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रक्सौल का चुनावी किला: मोदी फैक्टर और बॉर्डर व्यापार का गणित, क्या महागठबंधन लगा पाएगा सेंध?

परिणाम की भविष्यवाणी:

रक्सौल विधानसभा सीट (पूर्वी चंपारण) पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार और वर्तमान विधायक भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रमोद कुमार सिन्हा की जीत की प्रबल संभावना है।

उनकी जीत का अंतर पिछली बार (36,923 वोट) की तरह बड़ा न हो, लेकिन एनडीए के मजबूत गढ़ और राष्ट्रीय मुद्दों के प्रभाव के कारण यह सीट बीजेपी के खाते में बरकरार रहने की उम्मीद है।

उनका मुख्य मुकाबला महागठबंधन के उम्मीदवार, कांग्रेस के श्यामा बिहारी प्रसाद (या रामबाबू प्रसाद यादव, यदि वे उम्मीदवार हैं) से होगा, जिन्हें  2020 में भारी अंतर से हार का सामना करना पड़ा था।


I. बीजेपी के प्रमोद कुमार सिन्हा की जीत के पक्ष में विश्लेषण (अनुकूल तथ्य)

प्रमोद कुमार सिन्हा (बीजेपी) की जीत की संभावना को मजबूती देने वाले प्रमुख विश्लेषणात्मक कारक निम्नलिखित हैं:

1. बीजेपी का पारंपरिक और अभेद्य किला

2. ‘मोदी फैक्टर’ और राष्ट्रीय मुद्दे

3. मजबूत सामाजिक-आर्थिक आधार


 

II. महागठबंधन/कांग्रेस की हार के विपक्ष में विश्लेषण (प्रतिकूल तथ्य)

महागठबंधन उम्मीदवार (कांग्रेस के श्यामा बिहारी प्रसाद/रामबाबू प्रसाद यादव) की जीत की संभावनाओं को कम करने वाले मुख्य कारक इस प्रकार हैं:

1. 2020 में निराशाजनक प्रदर्शन

2. एम-वाई (मुस्लिम-यादव) वोटों के एकीकरण में चुनौती

3. स्थानीय बनाम राष्ट्रीय पहचान

निष्कर्ष: रक्सौल विधानसभा सीट स्पष्ट रूप से बीजेपी का पारंपरिक गढ़ है, जहाँ पिछले दो चुनावों में बीजेपी ने एक बार कड़ी टक्कर में और दूसरी बार एकतरफा मुकाबले में जीत हासिल की है। मोदी लहर का प्रभाव, मजबूत व्यापारी वर्ग का समर्थन और गठबंधन उम्मीदवार के खिलाफ $2020$ की बड़ी हार का अंतर, ये सभी कारक बीजेपी के प्रमोद कुमार सिन्हा के पक्ष में हैं। महागठबंधन को यह सीट जीतने के लिए जातीय समीकरणों को $100\%$ एकजुट करने के साथ-साथ बीजेपी के कोर वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी करनी होगी, जो अत्यंत मुश्किल प्रतीत होता है।

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