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रानीगंज का चुनावी रण: JDU का हैट्रिक दांव या RJD की वापसी? ‘दलित-अतिपिछड़ा’ वोट ही तय करेगा अररिया का किंगमेकर!

महागठबंधन की ओर से पिछली बार के उपविजेता अविनाश मंगलम (RJD) प्रमुख उम्मीदवार हो सकते हैं।5 2025 में उनकी हार के संभावित कारण (या JDU की जीत के कारण):

प्रतिकूल तथ्य/विश्लेषण (RJD की हार के संभावित कारण) विवरण
मुस्लिम-यादव वोटों का अपर्याप्त होना रानीगंज में मुस्लिम (करीब 1 लाख) और यादव (करीब 40 हज़ार) मतदाता हैं। महागठबंधन को यह सीट जीतने के लिए इस कोर M-Y वोट के साथ-साथ दलितों (80 हज़ार से अधिक) के एक बड़े हिस्से को भी आकर्षित करना होगा। 2020 में M-Y वोट पर्याप्त नहीं रहा।
NOTA का प्रभाव 2020 में 5,577 वोट NOTA (इनमें से अधिकांश असंतुष्ट महादलित/दलित हो सकते हैं) को मिले थे। यह संख्या जीत के अंतर (2,304) से दोगुनी से अधिक थी। यह स्पष्ट करता है कि महागठबंधन दलित वोटरों को पूरी तरह से अपनी ओर नहीं खींच पाया, जो RJD की सबसे बड़ी विफलता थी।
स्थानीय मुद्दों को प्रभावी ढंग से न उठा पाना क्षेत्र में बाढ़, जलजमाव, खराब सड़कें और बड़े पैमाने पर पलायन जैसी गंभीर समस्याएं हैं। RJD को इन समस्याओं पर विधायक की कथित विफलता को जोर-शोर से उठाना होगा। यदि RJD केवल जातीय समीकरण पर ध्यान केंद्रित करती है और इन मुद्दों पर विधायक के प्रदर्शन को प्रभावी ढंग से नहीं घेर पाती है, तो हार हो सकती है।
उम्मीदवार की लगातार हार अविनाश मंगलम ने 2020 में अचमित ऋषिदेव से मामूली अंतर से हार झेली। लगातार करीबी हार से वोटर में जीतने की क्षमता को लेकर संशय पैदा हो सकता है, जिससे कुछ महादलित वोटर आखिरी समय में जीताऊ कैंडिडेट की ओर जा सकते हैं।
NDA से दलित/महादलित वोट काटने की चुनौती यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, और पासवान समुदाय का इस पर दबदबा रहा है। JDU ने महादलित समुदाय में अपनी पैठ बनाई है, जिसे तोड़ना RJD के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):

रानीगंज विधानसभा सीट पर 2025 में भी JDU और RJD के बीच कांटे की टक्कर होने की संभावना है, और जीत का अंतर बहुत कम रह सकता है।

JDU (NDA) के अचमित ऋषिदेव को अपनी व्यक्तिगत छवि, नीतीश कुमार के अतिपिछड़ा/महिला वोट बैंक और NDA के संगठनात्मक समर्थन का लाभ मिलेगा। दूसरी ओर, RJD (महागठबंधन) को यह सीट जीतने के लिए मुस्लिम-यादव वोटों की शत-प्रतिशत गोलबंदी सुनिश्चित करने के साथ-साथ, दलित/महादलितों के एक बड़े वर्ग को अपनी ओर खींचना होगा। 2020 के नतीजे बताते हैं कि RJD इसमें विफल रही थी।

संभावित विजेता: अचमित ऋषिदेव (JDU – NDA)

(मामूली अंतर से जीत की प्रबल संभावना, क्योंकि NDA के पास दलित-अतिपिछड़ा वोटों को साधने का मजबूत आधार है, जिसे RJD पिछले चुनाव में तोड़ नहीं पाई थी।)

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