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महनार का ‘टफ फाइट’: क्या RJD का ‘माय’ समीकरण NDA के ‘कुशवाहा-राजपूत’ समीकरण पर पड़ेगा भारी?

महनार विधानसभा सीट (संख्या 129), वैशाली जिले में स्थित है और यह सीट बिहार की सबसे अनिश्चित सीटों में से एक मानी जाती है, जहाँ मुकाबला हमेशा कांटे का होता है। 2020 के चुनाव में भी जीत का अंतर बेहद कम रहा था।

संभावित विजेता: कांटे की टक्कर में RJD की वीणा सिंह (महागठबंधन)

(यह भविष्यवाणी पिछले चुनाव के रुझान, RJD के कोर वोट बैंक की मजबूती और वर्तमान राजनीतिक माहौल के आधार पर की गई है, लेकिन यह सीट निर्णायक रूप से किसी भी तरफ जा सकती है।)


जीत के मुख्य कारण और विश्लेषण (वीणा सिंह/RJD के पक्ष में तथ्य)

तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
यादव-मुस्लिम (MY) समीकरण की निर्णायक बढ़त महनार में किसी एक जाति का 15% से अधिक वर्चस्व नहीं है, लेकिन यादव और मुस्लिम मतदाताओं का संयुक्त वोट RJD का मुख्य आधार है। 2020 में RJD की वीणा सिंह को 37.34% वोट मिले थे, जो यह दर्शाता है कि RJD का कोर वोट बैंक एकजुट रहा।
मौजूदा विधायक का लाभ (Incumbency Advantage) वीणा सिंह वर्तमान में विधायक हैं। स्थानीय स्तर पर अगर उन्होंने अपने कोर मतदाताओं के बीच मजबूत पकड़ बनाए रखी है, तो यह उन्हें फिर से जीत दिला सकती है।
कम अंतर से जीत का मनोवैज्ञानिक लाभ (2020) 2020 में वीणा सिंह ने JDU के उमेश कुशवाहा को 7,947 वोटों के मामूली अंतर से हराया था। यह अंतर कम जरूर है, लेकिन यह दर्शाता है कि विभाजन के बावजूद महागठबंधन का पलड़ा थोड़ा भारी था।
तेजस्वी यादव की बढ़ती लोकप्रियता पूरे बिहार में तेजस्वी यादव की लोकप्रियता और उनके नेतृत्व को लेकर युवाओं में उत्साह, महागठबंधन को लाभ पहुंचा सकता है, जो महनार के समीकरण को RJD के पक्ष में मजबूत कर सकता है।

अन्य उम्मीदवार के न जीतने के प्रतिकूल तथ्य (उमेश कुशवाहा/NDA के संदर्भ में)

NDA इस सीट पर JDU के उमेश कुशवाहा (JDU के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके) को या उनके गठबंधन के किसी अन्य मजबूत उम्मीदवार को मैदान में उतार सकता है, जैसा कि उन्होंने 2020 में किया था।

प्रतिकूल तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
पिछले चुनाव में हार (2020) JDU के उमेश कुशवाहा को 2020 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था, जबकि NDA उस समय सत्ता में था। यह हार यह दर्शाती है कि महनार का जातीय समीकरण NDA के पक्ष में निर्णायक रूप से एकजुट नहीं हो पाया।
वोटों का विभाजन (2020) 2020 के चुनाव में NDA को LJP की ओर से कड़ी चुनौती मिली थी, जिसने 31,315 वोट हासिल किए थे। इस बार चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) NDA में शामिल है। हालांकि यह एकीकरण NDA को मजबूत करेगा, लेकिन यह देखना होगा कि JDU के उम्मीदवार को लोजपा का वोट पूरी तरह से हस्तांतरित होता है या नहीं।
जातीय समीकरण की जटिलता महनार में यादव (RJD का कोर), कुशवाहा (JDU का कोर), राजपूत और पासवान (NDA का मजबूत आधार) मतदाताओं की अच्छी संख्या है। यदि राजपूत और पासवान (लगभग 15% और अन्य दलित वर्ग) का वोट उमेश कुशवाहा को नहीं मिलता है, तो वह RJD को चुनौती नहीं दे पाएंगे।
विधायक के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर की कमी महनार एक ऐसी सीट है जहां सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) का सामना NDA के उम्मीदवार (पूर्व में) को करना पड़ा था। इस बार यह लहर RJD के विधायक के खिलाफ हो सकती है, लेकिन यदि विधायक का प्रदर्शन स्थानीय स्तर पर स्वीकार्य रहा है, तो NDA को लाभ नहीं मिल पाएगा।

निष्कर्ष:

महनार विधानसभा सीट पर मुकाबला RJD की वीणा सिंह और NDA के संभावित उम्मीदवार (संभवतः JDU से उमेश कुशवाहा) के बीच बेहद नजदीकी रहने की उम्मीद है।

  • RJD की जीत का आधार: तेजस्वी के नेतृत्व में यादव-मुस्लिम मतदाताओं का सघन ध्रुवीकरण और मौजूदा विधायक की व्यक्तिगत पकड़।
  • NDA के लिए चुनौती: राजपूत, पासवान और कुशवाहा वोट बैंक को 100% एकजुट करना और RJD के कोर ‘MY’ समीकरण को तोड़ना।

चूंकि 2020 में RJD ने मुश्किल समीकरणों के बावजूद यह सीट जीती थी, इसलिए यह माना जा सकता है कि वीणा सिंह (RJD) एक बार फिर थोड़े अंतर से यह सीट जीतने में सफल हो सकती हैं, लेकिन NDA इस सीट को पलटने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।

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