महिषी का महासंग्राम 2025: NDA के गुंजेश्वर साह या RJD के गौतम कृष्णा? कौन बनेगा सहरसा का सरदार!
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महिषी विधानसभा सीट (Mahishi Assembly Constituency) एक बार फिर से रोमांचक और बेहद कांटेदार मुकाबले का केंद्र बनने जा रही है। 2020 में इस सीट पर जीत का अंतर मात्र 1,630 वोटों का था, जो यह दर्शाता है कि यह सीट दोनों गठबंधनों के लिए ‘अति संवेदनशील’ है।
संभावित विजेता: गुंजेश्वर साह (जनता दल यूनाइटेड – JDU) – NDA गठबंधन
महिषी सीट पर वर्तमान राजनीतिक समीकरणों और पिछले चुनावों के करीबी नतीजों के गहन विश्लेषण के आधार पर, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार और निवर्तमान विधायक गुंजेश्वर साह (JDU) के लिए यह सीट बचाए रखने की संभावना थोड़ी अधिक है।
गुंजेश्वर साह (JDU) की जीत के पक्ष में विस्तृत विश्लेषण और तथ्य:
- अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और कुशवाहा/कुर्मी का मजबूत आधार:
- गुंजेश्वर साह स्वयं अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) से आते हैं। JDU का कोर वोट बैंक, जिसमें ईबीसी (EBC) और लव-कुश (कुर्मी-कुशवाहा) समुदाय शामिल हैं, इस सीट पर निर्णायक भूमिका निभाता है।
- नीतीश कुमार की EBC और महिला केंद्रित योजनाओं का लाभ सीधे JDU उम्मीदवार को मिलता है, खासकर कोसी क्षेत्र में।
- NDA की एकजुटता और वोट ट्रांसफर:
- 2020 में, गुंजेश्वर साह ने JDU उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी। 2025 में NDA गठबंधन (JDU, BJP, LJP-R) की एकजुटता, खासकर BJP के उच्च जाति (Upper Caste) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) वोटों के JDU को पूर्ण हस्तांतरण से, उनकी जीत का अंतर बढ़ सकता है।
- 2020 में LJP (एकल) के उम्मीदवार अब्दुर रज्जाक को 22,110 वोट मिले थे, जिससे JDU की जीत का अंतर कम हो गया था। इस बार, LJP (रामविलास) के NDA में रहने पर, ये वोट JDU को हस्तांतरित हो सकते हैं, जो जीत सुनिश्चित करेगा।
- विकास और व्यक्तिगत छवि:
- विधायक के रूप में उनके कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों और उनकी व्यक्तिगत स्वच्छ छवि (यदि कायम है) का लाभ उन्हें ‘डबल इंजन’ सरकार के चेहरे के रूप में मिलेगा।
गौतम कृष्णा (राष्ट्रीय जनता दल – RJD) की हार के प्रतिकूल तथ्य और आंकड़े:
महागठबंधन के उम्मीदवार गौतम कृष्णा (RJD) के लिए महिषी सीट पर जीत दर्ज करना आसान नहीं होगा, क्योंकि उन्हें कई आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा:
- ‘MY’ समीकरण के वोटों में संभावित विभाजन:
- RJD का मुख्य आधार ‘MY’ (मुस्लिम-यादव) समीकरण है। महिषी सीट पर मुस्लिम मतदाता महत्वपूर्ण संख्या में हैं।
- 2020 में RJD के पक्ष में लोजपा के अब्दुर रज्जाक (मुस्लिम) के खड़े होने से भी मुस्लिम वोटों का बड़ा हिस्सा विभाजित हुआ था। इस बार यदि कोई वाम दल (CPI-M) या AIMIM (जिसने इस सीट पर दावा ठोका है) अपना उम्मीदवार उतारती है, तो RJD के मुस्लिम वोटों में सेंध लग सकती है, जिससे गुंजेश्वर साह (JDU) को सीधा फायदा होगा।
- महागठबंधन की आंतरिक खींचतान:
- CPI-M (मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी) ने इस सीट पर दावा ठोका है। यदि RJD इस सीट को CPI-M को देने से मना करती है या सीट-शेयरिंग में विवाद होता है, तो वाम दलों का कैडर वोट RJD उम्मीदवार को नहीं मिलेगा, जैसा कि 2020 में LJP की वजह से हुआ था।
- 2020 की करीबी हार और एंटी-इनकम्बेंसी का अभाव:
- 2020 में गौतम कृष्णा (RJD) को JDU के गुंजेश्वर साह से केवल 1,630 वोटों से हार मिली थी (0.90% का अंतर)। यह अंतर इतना कम था कि इसे सिर्फ मामूली बदलाव ही पलट सकता है। इस बार RJD को जीतने के लिए JDU के EBC आधार में बड़ी सेंधमारी करनी होगी, जो नीतीश कुमार की उपस्थिति में कठिन है।
निष्कर्ष और पूर्वानुमान:
महिषी विधानसभा सीट पर मुकाबला पूरी तरह से JDU के EBC/लव-कुश/महिला वोट बैंक और RJD के MY समीकरण के बीच होगा।
- NDA के पक्ष में: NDA की एकजुटता और LJP के वोटों का JDU में संभावित हस्तांतरण निर्णायक साबित होगा।
- महागठबंधन के पक्ष में: यदि RJD किसी तरह JDU के EBC वोटों में सेंध लगाने में सफल होती है, और वाम दलों के साथ-साथ मुस्लिम वोट एकजुट रहते हैं, तो RJD यह सीट छीन सकती है।
पूर्वानुमान: सभी समीकरणों को देखते हुए, NDA गठबंधन के गुंजेश्वर साह (JDU) को 2025 के चुनाव में कड़े मुकाबले के बावजूद महिषी सीट पर मामूली अंतर से जीत मिलने की अधिक संभावना है।
