Site icon winapoll.com

मधुबन विधानसभा: राणा रणधीर सिंह (BJP) बनाम RJD की वापसी! क्या विकास की रफ़्तार पर भारी पड़ेगा M-Y का समीकरण?

पूर्वी चंपारण जिले की मधुबन विधानसभा सीट (Madhuban Assembly Seat) एक हाई-प्रोफाइल सीट है, जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री राणा रणधीर सिंह का दबदबा रहा है। 2025 में भी यह सीट NDA और महागठबंधन (RJD) के बीच कांटे की टक्कर का केंद्र बनी रहेगी।

प्रमुख संभावित उम्मीदवार (2025 के विश्लेषण के आधार पर):


राणा रणधीर सिंह (BJP) की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण

अनुकूल तथ्य/विश्लेषण विवरण
व्यक्तिगत साख और प्रभाव राणा रणधीर सिंह की इस क्षेत्र में मजबूत व्यक्तिगत साख है। उन्होंने 2015 में आरजेडी छोड़ बीजेपी में आने के बावजूद जीत दर्ज की, जो उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता को दर्शाता है। वह एक सशक्त भूमिहार नेता हैं।
लगातार जीत का रिकॉर्ड वह 2015 और 2020 के विधानसभा चुनाव लगातार जीत चुके हैं। यह लगातार जीत मतदाताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता और उनके काम पर भरोसे को दर्शाती है।
NDA का कोर वोट बैंक बीजेपी को सवर्ण, गैर-यादव ओबीसी (EBC/MBC) और गैर-पासवान दलितों का मजबूत समर्थन प्राप्त है। प्रधानमंत्री मोदी और नीतीश कुमार के कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ इस वर्ग को मिलता है।
कम अंतर के बावजूद जीत 2020 में उन्होंने RJD के मदन प्रसाद को 5,878 वोटों (लगभग 3.90% अंतर) के मामूली अंतर से हराया। कम अंतर यह दर्शाता है कि RJD का मजबूत प्रयास भी उन्हें सीट जीतने से नहीं रोक पाया।

महागठबंधन (RJD) के लिए संभावित प्रतिकूल तथ्य और आँकड़े

प्रतिकूल तथ्य/आँकड़े विवरण
RJD का जीत से चूकना RJD 2020 में अपनी पूरी ताकत और M-Y समीकरण के बावजूद यह सीट मात्र 5,878 वोटों से हार गई। यह दर्शाता है कि बीजेपी के उम्मीदवार का व्यक्तिगत प्रभाव RJD के जातीय आधार पर भारी पड़ा।
मुस्लिम-यादव (M-Y) वोटों का सीमित प्रभाव मधुबन सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है (लगभग 13%), और RJD को यादव वोटरों का भी भरपूर समर्थन मिलता है। लेकिन यह समीकरण जीत सुनिश्चित नहीं कर पाता, जिसका मतलब है कि सवर्ण और अति-पिछड़े वोट का ध्रुवीकरण BJP के पक्ष में मजबूत रहा है।
स्थानीय बनाम राष्ट्रीय/राज्य स्तरीय नेता राणा रणधीर सिंह को पूर्व मंत्री होने का लाभ मिलता है। महागठबंधन को उनसे मुकाबला करने के लिए तेजस्वी यादव की लहर या स्थानीय स्तर पर अत्यंत मजबूत और स्वीकार्य उम्मीदवार की आवश्यकता होगी, जो राणा रणधीर के व्यक्तिगत वोट को तोड़ सके।
कम मतदान प्रतिशत (Madhubani) हालांकि मधुबन (पूर्वी चंपारण) का मतदान 2020 में $61.5\%$ था, लेकिन अगर कम साक्षरता दर या ग्रामीण पिछड़ापन के कारण मतदाता उदासीन रहते हैं, तो यह RJD के लिए चुनौती बन सकता है क्योंकि उन्हें अक्सर परिवर्तन चाहने वाले बड़े समूह की आवश्यकता होती है।

निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):

मधुबन विधानसभा की लड़ाई हमेशा से व्यक्ति बनाम गठबंधन की रही है।

Exit mobile version