कैमूर जिले की हृदयस्थली भभुआ विधानसभा (सीट संख्या 205) इस बार बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एक बार फिर केंद्र में है। सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत, शिक्षा, व्यापार और सामाजिक जागरूकता के लिए प्रसिद्ध यह क्षेत्र अब राजनीतिक जागरूकता के नए दौर से गुजर रहा है। यहाँ पर इस बार का मुकाबला न केवल भाजपा और राजद के बीच है, बल्कि यह “स्थानीय बनाम बाहरी उम्मीदवारों” की नीति की भी परीक्षा बन गया है ।
भौगोलिक और सामाजिक स्वरूप
भभुआ सीट कैमूर जिले की प्रशासनिक राजधानी है, जहाँ भौगोलिक विविधता उल्लेखनीय है। उत्तर में बक्सर और गाजीपुर (उत्तर प्रदेश), दक्षिण में झारखंड का गढ़वा जिला तथा पश्चिम में चंदौली और रोहतास जिले इसकी सीमाएँ बनाते हैं। यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से सोन घाटी का हिस्सा रहा है, जो कृषि और व्यापार के लिए प्रसिद्ध है।
2021 की जनगणना के अनुसार यहाँ की कुल जनसंख्या लगभग 3.25 लाख है, जिनमें ग्रामीण मतदाताओं की हिस्सेदारी 85% से अधिक है। अनुसूचित जाति व जनजाति मतदाता मिलाकर लगभग 22% हैं, जबकि भूमिहार, राजपूत, यादव, कुर्मी और मुस्लिम मतदाता यहाँ के सबसे प्रभावशाली समूह हैं ।
ऐतिहासिक राजनीतिक यात्रा
शुरुआती दौर
भभुआ की राजनीतिक यात्रा आज़ादी के बाद कांग्रेस के प्रभुत्व से शुरू हुई। 1950 से लेकर 1970 के दशक तक कांग्रेस ने यहाँ लगातार विजय प्राप्त की।
जनता पार्टी और लोकदल के दौर (1977–1985) में सामाजिक न्याय की लहर यहाँ पहुँची और यादव-पासवान मतदाताओं के इर्द-गिर्द राजनीति की नई धुरी बनी ।
जनता दल और राजद का दौर
1990 तक भभुआ में जनता दल का प्रभाव गहराया और फिर 2000 के दशक में लालू प्रसाद यादव की राजद ने अपनी स्थिति मजबूत की। 2000 में धर्मेन्द्र प्रसाद (राजद) ने 21,799 वोटों के अंतर से भारी जीत दर्ज की ।
2005 में जदयू के नरेंद्र कुमार पांडे ने जीत कर सत्ता परिवर्तन की दिशा में मोड़ दिया, वहीं 2010 में लोजपा और भाजपा ने गठबंधन के तहत मुकाबला किया ।
भाजपा और राजद का आधुनिक संघर्ष
2015 में भाजपा के आनंद भूषण पांडे ने डॉ. प्रमोद कुमार सिंह (जदयू) को 7,744 वोटों के अंतर से हराया।
2020 में जनादेश ने करवट ली जब राजद के भरत बिंद ने भाजपा की रिंकी रानी पांडे को 10,045 वोटों के अंतर से हराकर सीट पर कब्जा किया। भरत बिंद को 57,561 वोट (32.98%) मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी को 47,516 वोट (27.22%) मिले ।
वर्तमान स्थिति (2025 चुनाव)
2025 के विधानसभा चुनाव में भभुआ सीट का मुकाबला फिर से दिलचस्प हो गया है।
राजद ने मौजूदा विधायक भरत बिंद की जगह वीरेन्द्र कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है।
भाजपा से रिंकी रानी पांडे को पुनः टिकट मिला है, जो महिला सशक्तिकरण का चेहरा बनकर सामने आ रही हैं।
जदयू, एनडीए गठबंधन की सीट शेयरिंग के तहत यहाँ भाजपा का उम्मीदवार उतार रही है ।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार “महिला नेतृत्व बनाम पिछड़ी जाति समीकरण” का मुकाबला देखने को मिलेगा।
राजद ने युवाओं और किसानों की समस्याओं पर केंद्रित चुनाव एजेंडा अपनाया है, जबकि भाजपा स्थानीय विकास, महिला सुरक्षा और सड़क–बिजली जैसी आधारभूत सुविधाओं को अपना मुख्य मुद्दा बना रही है ।
जातीय समीकरण और चुनावी गणित
भभुआ सीट पर जातीय संरचना चुनाव परिणाम को काफी प्रभावित करती है।
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भूमिहार और ब्राह्मण मतदाता लगभग 18%
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अनुसूचित जाति (मुख्यतः बिंद, पासवान) लगभग 21%
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यादव मतदाता करीब 14%
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मुस्लिम मतदाता लगभग 10%
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कुर्मी, कोरी और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) कुल मिलाकर 25% हिस्सा रखते हैं ।
भाजपा परंपरागत रूप से उच्च जाति मतदाताओं पर निर्भर रहती है, जबकि राजद अपने कोर वोट बैंक—यादव, मुसलमान और बिंद समुदाय—पर भरोसा कर रही है।
वीरेन्द्र कुशवाहा की उम्मीदवारी से कुशवाहा जाति का बड़ा वोट बैंक राजद के झंडे तले आने की संभावना बनी हुई है ।
स्थानीय मुद्दे और जनता की अपेक्षाएँ
भभुआ विधानसभा क्षेत्र कृषि प्रधान क्षेत्र है, जहाँ अधिकांश आबादी गेहूँ, धान और मक्का की खेती पर निर्भर है। प्रमुख स्थानीय मुद्दे निम्न हैं –
