मढ़ौरा विधानसभा सीट सारण जिले की एक महत्वपूर्ण सीट है, जिस पर पिछले 15 सालों से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का कब्जा है।1 यह सीट RJD के लिए एक मजबूत गढ़ मानी जाती है।2
वर्तमान विधायक: जितेन्द्र कुमार राय (RJD) – (पूर्व मंत्री)3
इस चुनाव में, महागठबंधन ने अपने वर्तमान और लगातार तीन बार के विजेता जितेन्द्र कुमार राय (RJD) पर फिर से भरोसा जताया है, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में अभी भी सीट बंटवारे और उम्मीदवार के नामांकन को लेकर खींचतान जारी है।
जीत की संभावना (पूर्वानुमान)
मढ़ौरा सीट पर महागठबंधन (RJD) के उम्मीदवार जितेन्द्र कुमार राय की जीत की संभावना बहुत अधिक (Stronger) है, क्योंकि यह RJD का पारंपरिक गढ़ है और हाल ही में NDA को बड़ा संगठनात्मक झटका लगा है।
विजेता उम्मीदवार के जीतने के मुख्य कारण और विश्लेषण (महागठबंधन – जितेन्द्र कुमार राय, RJD)
| तथ्य एवं सांख्यिकी | विश्लेषण एवं कारण |
| लगातार तीन बार की जीत (ट्रिपल हैट्रिक) | जितेन्द्र कुमार राय ने 2010, 2015 और 2020 में लगातार तीन बार यह सीट जीती है। यह उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता, स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ और M-Y समीकरण पर उनके नियंत्रण को दर्शाता है। |
| अभेद्य M-Y (मुस्लिम-यादव) समीकरण | मढ़ौरा सीट पर मुस्लिम (लगभग 14.3%) और यादव मतदाताओं का दबदबा है, जो RJD का मुख्य आधार है। यदि यह कोर वोट बैंक एकजुट रहता है, तो RJD की जीत सुनिश्चित मानी जाती है। |
| वर्तमान में NDA को लगा बड़ा झटका | NDA (राजग) को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब लोजपा (रामविलास) की उम्मीदवार सीमा सिंह और जदयू के बागी अल्ताफ आलम राजू सहित चार प्रत्याशियों का नामांकन रद्द हो गया। NDA अब कमजोर स्थिति में है और इसे नए सिरे से मजबूत उम्मीदवार की तलाश करनी होगी। |
| लोकसभा चुनाव के विपरीत विधानसभा में रुझान | यह देखा गया है कि मढ़ौरा के मतदाता लोकसभा में NDA (राजीव प्रताप रूडी) को वोट देते हैं, लेकिन विधानसभा में वे लालू प्रसाद यादव की पार्टी (RJD) को ही तरजीह देते हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में NDA को मिली बढ़त को विधानसभा चुनाव में दोहराना मुश्किल होगा। |
| उपलब्धि (पूर्व मंत्री) | विधायक जितेन्द्र राय महागठबंधन सरकार में मंत्री रह चुके हैं, जिसका लाभ उन्हें अपनी उपलब्धियों को भुनाने और क्षेत्र में बड़ा चेहरा होने के तौर पर मिल सकता है। |
अन्य उम्मीदवार के न जीतने के प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन – NDA)
| प्रतिकूल तथ्य एवं सांख्यिकी | विश्लेषण एवं कारण |
| सीट पर NDA का कमजोर इतिहास | मढ़ौरा सीट पर न तो BJP और न ही JDU कभी जीत पाई है। यह सीट RJD के गढ़ के रूप में जानी जाती है, जिससे NDA उम्मीदवारों के लिए इसे जीतना हमेशा एक चुनौती रहा है। |
| संगठनात्मक बिखराव (नामांकन रद्द होने से) | लोजपा (रामविलास) उम्मीदवार सीमा सिंह का नामांकन रद्द होना NDA के लिए बड़ा झटका है। इससे न केवल चुनाव प्रचार प्रभावित हुआ है, बल्कि राजपूत (सवर्ण) और पासवान (दलित) वोटों को एकजुट करने की NDA की रणनीति भी बाधित हुई है। |
| सवर्ण वोट बैंक का निर्णायक न होना | मढ़ौरा में मुस्लिम, यादव और राजपूत वोटरों का दबदबा है, लेकिन ब्राह्मण वोटर की भूमिका ‘निर्णायक’ मानी जाती है। NDA को राजपूत, ब्राह्मण और वैश्य वोटरों को पूरी तरह से एकजुट करना होगा, जो नामांकन रद्द होने के बाद मुश्किल हो गया है। |
| स्थानीय नाराजगी (एंटी-इनकम्बेंसी) को भुनाने में असमर्थता | विधायक जितेन्द्र राय के खिलाफ यदि कोई स्थानीय नाराजगी (एंटी-इनकम्बेंसी) है भी, तो NDA के पास कोई मजबूत और निर्विवाद विकल्प न होने के कारण इसका लाभ महागठबंधन को ही मिलेगा, क्योंकि ‘वोट कटवा’ प्रत्याशियों की संख्या बढ़ने की संभावना है। |
| लोकसभा और विधानसभा वोटिंग पैटर्न का अंतर | 2024 लोकसभा चुनाव में भले ही NDA को यहां बढ़त मिली हो, लेकिन मढ़ौरा का मतदाता विधानसभा चुनाव में स्थानीय चेहरे और जातीय समीकरण को अधिक महत्व देता है, जो पारंपरिक रूप से RJD के पक्ष में रहा है। |
यह विश्लेषण मढ़ौरा विधानसभा के मजबूत M-Y समीकरण, RJD उम्मीदवार की लगातार जीत की हैट्रिक और हाल ही में NDA को लगे संगठनात्मक झटके पर आधारित है। यह सीट RJD के लिए सबसे सुरक्षित सीटों में से एक मानी जा रही है।
