परिणाम का पूर्वानुमान (विश्लेषणात्मक संभावना)
समस्तीपुर जिले की मोहिउद्दीनगर विधानसभा सीट (निर्वाचन क्षेत्र संख्या-137) को राजनीतिक रूप से अस्थिर और अप्रत्याशित माना जाता है, जहाँ मतदाता किसी एक पार्टी के प्रति विशेष निष्ठा नहीं रखते। यहाँ हर चुनाव में कड़ी टक्कर देखने को मिलती है, लेकिन 2020 में BJP के राजेश कुमार सिंह ने बड़ी जीत हासिल कर समीकरण बदल दिए थे।
- संभावित विजेता (जातीय समीकरण, 2020 की जीत के अंतर और राष्ट्रीय/राज्य रुझान के आधार पर): एनडीए के उम्मीदवार (BJP के राजेश कुमार सिंह)।
राजेश कुमार सिंह को वर्तमान राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय गठबंधन की लहर और गैर-यादव ओबीसी/सवर्ण वोटों के ध्रुवीकरण का लाभ मिलता दिखाई दे रहा है।
प्रमुख दावेदार और जीत/हार का निर्णायक विश्लेषण
राजेश कुमार सिंह की संभावित जीत के मुख्य कारण और अनुकूल तथ्य निम्नलिखित हैं:
- 2020 का बड़ा विजय मार्जिन:
- 2020 के चुनाव में राजेश कुमार सिंह ने RJD की एज्या यादव को 15,114 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। यह अंतर दर्शाता है कि भाजपा ने RJD के मजबूत MY समीकरण में सफलतापूर्वक सेंध लगाई और एक मजबूत गैर-MY वोट बैंक (सवर्ण, EBC, गैर-यादव OBC) को एकजुट किया।
- यादव वोटों का विभाजन (संभावित):
- यह सीट यादव बहुल (30% से अधिक) है, जो RJD का मुख्य आधार है। लेकिन राजेश कुमार सिंह की पिछली जीत बताती है कि यादवों के एक हिस्से, विशेषकर आर्थिक रूप से मजबूत वर्ग या स्थानीय समीकरण से प्रभावित यादवों ने भी NDA को वोट दिया। 2015 में जब राजेश कुमार सिंह निर्दलीय लड़े थे, तब भी उन्होंने 23,706 वोट हासिल किए थे, जो उनकी व्यक्तिगत पैठ को दर्शाता है।
- राष्ट्रीय रुझान और मोदी/NDA का प्रभाव:
- 2024 के लोकसभा चुनाव में Ujiarpur लोकसभा क्षेत्र में BJP को मोहिउद्दीनगर विधानसभा खंड से अच्छा समर्थन मिला था। केंद्र की लोकप्रियता और ‘विकास’ बनाम ‘जंगलराज’ का नैरेटिव यहाँ के सवर्ण और EBC/OBC मतदाताओं को NDA के पक्ष में मजबूती से ध्रुवीकृत कर सकता है।
- क्षेत्र की अप्रत्याशित राजनीति का फायदा:
- मोहिउद्दीनगर के मतदाता किसी एक दल के प्रति निष्ठा नहीं रखते। यह अस्थिरता मौजूदा विधायक के पक्ष में जा सकती है, यदि वह अपने कार्यकाल में संतुष्टि पैदा कर पाए हों और NDA के सभी घटकों (JDU, LJP) का वोट एक साथ मिल जाए।
2. एज्या यादव (RJD) की हार के लिए मुख्य चुनौतियाँ (MY समीकरण का कमज़ोर पड़ना)
RJD उम्मीदवार एज्या यादव के लिए जीत हासिल करने में ये कारक बाधा उत्पन्न कर सकते हैं:
- कमजोर प्रदर्शन के बाद वापसी की चुनौती:
- एज्या यादव ने 2015 में इस सीट पर जीत हासिल की थी, लेकिन 2020 में वह बड़े अंतर से हार गईं। 2020 के चुनाव में RJD के वोट प्रतिशत में गिरावट (37.31%) आई थी, जबकि BJP का वोट प्रतिशत (47.51%) बहुत मजबूती से बढ़ा था। इस बड़े अंतर को पाटना एक गंभीर चुनौती है।
- गैर-MY वोटों का एकतरफा ध्रुवीकरण:
- इस सीट पर यादव और मुस्लिम (MY) वोटों का बाहुल्य है, लेकिन सवर्ण (ठाकुर) और गैर-यादव ओबीसी (कुशवाहा, निषाद) मतदाता भी बड़ी संख्या में हैं। BJP की जीत यह सिद्ध करती है कि गैर-MY वोट पूरी तरह से BJP के पक्ष में एकजुट हुए। RJD के लिए यह ‘अजेय’ गठबंधन सबसे बड़ी चुनौती है।
- स्थानीय बनाम बाहरी/दलीय छवि:
- मोहिउद्दीनगर में ‘दल-बदलुओं’ को स्वीकार करने का इतिहास रहा है, लेकिन अंततः यहाँ व्यक्तिगत छवि और स्थानीय पैठ भी मायने रखती है। एज्या यादव को अपने यादव-मुस्लिम कोर वोट बैंक को 100% बूथ तक लाने के साथ-साथ अन्य जातियों का समर्थन भी हासिल करना होगा, जिसके लिए उन्हें विधायक राजेश कुमार सिंह की स्थानीय लोकप्रियता को तोड़ना होगा।
निष्कर्ष
मोहिउद्दीनगर सीट पर BJP के राजेश कुमार सिंह का पलड़ा भारी दिख रहा है। 2020 की बड़ी जीत और मजबूत गैर-यादव जातीय गोलबंदी उन्हें लगातार दूसरी बार यह सीट जिता सकती है। RJD की जीत की कुंजी पूरी तरह से यादव और मुस्लिम वोटों के 100% ध्रुवीकरण और तेजस्वी यादव की लोकप्रियता से कुछ गैर-यादव और EBC वोटों में सेंधमारी करने पर निर्भर करेगी, लेकिन 15 हज़ार से अधिक वोटों का अंतर पाटना बहुत मुश्किल होगा। यह सीट NDA के पक्ष में जाने की प्रबल संभावना है।
