Site icon winapoll.com

मधुबनी का मिथिला युद्ध: क्या समीर महासेठ का ‘MY+अति-पिछड़ा’ गठजोड़ फिर मारेगा बाजी, या NDA पलटेगा पासा? 2025 का शहरी-ग्रामीण संघर्ष!

मधुबनी विधानसभा (सीट क्रम संख्या 36) बिहार के मधुबनी जिले की एक महत्वपूर्ण सीट है, जो शहरी और ग्रामीण मतदाताओं का मिश्रण है।1 इस सीट पर मुकाबला पारंपरिक रूप से लालू प्रसाद यादव की RJD और NDA गठबंधन के बीच कड़ा रहा है। 2020 में यह सीट महागठबंधन के खाते में गई थी, लेकिन जीत का अंतर बहुत कम था।

प्रमुख दावेदार और पिछला परिणाम (2020):

उम्मीदवार पार्टी प्राप्त वोट जीत का अंतर
समीर कुमार महासेठ (विजेता) RJD (महागठबंधन) 71,332 6,814 वोट
सुमन कुमार महासेठ VIP (NDA गठबंधन में) 64,518
अरविंद कुमार पूर्बे LJP 17,294

(टिप्पणी: 2020 में NDA गठबंधन में BJP-JDU के साथ VIP भी शामिल थी।2 VIP के सुमन कुमार महासेठ दूसरे स्थान पर रहे थे।3 इस बार NDA में BJP-JDU-LJP(R) या अन्य का समीकरण बन सकता है, जिससे समीकरण बदलेंगे।)


समीर कुमार महासेठ/महागठबंधन (RJD) की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण

अनुकूल तथ्य/विश्लेषण विवरण
RJD का मज़बूत M-Y (मुस्लिम-यादव) कोर वोट मधुबनी सीट पर मुस्लिम और यादव मतदाताओं की बड़ी संख्या है। RJD के समीर कुमार महासेठ (वैश्य/बनिया) को RJD के M-Y समीकरण का मज़बूत समर्थन मिलता है। यह आधार उन्हें एक महत्वपूर्ण बढ़त दिलाता है, जैसा कि 2020 में 71,332 वोटों के साथ देखा गया।
विधायक की स्वजातीय पकड़ (बनिया/वैश्य) समीर कुमार महासेठ वैश्य/बनिया समुदाय से आते हैं। RJD के M-Y समीकरण के साथ-साथ उनका अपने समुदाय के एक बड़े हिस्से पर भी प्रभाव है। यह संयोजन RJD के लिए अतिरिक्त वोट जुटाता है, जो आमतौर पर NDA का कोर माना जाता है।
स्थानीय मुद्दे और एंटी-इनकम्बेंसी (NDA के खिलाफ) मधुबनी में जलजमाव, शहर में अतिक्रमण, कम साक्षरता दर (58.62%) और महिलाओं में बहुत कम साक्षरता (46.16%) जैसे स्थानीय मुद्दे प्रमुख हैं। महागठबंधन इन समस्याओं को उठाकर, सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इनकम्बेंसी) को भुनाने का प्रयास करेगा, खासकर यदि NDA से कोई नया और कमज़ोर उम्मीदवार आता है।
तेजस्वी यादव का ‘नौकरी’ फैक्टर युवा मतदाताओं के बीच तेजस्वी यादव की 10 लाख नौकरियों की घोषणा और युवाओं पर फोकस उन्हें लाभ दे सकता है, विशेषकर कम रोज़गार वाले मिथिलांचल क्षेत्र में।

NDA उम्मीदवार की जीत की राह और RJD उम्मीदवार की हार के संभावित प्रतिकूल तथ्य

प्रतिकूल तथ्य/विश्लेषण (RJD की हार के संभावित कारण) विवरण
NDA का मजबूत जातिगत मिश्रण (सवर्ण + अति-पिछड़ा) NDA गठबंधन (BJP+JDU) मधुबनी की बड़ी संख्या वाली ब्राह्मण/सवर्ण आबादी के साथ-साथ JDU के अति-पिछड़ा और महादलित वोट बैंक को एकजुट करने का प्रयास करेगा। यदि NDA एक स्थानीय और लोकप्रिय ब्राह्मण उम्मीदवार उतारता है, तो ब्राह्मण वोटों का एकमुश्त ध्रुवीकरण RJD के वैश्य वोट बैंक को काट सकता है।
2020 में वोटों का बिखराव (VIP और LJP) 2020 में RJD की जीत का अंतर (6,814 वोट) बहुत कम था। VIP (64,518 वोट) और LJP (17,294 वोट) के वोटों को मिला दिया जाए, तो यह RJD के वोटों से बहुत अधिक था। यदि 2025 में NDA गठबंधन इस पूरे वोट बैंक को (संभावित रूप से VIP को शामिल किए बिना) अपने एक उम्मीदवार के पक्ष में एकजुट कर लेता है, तो RJD के लिए जीतना मुश्किल हो जाएगा।
RJD विधायक के प्रति स्थानीय असंतोष चूंकि विधायक समीर महासेठ 2020 में तीसरी बार विधायक बने, इसलिए उनके खिलाफ एक सामान्य एंटी-इनकम्बेंसी हो सकती है। यदि मतदाता यह महसूस करते हैं कि प्रमुख समस्याओं (जलजमाव, अतिक्रमण) का समाधान नहीं हुआ है, तो वे बदलाव के लिए वोट कर सकते हैं।
कम मतदान दर (54.13%) मधुबनी में मतदान दर (2020 में 54.13%) कम रही है। यदि NDA शहरी सवर्ण और वैश्य मतदाताओं को बूथ तक लाने में सफल होता है, तो RJD का M-Y आधार कम मतदान के कारण भी कमज़ोर पड़ सकता है।

निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):

मधुबनी विधानसभा सीट पर महागठबंधन (RJD) और NDA के बीच कड़ा और सीधा मुकाबला होने की प्रबल संभावना है। 2020 की तरह यह सीट 5-7 हज़ार वोटों के अंतर से ही तय होगी।

2025 के चुनाव में, RJD के समीर कुमार महासेठ को MY समीकरण और वैश्य समर्थन के कारण एक शुरुआती बढ़त मिल सकती है। हालांकि, यदि NDA गठबंधन एक मज़बूत ब्राह्मण या वैश्य उम्मीदवार के ज़रिए 2020 में VIP और LJP में बिखरे हुए वोटों को एकजुट कर लेता है, तो परिणाम पलट सकता है।

संभावित विजेता: समीर कुमार महासेठ (RJD – महागठबंधन)। (विधायक की स्थानीय सक्रियता और RJD के M-Y+वैश्य समीकरण की स्थिरता को देखते हुए, RJD के जीतने की संभावना मामूली रूप से अधिक है, लेकिन यह NDA के उम्मीदवार चयन और वोटों के बिखराव पर निर्भर करेगा।)

Exit mobile version