बिहार के मोकामा विधानसभा क्षेत्र में हुई दुलारचंद यादव हत्या कांड ने पूरे प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक प्रणाली में भूचाल ला दिया है। इस मामले की जांच अब बिहार पुलिस के विशेष जांच विभाग, यानी सीआईडी के हाथों में है और उन्होंने इस गहन जांच के लिए विशेष टीम गठित कर दी है। इस कांड में अभी तक 80 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और सुरक्षा-व्यवस्था में भी कड़ा इंतजाम किया गया है, ताकि चुनावी माहौल स्थिर रखा जा सके।
पूरी जांच सीआईडी की निगरानी में
बिहार पुलिस अपराध जांच विभाग (CID) के डीआईजी जयंत कांत के निर्देशन में इस केस की गहन जांच जारी है। उन्होंने सीधे तौर पर घटनास्थल का दौरा किया और जांच के सभी पहलुओं की समीक्षा की। वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए फोरेंसिक टीम को बुलाया गया, जिसने पूरे इलाके का निरीक्षण किया। घटनास्थल पर पटना ग्रामीण इलाके के टाल क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जिनमें क्षतिग्रस्त वाहन और दुर्घटना के निशान शामिल हैं।
विशेष रूप से मोकामा के टाल इलाके में मिले ‘बाहरी पत्थर’ की भी जांच की जा रही है जो कि वहां प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाते। ये पत्थर रेलवे ट्रैक पर आमतौर पर इस्तेमाल होते हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि हत्या की साजिश पूर्व नियोजित हो सकती है। CID की टीम ने इन पत्थरों के नमूने लैब में जांच के लिए भेजे हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का खुलासा
प्रारंभिक दावों के विपरीत जो यह कह रहे थे कि दुलारचंद यादव की मौत गोली लगने से हुई, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने एक गंभीर तथ्य उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार उन्हें पैर में गोली लगी थी, लेकिन उनकी मौत का कारण नहीं बनी। असल में उनकी छाती पर किसी वाहन के चढ़ने से उन्हें गंभीर चोटें आई थीं, जिससे कई हड्डियां टूट गईं और फेफड़े क्षतिग्रस्त हो गए। तीन डॉक्टरों की टीम ने दो घंटे तक उनके शव का पोस्टमार्टम किया।
गिरफ्तारी का सिलसिला
इस मामले में अब तक 80 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें जदयू के पूर्व विधायक और मोकामा के प्रमुख नेता अनंत सिंह भी शामिल हैं। अनंत सिंह को पूछताछ के बाद अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया गया।
इसके अलावा जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी समेत कई अन्य लोगों को भी गहन पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। पुलिस लगातार घटना के वक्त मौके पर मौजूद लोगों की पहचान कर रही है और सभी संदिग्धों को जल्द गिरफ्तार करने की तैयारी में है।
चुनाव आयोग और प्रशासन की कड़ी कार्रवाई
मामले के गंभीरता और चुनावी माहौल को देखते हुए चुनाव आयोग ने भी तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने पटना ग्रामीण एसपी विक्रम सिहाग को हटाकर बदलाव किया और अन्य कई अधिकारियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई के निर्देश जारी किए। इसके साथ ही सुरक्षा के लिहाज से इलाके में भारी संख्या में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल की तैनाती की गई है।
पटना नगर निगम में तैनात आईएएस अफसर आशीष कुमार को बाढ़ एसडीओ का पद दिया गया है ताकि प्रशासनिक स्तर पर बेहतर नियंत्रण हो सके। इस प्रकार प्रशासन ने चुनाव के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ा रुख अपनाया है।
घटना का चुनावी और सामाजिक प्रभाव
दुलारचंद यादव की हत्या के बाद मोकामा में सामाजिक तनाव और राजनीतिक उठापटक तेज हो गई है। घटना के वक्त जनसुराज पार्टी के समर्थकों और जदयू के गुट के बीच हुई हिंसा ने इलाके का माहौल और बिगाड़ दिया है। इसके बाद से क्षेत्र में चुनावी हिंसा और गड़बड़ी की आशंका ने स्थानीय जनता को असुरक्षित किया है।
इस मामले ने बिहार के चुनावी परिदृश्य को भी प्रभावित किया है। पूरा देश इस घटना की जांच की निगरानी कर रहा है, क्योंकि यह हिंसा चुनाव प्रक्रिया की शांति और निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करती है। विपक्षी दलों ने इस घटना को भाजपा-जदयू गठबंधन की असफलता और क्षेत्रीय राजनीतिक अस्थिरता के रूप में प्रस्तुत किया है।
निष्कर्ष
मोकामा हत्याकांड में सीआईडी की गहन जांच, बड़ी संख्या में गिरफ्तारी और प्रशासन द्वारा कड़ी सुरक्षा के इंतजाम से यह स्पष्ट हो गया है कि बिहार सरकार इस मामले को लेकर पूरी गंभीरता से काम कर रही है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच ने इस मामले की जटिलता को उजागर किया है, जो साजिश की आशंका को मजबूत करता है।
आगे की जांच यह बताएगी कि दुलारचंद यादव की हत्या क्या किसी राजनीतिक साजिश का हिस्सा थी या फिर यह पूरा मामला किसी व्यक्तिगत विवाद या रोड रेज की परिणति थी। इस बीच, सुरक्षा प्रशासन और पुलिस पूरी सतर्कता से चुनावी हिंसा को रोकने और संतुलित माहौल बनाये रखने में जुटी हुई है।
इस घटना से बिहार की राजनीति में कानून व्यवस्था की मजबूती और चुनावी निष्पक्षता के महत्व को फिर से रेखांकित किया गया है। आगामी दिनों में इस जांच और कोर्ट की कार्यवाही पर सभी की नजरें बनी रहेंगी, क्योंकि इससे राज्य की सामाजिक एवं राजनीतिक स्थिरता सीधे प्रभावित होगी।
