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मुकेश सहनी बने महागठबंधन के डिप्टी सीएम उम्मीदवार: सामाजिक समीकरण साधने का ‘मास्टरस्ट्रोक’ या ‘आख़िरी वक़्त का दबाव’?

पटना, 23 अक्टूबर 2025: बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेतृत्व वाले महागठबंधन (ग्रैंड अलायंस) ने मुख्यमंत्री पद के लिए तेजस्वी यादव के नाम की घोषणा के साथ ही, विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख मुकेश सहनी को उप-मुख्यमंत्री (Deputy CM) पद का उम्मीदवार घोषित कर एक बड़ा राजनीतिक दांव चला है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पटना में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह ऐलान किया। इस घोषणा ने न केवल महागठबंधन के भीतर के आंतरिक मतभेदों को खत्म किया, बल्कि बिहार के चुनावी समीकरणों को भी एक नया आयाम दे दिया है।

डिप्टी सीएम पद की घोषणा: पर्दे के पीछे का नाटकीय घटनाक्रम

मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम का चेहरा बनाने के पीछे का घटनाक्रम काफी नाटकीय रहा। सूत्रों के मुताबिक, घोषणा से ठीक पहले सहनी ने अपनी मांग पर अड़ गए थे, जिसने गठबंधन के नेताओं के लिए सिरदर्द पैदा कर दिया।

सामाजिक इंजीनियरिंग: अति पिछड़ा वर्ग को साधने की रणनीति

मुकेश सहनी को उप-मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना महागठबंधन की एक गहरी सामाजिक इंजीनियरिंग का हिस्सा माना जा रहा है।

मुकेश सहनी: ‘सेट डिज़ाइनर से राजनेता’ का सफर

मुकेश सहनी का राजनीतिक सफर फिल्मी कहानी जैसा है।

मुकेश सहनी की प्रतिक्रिया और बीजेपी पर हमला

डिप्टी सीएम उम्मीदवार घोषित होने के बाद, मुकेश सहनी भाजपा पर पूरी तरह हमलावर हो गए।

राजनीतिक विश्लेषण और प्रभाव

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी यादव के बाद मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम का चेहरा बनाना एक साहसिक कदम है, जिसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं:

कुल मिलाकर, महागठबंधन का यह फैसला सत्ता की लड़ाई से परे, बिहार की जटिल जाति और सामाजिक राजनीति में संतुलन बनाने का एक प्रयास है। मुकेश सहनी, जिसके पास शून्य विधायक हैं, को इतना बड़ा पद देना आरजेडी और कांग्रेस की राजनीतिक मजबूरी और ईबीसी वोटों की महत्ता को दर्शाता है।

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