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मोतिहारी विधानसभा का रण: क्या BJP का ‘सुरक्षित किला’ ढहा पाएगा महागठबंधन? प्रमोद कुमार की हैट्रिक को चुनौती!

पूर्वी चंपारण जिले की मोतिहारी विधानसभा सीट (Motihari Assembly Seat) बीजेपी के लिए एक गढ़ मानी जाती है। यह सीट NDA (BJP) के उम्मीदवार और पूर्व मंत्री प्रमोद कुमार के प्रभुत्व के लिए जानी जाती है, जिन्हें महागठबंधन (RJD) हर बार कड़ी टक्कर देता है।

प्रमुख संभावित उम्मीदवार (2025 के विश्लेषण के आधार पर):


प्रमोद कुमार (BJP) की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण

अनुकूल तथ्य/विश्लेषण विवरण
व्यक्तिगत और पार्टी का प्रभुत्व प्रमोद कुमार इस सीट से तीन बार (2010, 2015, 2020) लगातार जीत चुके हैं। यह उनकी मजबूत व्यक्तिगत पकड़ और इस सीट पर बीजेपी के ‘सुरक्षित किला’ होने की पुष्टि करता है।
जातीय समीकरण का झुकाव मोतिहारी सीट पर सवर्ण (भूमिहार/ब्राह्मण) और वैश्य (Baniya) मतदाताओं की बहुलता है, जो परंपरागत रूप से बीजेपी का कोर वोट बैंक रहा है। यह जातिगत गणित बीजेपी के पक्ष में मजबूत है।
जीत का अंतर 2020 के चुनाव में उन्होंने RJD के ओम प्रकाश चौधरी को 14,645 वोटों (लगभग $8.00\%$ अंतर) के एक बड़े और निर्णायक अंतर से हराया था। यह जीत का अंतर विपक्ष के लिए एक बड़ी बाधा है।
शहरी और गांधीवादी विरासत मोतिहारी एक महत्वपूर्ण शहरी केंद्र और महात्मा गांधी के प्रथम सत्याग्रह की भूमि है। शहरी मतदाता अक्सर सुशासन, विकास और राष्ट्रीय मुद्दों पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं, जो NDA के पक्ष में जाता है।

महागठबंधन (RJD) के लिए संभावित प्रतिकूल तथ्य और आँकड़े

प्रतिकूल तथ्य/आँकड़े विवरण
लगातार हार का इतिहास RJD या उसके गठबंधन के उम्मीदवार पिछले तीन चुनावों (2010 से) में लगातार इस सीट को जीतने में विफल रहे हैं। यह सीट जीतने के लिए मजबूत एंटी-इनकम्बेंसी (सत्ता-विरोधी लहर) की जरूरत है, जो अभी तक निर्णायक नहीं हो पाई है।
M-Y समीकरण का सीमित प्रभाव मोतिहारी में मुस्लिम (लगभग $13.30\%$) और अनुसूचित जाति (लगभग $13.48\%$) की जनसंख्या लगभग समान है। RJD अपने कोर M-Y समीकरण के बावजूद, वैश्य और सवर्ण वोटों की निर्णायक संख्या को पार नहीं कर पा रही है।
नए उम्मीदवार की चुनौती महागठबंधन ने 2025 के लिए देवा गुप्ता को मैदान में उतारा है (या प्रस्तावित किया है), जिनकी पत्नी नगर निगम की मेयर हैं। हालांकि यह स्थानीय प्रभाव का संकेत है, लेकिन प्रमोद कुमार के लंबे राजनीतिक अनुभव और विधानसभा में स्थापित पकड़ को तोड़ना एक बड़ी चुनौती होगी।
जन सुराज की उपस्थिति जन सुराज पार्टी ने भी यहाँ से उम्मीदवार (डॉ. अतुल कुमार) उतारा है, जो बीजेपी से जुड़े रहे हैं। यदि वह सवर्ण या गैर-RJD वोटों में सेंध लगाते हैं, तो इसका सीधा लाभ RJD के बजाय बीजेपी को मिल सकता है, क्योंकि यह विपक्ष के वोटों को विभाजित कर देगा।

निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):

मोतिहारी सीट पर NDA (BJP) के प्रमोद कुमार को सबसे मजबूत दावेदार माना जा सकता है।

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