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कैमूर बाँध परियोजना के आधुनिकीकरण की माँग
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सिंचाई तंत्र की खराब हालत
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शहर में जलनिकासी और आवास योजना की धीमी प्रगति
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युवाओं के लिए रोजगार के सीमित अवसर
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भभुआ–चैनपुर–रामगढ़ सड़क मार्ग का चौड़ीकरण
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पर्यटन विकास: कैमूर नेशनल पार्क और मुंडेश्वरी देवी मंदिर को राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करने की माँग
महिलाओं के लिए सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार भी प्रमुख चिंताओं में शामिल है।
2025 का चुनाव कार्यक्रम
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 दो चरणों में आयोजित हो रहे हैं।
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प्रथम चरण: 6 नवंबर 2025
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द्वितीय चरण: 11 नवंबर 2025
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मतगणना: 14 नवंबर 2025
भभुआ सीट पर दूसरे चरण में मतदान होगा, इसकी अधिसूचना 13 अक्टूबर को जारी हुई और नामांकन 20 अक्टूबर तक चले। परिणाम की घोषणा 14 नवंबर को होगी।
मतदान और भागीदारी
2020 में कुल 2,62,167 पंजीकृत मतदाताओं में से लगभग 1.70 लाख मतदाताओं ने वोट डाला था (मतदान प्रतिशत 65.1%) ।
पुरुषों की भागीदारी 69% और महिलाओं की 61% रही, जिससे यह स्पष्ट है कि महिला मतदाता निर्णायक हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र में भाजपा को मामूली बढ़त मिली थी, लेकिन विधानसभा स्तर पर राजद का पकड़ ज्यादा मजबूत माना जा रहा है।
चुनावी रणनीतियाँ और प्रमुख वादे
भाजपा ने अपने घोषणापत्र में निम्नलिखित वादे किए हैं –
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भभुआ मेडिकल कॉलेज को अपग्रेड कर सुपर स्पेशलिटी सुविधा प्रदान करना
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भभुआ–रामगढ़ पर्यटन सर्किट विकसित करना
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महिला कॉलेज की स्थापना
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हर गाँव तक पक्की सड़क और शुद्ध जल योजना
वहीं राजद का घोषणापत्र “ग्रामीण पुनर्जागरण और समान अवसर” थीम पर है, जिसमें –
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युवाओं के लिए कृषि आधारित स्टार्टअप फंड
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किसान क्रेडिट कार्ड में सुधार
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कैमूर उद्योग नगरी योजना
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महिला स्व-सहायता समूहों का विस्तार – शामिल हैं ।
इतिहास के प्रमुख विजेता और पराजित उम्मीदवार
| वर्ष | विजेता | दल | मत (वोट शेयर) | हारने वाला उम्मीदवार | दल | अंतर |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 2020 | भरत बिंद | आरजेडी | 57,561 (32.98%) | रिंकी रानी पांडे | भाजपा | 10,045 |
| 2015 | आनंद भूषण पांडे | भाजपा | 50,768 (34.5%) | प्रमोद कुमार सिंह | जदयू | 7,744 |
| 2010 | प्रमोद कुमार सिंह | लोजपा | 31,246 (26%) | आनंद भूषण पांडे | भाजपा | 447 |
| 2005 | नरेंद्र कुमार पांडे | जदयू | 54,767 (48%) | केशव प्रसाद सिंह | राजद | 18,804 |
| 2000 | धर्मेन्द्र प्रसाद | राजद | 70,370 (47%) | पुनम देवी | एसएपी | 21,799 |
| 1995 | गणेश प्रसाद सिंह | जनता दल | 53,512 (42%) | पुनम देवी | कांग्रेस | 22,230 |
| 1985 | पुनम देवी | कांग्रेस | 47,163 (54%) | गणेश प्रसाद सिंह | लोकदल | 17,066 |
निष्कर्ष
भभुआ विधानसभा की यह लड़ाई केवल सत्ता परिवर्तन की नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की प्रतीक भी है।
2025 का चुनाव यहाँ जातीय संतुलन, नेतृत्व के स्वरूप, विकास के मॉडल और महिला प्रतिनिधित्व तीनों की दिशा तय करेगा।
भाजपा रिंकी रानी पांडे के माध्यम से महिला नेतृत्व पर भरोसा जता रही है, जबकि राजद वीरेंद्र कुशवाहा को पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधि के रूप में पेश कर रही है।
कौन जीतेगा इसका उत्तर तो मतगणना के दिन मिलेगा, पर इतना निश्चित है कि भभुआ की गूंज पूरे बिहार की राजनीति में निर्णायक प्रभाव डालने जा रही है ।
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