारी के लिए जीत मुश्किल बनी रहेगी, क्योंकि सवर्ण और गैर-यादव ओबीसी वोटों का विभाजन जारी रहेगा। |
| त्रिकोणीय मुकाबले का नुकसान | बैकुंठपुर का इतिहास दिखाता है कि यह सीट तभी भाजपा/NDA जीतती है जब यादव और गैर-यादव पिछड़े वोटों का विभाजन होता है (जैसे 2015 में जब उन्होंने JDU के मनजीत सिंह को हराया था)। 2020 में खुद उन्हीं के वोट बँट गए और उन्हें नुकसान हुआ। किसी भी त्रिकोणीय मुकाबले में RJD को सीधा लाभ होता है। |
| स्थानीय एंटी-इनकम्बेंसी का खतरा (पिछली बार) | 2020 में, वह 2015 के अपने 14,115 वोटों के अंतर को बचा नहीं पाए थे, जो उनकी व्यक्तिगत एंटी-इनकम्बेंसी या तत्कालीन JDU-BJP गठबंधन के खिलाफ माहौल का संकेत था। |
| विकास के दावों पर सवाल | मिथिलेश तिवारी ने विधायक रहते हुए विकास के कई दावे किए थे, जैसे ‘नारायण रिवर फ्रंट’, लेकिन स्थानीय जनता अभी भी बाढ़, नीलगाय की समस्या और सीमित बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दों पर सवाल उठाती है। इन मुद्दों पर RJD विधायक की सक्रियता से तुलनात्मक रूप से मिथिलेश तिवारी पिछड़ सकते हैं। |
निष्कर्ष:
बैकुंठपुर विधानसभा सीट पर परिणाम पूरी तरह से NDA गठबंधन के भीतर मनजीत कुमार सिंह की भूमिका पर निर्भर करेगा।
- यदि मनजीत सिंह चुनाव नहीं लड़ते हैं और NDA एकजुट होकर लड़ता है, तो यह मुकाबला मिथिलेश तिवारी और प्रेम शंकर प्रसाद के बीच कांटे की टक्कर होगी, जिसमें NDA का पलड़ा भारी हो सकता है (2024 लोकसभा बढ़त के कारण)।
- यदि मनजीत सिंह निर्दलीय या किसी अन्य पार्टी (जैसे जन सुराज) से चुनाव लड़ते हैं, तो NDA के वोटों का विभाजन सुनिश्चित है, जिससे प्रेम शंकर प्रसाद (RJD) के लिए 11,113 वोटों के अंतर को बरकरार रखते हुए जीत हासिल करना आसान हो जाएगा।
सर्वाधिक संभावना मनजीत सिंह के फिर से मैदान में आने की है, जिसके कारण प्रेम शंकर प्रसाद की जीत की अधिक संभावना है।
अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि यह विश्लेषण वर्तमान राजनीतिक माहौल, पिछले चुनावों के आंकड़ों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। चुनाव परिणाम कई कारकों पर निर्भर करते हैं और अंतिम परिणाम मतदान के दिन मतदाताओं के रुख पर निर्भर करेगा।