राजनगर विधानसभा (सीट संख्या 37) मधुबनी जिले की अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित एक महत्वपूर्ण सीट है।1 यह सीट पारंपरिक रूप से NDA (BJP) का गढ़ रही है और 2020 में NDA ने बड़े अंतर से यहां जीत हासिल की थी।2
प्रमुख दावेदार और पिछला परिणाम (2020):
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट | जीत का अंतर |
| डॉ. रामप्रीत पासवान (विजेता) | BJP (NDA) | 89,459 | 19,121 वोट |
| रामावतार पासवान | RJD (महागठबंधन) | 70,338 | – |
(टिप्पणी: डॉ. रामप्रीत पासवान ने 2015 में भी यह सीट जीती थी और 2020 में अपनी जीत का अंतर बढ़ाया, जो उनकी क्षेत्र में मज़बूत पकड़ को दर्शाता है।)3
डॉ. रामप्रीत पासवान / NDA (BJP) की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण
| अनुकूल तथ्य/विश्लेषण | विवरण |
| बड़ा और बढ़ता हुआ जीत का अंतर | 2020 में जीत का अंतर 19,121 वोट (11.30%) था, जो एक सुरक्षित मार्जिन माना जाता है। यह दर्शाता है कि NDA के वोट आधार में मज़बूत एकजुटता है। |
| स्थायी दलित/पासवान वोट बैंक | NDA उम्मीदवार डॉ. रामप्रीत पासवान पासवान समुदाय से आते हैं। उन्हें न केवल पासवान समुदाय का बड़ा समर्थन प्राप्त है, बल्कि अन्य अनुसूचित जाति (रविदास) और अति-पिछड़े वर्गों का भी एक बड़ा हिस्सा NDA के साथ जुड़ा रहता है। |
| सवर्ण और गैर-यादव OBC का समर्थन | राजनगर में मैथिल ब्राह्मण (लगभग 12.40%) और गैर-यादव OBC (जैसे कुर्मी और कोइरी) की संख्या अधिक है। ये जातियाँ पारंपरिक रूप से BJP की कोर समर्थक हैं, जो NDA को एक मज़बूत ऊपरी आधार प्रदान करती हैं। |
| लोकसभा चुनाव में निरंतर बढ़त | पिछले तीन लोकसभा चुनावों में, BJP या उसके सहयोगी JDU ने राजनगर विधानसभा क्षेत्र में लगातार बढ़त बनाए रखी है। यह प्रवृत्ति 2025 में भी NDA के पक्ष में माहौल बनाएगी। |
| विधायक की पकड़ और धार्मिक फैक्टर | विधायक रामप्रीत पासवान की क्षेत्र में अच्छी पहचान है। साथ ही, स्थानीय लोग इस तथ्य को मिथिला की धार्मिक परंपरा से जोड़ते हैं कि अधिकतर विधायकों के नाम ‘राम’ से शुरू हुए हैं, जो NDA के लिए भावनात्मक लाभ दे सकता है। |
रामावतार पासवान / महागठबंधन (RJD) की हार के संभावित प्रतिकूल तथ्य और विश्लेषण
| प्रतिकूल तथ्य/विश्लेषण (RJD की हार के संभावित कारण) | विवरण |
| RJD के MY समीकरण का दलित सीट पर सीमित प्रभाव | RJD का कोर M-Y (मुस्लिम-यादव) समीकरण (मुस्लिम लगभग 14%) इस सीट पर मजबूत है, लेकिन यह दलित आरक्षित सीट होने के कारण, कुल वोटों पर M-Y का निर्णायक प्रभाव कम हो जाता है। RJD को जीत के लिए दलित वोटों में बड़ी सेंध लगानी होगी। |
| सत्ता विरोधी लहर को भुनाने में असफलता | भले ही स्थानीय लोग सड़क (राजनगर-रामपट्टी) और बिजली-पानी को लेकर असंतोष व्यक्त करते हैं, लेकिन 2020 में RJD यह एंटी-इनकम्बेंसी 19,000 वोटों में बदल नहीं पाई। यदि इस बार भी महागठबंधन कोई मज़बूत स्थानीय चेहरा नहीं देता है, तो व्यक्तिगत असंतोष ‘मोदी फैक्टर’ के सामने फीका पड़ सकता है। |
| मौन/कम मतदान वाले मतदाताओं को साधने में कमी | राजनगर में मतदान प्रतिशत (लगभग 52%) कम रहा है। जो मतदाता मतदान से दूर रहते हैं (मौन मतदाता वर्ग), उन्हें बूथ तक लाने के लिए RJD को एक अभूतपूर्व और मज़बूत ज़मीनी रणनीति बनानी होगी, जिसमें वह लगातार विफल रही है। |
| तेजस्वी के वादों का दलित वोट पर सीमित असर | तेजस्वी यादव की ‘नौकरी’ और अन्य वादे युवा यादव और मुस्लिम वोटरों को आकर्षित कर सकते हैं, लेकिन पासवान और रविदास समुदाय, जिन्हें केंद्र की योजनाओं (राशन, आवास) और भाजपा के दलित नेतृत्व पर अधिक भरोसा है, को तोड़ना RJD के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। |
निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):
राजनगर (SC) विधानसभा सीट पर NDA (BJP) की स्थिति स्पष्ट रूप से मज़बूत बनी हुई है। विधायक डॉ. रामप्रीत पासवान की लगातार जीत और बढ़ता अंतर NDA के मज़बूत सवर्ण+दलित+अति-पिछड़ा समीकरण की पुष्टि करता है।
2025 के चुनाव में, यदि NDA डॉ. रामप्रीत पासवान को फिर से टिकट देता है, तो उनकी व्यक्तिगत और पार्टी की लोकप्रियता, कोर वोट बैंक की एकजुटता और लोकसभा चुनाव के लगातार रुझान के कारण उनकी जीत की प्रबल संभावना है। महागठबंधन को यह सीट जीतने के लिए एक विभाजनकारी दलित उपजाति उम्मीदवार और M-Y के साथ एक बड़ा अति-पिछड़ा/दलित गठजोड़ बनाना होगा, जिसकी संभावना कम दिखती है।
संभावित विजेता: डॉ. रामप्रीत पासवान (BJP – NDA)।
