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मोरवा विधानसभा: निषाद बनाम साहू की जंग में “MY” समीकरण का चक्रव्यूह!

परिणाम का पूर्वानुमान (विश्लेषणात्मक संभावना)

समस्तीपुर जिले की मोरवा विधानसभा सीट (निर्वाचन क्षेत्र संख्या-135) एक अत्यंत जातीय और कांटे की टक्कर वाली सीट है। 2020 में यह सीट महागठबंधन (RJD) ने जीती थी, लेकिन जीत का अंतर बहुत कम था।1 इस बार भी रणविजय साहू (RJD) के नेतृत्व वाला महागठबंधन मजबूत स्थिति में है, लेकिन NDA कड़ी चुनौती पेश कर रहा है।

रणविजय साहू की जीत की मुख्य कुंजी RJD का पारंपरिक MY (मुस्लिम-यादव) वोटबैंक और सहनी/निषाद समाज के वोटों का संभावित विभाजन होगा।


प्रमुख दावेदार और जीत के लिए मुख्य विश्लेषण

उम्मीदवार/पार्टी वर्तमान स्थिति 2020 चुनाव परिणाम मुख्य राजनीतिक आधार
रणविजय साहू (RJD) वर्तमान विधायक 59,554 वोट (जीत) यादव और मुस्लिम (MY)
विद्यासागर सिंह निषाद (NDA – JD(U)/BJP) पूर्व विधायक 48,883 वोट (हार) सहनी/निषाद, सवर्ण, अति पिछड़ा वर्ग

1. रणविजय साहू (RJD) की जीत के पक्ष में विश्लेषण (महागठबंधन की मजबूती)

रणविजय साहू की संभावित जीत के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

2. NDA उम्मीदवार की हार के लिए मुख्य चुनौतियाँ (असंतोष और गणित का खेल)

NDA उम्मीदवार, विद्यासागर सिंह निषाद के लिए जीत हासिल करने में ये कारक बाधा उत्पन्न कर सकते हैं:


निष्कर्ष

मोरवा विधानसभा सीट का चुनावी परिणाम निषाद (सहनी) समुदाय के वोटों के विभाजन पर निर्भर करता है। यदि NDA गठबंधन किसी तरह सहनी वोटों को एकजुट कर लेता है, तो मुकाबला बेहद करीबी और पलटवार वाला हो सकता है। हालाँकि, RJD का अटूट मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण और NDA विरोधी सहनी वोटों का विभाजन इस बार भी रणविजय साहू (RJD) के पक्ष में परिणामों को झुका सकता है।

संक्षेप में: MY समीकरण का कोर + NDA विरोधी निषाद वोटों का बिखराव = RJD की जीत की प्रबल संभावना।

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