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भागलपुर का सिंहासन 2025: क्या ‘सिल्क सिटी’ में कांग्रेस की हैट्रिक को तोड़ पाएगा BJP का ‘एंटी-इन्कम्बेंसी’ दाँव?

भागलपुर विधानसभा सीट: एक विश्लेषणात्मक संभावना (2025)

भागलपुर विधानसभा सीट कांग्रेस (INC) के अजीत शर्मा के लगातार तीन बार जीतने के बावजूद, भाजपा का गढ़ मानी जाती रही है। यह सीधा मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही रहने की संभावना है। जातीय समीकरण, कम मतदान प्रतिशत और स्थानीय मुद्दे यहाँ जीत-हार तय करते हैं।

वर्तमान रुझानों और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए, इस बार भी मुकाबला बेहद करीबी होगा, लेकिन सत्ता विरोधी लहर और एकजुट NDA के कारण BJP के उम्मीदवार के जीतने की थोड़ी अधिक संभावना है।

संभावित विजेता उम्मीदवार: NDA गठबंधन के उम्मीदवार (संभावित रूप से BJP के रोहित पांडेय)

NDA गठबंधन के उम्मीदवार (संभावित रूप से 2020 के उपविजेता रोहित पांडेय) की जीत की मजबूत संभावना है।

जीत के पक्ष में मजबूत विश्लेषण और तथ्य
1. तीन बार की ‘एंटी-इन्कम्बेंसी’ (सत्ता विरोधी लहर): कांग्रेस के अजीत शर्मा 2014 के उपचुनाव, 2015 और 2020 में लगातार तीन बार यह सीट जीत चुके हैं। इतनी लंबी अवधि के बाद, विधायक के खिलाफ एक स्वाभाविक सत्ता विरोधी लहर काम कर सकती है, जिसका सीधा लाभ भाजपा को मिलेगा।
2. BJP का ‘वैश्य’ और ‘सवर्ण’ कोर वोट बैंक: भागलपुर ‘सिल्क सिटी’ होने के कारण यहाँ वैश्य समुदाय की सबसे बड़ी आबादी है (लगभग 1 लाख से अधिक)। इसके साथ ही ब्राह्मण, भूमिहार, कायस्थ और मारवाड़ी समुदाय का बड़ा हिस्सा भाजपा का मजबूत और अटूट समर्थक रहा है। यह एकजुट सवर्ण और वैश्य वोट बैंक BJP की जीत का आधार है।
3. ‘करीबी’ हार से सबक और मजबूत प्रयास (2020 का आँकड़ा): 2020 में BJP के रोहित पांडेय मात्र 1113 वोटों के बेहद कम अंतर से हारे थे। यह दर्शाता है कि BJP ने 48.44% कम मतदान के बावजूद कड़ा मुकाबला दिया था। 2025 में पार्टी इस छोटी सी कमी को पूरा करने के लिए पूरी ताकत झोंक देगी।
4. NDA की संगठनात्मक ताकत: केंद्र में और राज्य में NDA की मजबूत संगठनात्मक पकड़, खासकर शहरी क्षेत्रों में, कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर अधिक मतदाताओं को बाहर निकालने में मदद करेगी, जो भागलपुर में कम मतदान प्रतिशत (48-49%) के इतिहास को देखते हुए निर्णायक साबित हो सकता है।
5. ‘MY’ फैक्टर का विभाजन: मुस्लिम (लगभग 85 हजार) मतदाता कांग्रेस के अजीत शर्मा को वोट देते हैं, लेकिन यादव मतदाताओं (लगभग 10 हजार) का एक बड़ा हिस्सा RJD को जाता है। यदि RJD या अन्य मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं, तो महागठबंधन का मुस्लिम-यादव (MY) वोट थोड़ा सा भी बँटा तो कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ जाएँगी।

विपक्षी उम्मीदवार (INC के अजीत शर्मा) के लिए प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी:

INC उम्मीदवार (अजीत शर्मा) के लिए प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी
1. जीत का बहुत कम अंतर (असुरक्षित सीट): 2020 में उनकी जीत का अंतर केवल 0.70% (1113 वोट) था। यह सांख्यिकी सीट को अत्यंत असुरक्षित श्रेणी में रखती है। मामूली उतार-चढ़ाव भी इस सीट को NDA की झोली में डाल सकता है।
2. उच्च जाति और वैश्य वोटों का पूर्ण ध्रुवीकरण: अजीत शर्मा (भूमिहार समुदाय) के होने के बावजूद, भाजपा के सामने वैश्य, ब्राह्मण और अन्य सवर्ण वोट बैंक का एक बड़ा हिस्सा (जो संख्या में सबसे अधिक हैं) एकजुट होकर भाजपा को ही वोट करता है। यह जातिगत समीकरण कांग्रेस के विरुद्ध जाता है।
3. स्थिर मतदान प्रतिशत और ‘वैश्य’ मतदाताओं की उदासीनता: भागलपुर में मतदान प्रतिशत ऐतिहासिक रूप से कम (लगभग 48-49%) रहा है। यदि शहरी, शिक्षित, और वैश्य मतदाता अपनी उदासीनता छोड़ दें और अधिक संख्या में मतदान करें, तो यह सीधे तौर पर भाजपा को मजबूत करेगा और कांग्रेस की राह मुश्किल होगी।
4. RJD के वोट बैंक पर निर्भरता: कांग्रेस की जीत मुख्यतः मुस्लिम मतदाताओं (जो एक बड़ी आबादी है) और RJD के यादव वोट बैंक के मजबूत समर्थन पर टिकी है। इन वोटों में थोड़ी सी भी कमी या विभाजन कांग्रेस की हार सुनिश्चित कर सकता है।

निष्कर्ष:

भागलपुर की सीट पर मुकाबला हमेशा की तरह INC और BJP के बीच सीधा और कांटे का होगा। यह एक हाई-प्रोफाइल सीट है जहाँ व्यक्तिगत छवि बनाम पार्टी और जातीय समीकरण की लड़ाई है। हालाँकि, तीन बार की सत्ता विरोधी लहर और बीजेपी के मजबूत कोर वोट बैंक की संख्या को देखते हुए, इस बार NDA गठबंधन (BJP) के उम्मीदवार की जीत की संभावना अधिक है, बशर्ते वे अपने कोर वोट बैंक को एकजुट रखने और कम मतदान प्रतिशत को बढ़ाने में सफल हों। जीत का अंतर पिछली बार की तरह 1000-5000 वोटों के बीच ही रहने की उम्मीद है।

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