राजापाकर (सुरक्षित-SC) विधानसभा सीट (संख्या 127) वैशाली जिले की एक महत्वपूर्ण सीट है, जिसे 2020 के चुनाव में कांग्रेस की प्रतिमा कुमारी ने मात्र 1,796 वोटों (1.20% अंतर) से जीतकर महागठबंधन की झोली में डाला था। यह सीट बेहद कम अंतर से जीतने वाली सीटों में से एक थी, जो 2025 में एक कांटे की टक्कर का संकेत देती है।

संभावित विजेता: एनडीए उम्मीदवार (जदयू या लोजपा (रा.वि.)

(यह भविष्यवाणी महागठबंधन में ‘फ्रेंडली फाइट’ के कारण होने वाले वोट-विभाजन और 2024 लोकसभा चुनाव में NDA की बड़ी बढ़त के आधार पर की गई है।)

जीत के मुख्य कारण और विश्लेषण (फेवर में जाने वाले तथ्य)

तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
महागठबंधन में ‘फ्रेंडली फाइट’ यह सबसे महत्वपूर्ण कारक है। 2025 चुनाव में, महागठबंधन के घटक दल कांग्रेस (वर्तमान विधायक प्रतिमा कुमारी के साथ) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) यहाँ से एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं। इससे महागठबंधन का वोट बैंक, विशेषकर दलित और मुस्लिम वोट, आपस में बंट जाएगा।
2024 लोकसभा चुनाव का रुझान राजापाकर, हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में, NDA उम्मीदवार (चिराग पासवान की पार्टी) ने इस विधानसभा क्षेत्र में लगभग 27,604 वोटों की बड़ी बढ़त हासिल की थी। यह स्पष्ट रूप से NDA के पक्ष में एक मजबूत लहर और जातीय गोलबंदी को दर्शाता है, जिसे बरकरार रखना उनकी जीत सुनिश्चित करेगा।
दलित वोट बैंक का विभाजन यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है, जहाँ पासवान और रविदास जातियां निर्णायक भूमिका निभाती हैं (कुल आबादी का लगभग 22.41%)। लोजपा (रामविलास) के कारण पासवान वोट NDA के पक्ष में मजबूती से एकजुट होने की संभावना है, जबकि रविदास वोट NDA और महागठबंधन के बीच बँटेगा।
NDA की संगठनात्मक मजबूती NDA (भाजपा और जदयू) के मजबूत संगठनात्मक आधार और केन्द्र एवं राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ, खासकर महिलाओं और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) में, NDA उम्मीदवार को बढ़त दिलाएगा।

अन्य उम्मीदवार के न जीतने के प्रतिकूल तथ्य

1. प्रतिमा कुमारी (कांग्रेस/महागठबंधन उम्मीदवार) के लिए प्रतिकूल तथ्य

प्रतिकूल तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
गठबंधन के भीतर ‘दोस्ताना’ चुनौती सबसे बड़ी चुनौती CPI के उम्मीदवार की उपस्थिति है। महागठबंधन के वोटों का यह सीधा विभाजन (Direct Split) वर्तमान विधायक की हार का सबसे बड़ा कारण बन सकता है। 2020 में जीत का अंतर केवल 1,796 वोट था, इसलिए यह विभाजन निर्णायक होगा।
कम मतदान का इतिहास राजापाकर विधानसभा क्षेत्र में औसतन केवल 55-57% ही मतदान होता रहा है (2020 में 57.3%)। मौजूदा विधायक के लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि वह अपने समर्थक 45% गैर-मतदाताओं को मतदान केंद्र तक कैसे लाएं। यदि मतदान प्रतिशत कम रहता है, तो संगठित NDA वोट भारी पड़ सकता है।
एंटी-इनकम्बेंसी बहुत कम मार्जिन से जीतने के बावजूद, विधायक के खिलाफ स्थानीय एंटी-इनकम्बेंसी (सत्ता विरोधी लहर) का थोड़ा सा भी असर उनकी हार का कारण बन सकता है, खासकर खराब सड़कों और जल-जमाव जैसे स्थानीय मुद्दों के कारण।
राजपूत वोटों का संभावित रुझान इस सुरक्षित सीट पर राजपूत (सवर्ण) मतदाताओं की भी अच्छी संख्या है, जिनका झुकाव पारम्परिक रूप से NDA की ओर रहा है। यह वोट महागठबंधन के लिए बड़ा घाटा है।

2. CPI उम्मीदवार (महागठबंधन का हिस्सा) के लिए प्रतिकूल तथ्य

प्रतिकूल तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
कांग्रेस के कोर वोट बैंक से सीधा टकराव CPI, कांग्रेस के दलित, मुस्लिम और वामपंथी झुकाव वाले वोटों में सेंध लगाएगी, लेकिन यह सीट कांग्रेस कोटे की रही है। महागठबंधन के नेताओं द्वारा अंतिम समय में कांग्रेस के पक्ष में अपील करने पर CPI का वोट कट सकता है।
कोर RJD वोट पर निर्भरता में कमी CPI के पास RJD के पारंपरिक M-Y बेस का पूरा समर्थन नहीं होगा, जबकि कांग्रेस के पास तेजस्वी यादव के चेहरे का समर्थन है। CPI को केवल अपने वामपंथी आधार पर निर्भर रहना होगा, जो इस सीट पर जीत के लिए अपर्याप्त है।

अंतिम निष्कर्ष:

राजापाकर विधानसभा सीट पर 2025 का चुनाव महागठबंधन की अंदरूनी कलह और NDA की मजबूत जातीय गोलबंदी के कारण NDA के पक्ष में जाने की संभावना है। यदि महागठबंधन अपनी ‘फ्रेंडली फाइट’ को अंतिम क्षण तक नियंत्रित नहीं कर पाया, तो NDA को 2024 लोकसभा चुनाव की बढ़त दोहराने में आसानी होगी, जिससे कांग्रेस की प्रतिमा कुमारी की सीट बचाना लगभग असंभव हो जाएगा। एनडीए उम्मीदवार (जदयू या लोजपा-रा.वि.) की जीत की संभावना अधिक है।

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