बिहार के सारण जिले में स्थित मांझी विधानसभा क्षेत्र बिहार की राजनीति में अपनी विशेष पहचान रखता है। यह विधानसभा क्षेत्र महाराजगंज लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और विधानसभा चुनाव 2025 में इसे अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मांझी विधानसभा क्षेत्र की स्थापना 1951 में हुई, और तब से यह राजनीतिक बदलावों, जातीय समीकरणों और स्थानीय मुद्दों का अखाड़ा रहा है। 2025 के चुनाव में इसकी रणनीतियां, उम्मीदवार और सामाजिक समीकरण बिहार की सियासत पर बड़ी छाप छोड़ेंगे।


भौगोलिक और जनसांख्यिकीय परिचय

मांझी विधानसभा क्षेत्र में सारण जिले का मांझी, जलालपुर प्रखंड पूरा और बनियापुर प्रखंड की कुछ पंचायतें शामिल हैं। यहां कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 3,10,000 के आसपास है। क्षेत्र में यह आबादी विविध है जिसमें राजपूत समुदाय सबसे बड़ा है, इसके बाद मुस्लिम, यादव, भूमिहार, कुर्मी और ब्राह्मण जैसे जातीय समूह आते हैं। अधिकांश भाग ग्रामीण और कृषि प्रधान है। गंगा और घाघरा नदियों के संगम पर स्थित यह इलाका बाढ़-प्रवण माना जाता है जहां बाढ़, नदी कटाव, सड़क एवं पुल जैसी समस्याएं आम हैं।


चुनावी इतिहास

  • 2020 में माकपा (सीपीएम) के डॉ. सत्येंद्र यादव ने निर्दलीय राणा प्रताप सिंह को 25,386 वोटों के अंतर से हराया।

  • इसके पहले 2015 में कांग्रेस के विजय शंकर दुबे ने निर्णायक जीत हासिल की थी।

  • 2010 में जदयू के गौतम सिंह सफल रहे।

  • मांझी विधानसभा सीट समय-समय पर कांग्रेस, जदयू, राजद, माकपा और निर्दलीयों के बीच बदलती रही है।

  • सत्ता पर कब्जा कई दफा जातीय समीकरणों के आधार पर हुआ है।


प्रमुख राजनीतिक चेहरे

  • डॉ. सत्येंद्र यादव (माकपा) – वर्तमान विधायक, जिनकी पकड़ क्षेत्र में मजबूत है।

  • राणा प्रताप सिंह (निर्दलीय) – पूर्व विधायक और स्थानीय प्रभावी नेता।

  • विजय शंकर दुबे (कांग्रेस) – पूर्व विधायक।

  • गौतम सिंह (जदयू) – पूर्व विधायक।

  • जीतन राम मांझी – स्थानीय प्रभावी नेता और “हम” दल के प्रमुख, जिनकी पुत्रवधू चुनाव लड़ रही हैं।


जातीय समीकरण

मांझी विधानसभा क्षेत्र में राजपूत समुदाय सर्वोच्च है, जो चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाता है। मुस्लिम, यादव, भूमिहार और कुर्मी जातियों का भी राजनीतिक प्रभाव गहरा है। इस क्षेत्र का राजनीतिक समीकरण जाति और समुदाय पर आधारित है, जहां गठबंधन और उम्मीदवार चयन की रणनीतियां इन मतदाताओं के आधार पर तय होती हैं।


प्रमुख चुनावी मुद्दे

  • बाढ़ और नदी कटाव– सैकड़ों घर और खेत नदी कटाव की चपेट में आते हैं, पुल और सड़क बुनियादी जरूरत हैं।

  • कृषि संकट– सिंचाई और निवेश में कमी, कर्ज में फंसे किसान।

  • बेरोजगारी– युवाओं में रोजगार की मांग।

  • शिक्षा और स्वास्थ्य– गांवों में स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र कमजोर।

  • सड़क और बिजली– कनेक्टिविटी में सुधार की आवश्यकता।


2025 चुनावी नजरिया

  • माकपा के डॉ. सत्येंद्र यादव पुनः मैदान में हैं, जो अपनी मजबूती पर भरोसा करते हैं।

  • कांग्रेस, जदयू, राजद और नया दल “हम” भी इस जिले में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

  • जातीय समीकरण, विकास एजेंडा, और स्थानीय नेतृत्व की छवि इस चुनाव को निर्णायक बनाएंगी।


निष्कर्ष

मांझी विधानसभा सीट बिहार के राजनीतिक परिदृश्य का समृद्ध प्रतिनिधित्व करती है, जहां सामाजिक न्याय, विकास, और जातीय समीकरण चुनाव के मुख्य आधार हैं। 2025 का चुनाव इस क्षेत्र में परिवर्तन और विकास दोनों के द्वंद्व को स्पष्ट करेगा। जनता प्रत्याशियों के विकास योजनाओं और सामाजिक न्याय के वादों को ध्यान से आंकेंगी। इसलिए मांझी की यह राजनीतिक जंग बिहार की राजनीति में नए अध्याय की ओर इशारा है, जिसका नतीजा पूरे सारण जिले और राज्य के लिए महत्वपूर्ण होगा।

 

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