1️⃣ प्रमुख उम्मीदवार
| गठबंधन | पार्टी | उम्मीदवार (संभावित) | पिछला प्रदर्शन (2020) |
| NDA | भारतीय जनता पार्टी (BJP) | कुमार प्रणय (पूर्व जिलाध्यक्ष) | (2020 में NDA से प्रणव कुमार ने 1244 वोटों से जीता) |
| महागठबंधन | राष्ट्रीय जनता दल (RJD) | अविनाश कुमार विद्यार्थी (2020 के उपविजेता) | (प्रणव कुमार से 1244 वोटों से हारे) |
| अन्य | AIMIM | डॉ. मुनाजिर हसन (पूर्व सांसद) | – |
2️⃣ 🏆 NDA (भाजपा) उम्मीदवार कुमार प्रणय की जीत के संभावित कारण (अनुकूल तथ्य)
NDA ने 2020 के विजेता सिटिंग विधायक प्रणव कुमार का टिकट काटकर वैश्य समुदाय से आने वाले कुमार प्रणय पर दांव लगाया है।
- सशक्त वैश्य दांव (Social Engineering): मुंगेर एक वैश्य-बाहुल्य क्षेत्र है, जहाँ इस समुदाय के मतदाताओं की संख्या निर्णायक है। कुमार प्रणय को उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने सीधे-सीधे वैश्य समुदाय को साधने की कोशिश की है। 2020 में जीत का अंतर बहुत कम था, इस नए समीकरण से NDA अपनी जीत की मार्जिन बढ़ाना चाहती है।
- सिटिंग विधायक (प्रणव कुमार) के प्रति एंटी-इनकम्बेंसी का फायदा: भाजपा ने वर्तमान विधायक प्रणव कुमार का टिकट काट दिया है। अगर उनके खिलाफ कोई स्थानीय स्तर की सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) थी, तो टिकट कटने से वह नाराजगी अब पार्टी पर नहीं पड़ेगी, बल्कि नए उम्मीदवार को एक साफ छवि के साथ मौका मिलेगा।
- केंद्रीय नेतृत्व और मोदी फैक्टर: उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (पड़ोसी सीट तारापुर से उम्मीदवार) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जैसे बड़े नेताओं की सक्रियता मुंगेर प्रमंडल में NDA के पक्ष में माहौल बनाने का काम कर रही है, जिसका सीधा असर मुंगेर सीट पर पड़ेगा।
- सवर्ण वोट बैंक का एकजुट समर्थन: वैश्य के साथ-साथ भूमिहार और राजपूत जैसे सवर्ण मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा NDA का पारंपरिक वोटर माना जाता है, जो इस बार एकजुट होकर भाजपा के पक्ष में मतदान कर सकता है।
3️⃣ ❌ महागठबंधन (राजद) उम्मीदवार अविनाश कुमार विद्यार्थी की हार के संभावित तथ्य (प्रतिकूल तथ्य)
राजद ने 2020 के उपविजेता अविनाश कुमार विद्यार्थी को फिर से मैदान में उतारा है, जिनका मुकाबला इस बार और भी कठिन है।
- यादव-मुस्लिम वोट बैंक में सेंध:
- मुंगेर सीट यादव और मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है, जो राजद का मुख्य आधार है। लेकिन AIMIM ने यहाँ से डॉ. मुनाजिर हसन (पूर्व सांसद) को मैदान में उतारा है। डॉ. हसन मुस्लिम समुदाय से आते हैं और उनकी पहचान व्यापक रही है।
- AIMIM की उपस्थिति महागठबंधन के मुस्लिम वोटों में एक बड़ी सेंधमारी कर सकती है, जिससे राजद के समीकरण कमजोर पड़ सकते हैं।
- पिछली बार का बेहद कम अंतर:
- 2020 में अविनाश विद्यार्थी सिर्फ 1244 वोटों से हार गए थे। यह दिखाता है कि सीट पर कड़ी टक्कर है, और कोई भी छोटा सा फैक्टर, जैसे कि AIMIM द्वारा मुस्लिम वोट काटना या नए भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में वैश्य वोट की गोलबंदी, उनकी हार का कारण बन सकता है।
- कमजोर सहयोगी (कांग्रेस) का प्रभाव:
- मुंगेर प्रमंडल में महागठबंधन का प्रमुख सहयोगी कांग्रेस पिछली बार कुछ सीटों पर कमजोर प्रदर्शन के कारण विवादों में रहा है। कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन का नकारात्मक प्रभाव भी राजद के पक्ष में बन रहे माहौल को कमजोर कर सकता है।
- स्थानीय मुद्दों पर पकड़ की कमी:
- मुंगेर में अवैध हथियार उद्योग, महादलितों की दयनीय स्थिति, सरकारी योजनाओं से वंचित रहना, और रोजगार के लिए पलायन जैसे गंभीर स्थानीय मुद्दे हैं। यदि राजद का प्रचार केवल बड़े नारों पर केंद्रित रहा और इन स्थानीय समस्याओं पर मजबूत समाधान पेश नहीं किया गया, तो मतदाता उनसे विमुख हो सकते हैं।
4️⃣ निर्णायक फैक्टर: त्रिकोणीय संघर्ष
मुंगेर का चुनाव पूरी तरह से त्रिकोणीय संघर्ष पर निर्भर करेगा:
- NDA का वैश्य दांव (कुमार प्रणय)।
- राजद का यादव आधार (अविनाश विद्यार्थी)।
- AIMIM का मुस्लिम वोटों में हस्तक्षेप (डॉ. मुनाजिर हसन)।
यदि AIMIM मुस्लिम वोटों में महत्वपूर्ण विभाजन करने में सफल होती है, तो यह सीट NDA (कुमार प्रणय) के लिए जीतना बहुत आसान हो जाएगा, भले ही 2020 में प्रणव कुमार की जीत का मार्जिन कम रहा हो।