रीगा विधानसभा सीट सीतामढ़ी जिले की एक महत्वपूर्ण सीट है, जो अपने वैश्य (Bania/Trader) वोट बैंक, कृषि संबंधी मुद्दों और रीगा शुगर मिल के कारण चर्चा में रहती है। यह सीट पिछले दो चुनावों (2015 में कांग्रेस, 2020 में भाजपा) में उलटफेर कर चुकी है, जिससे यह एक कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है।1

प्रमुख दावेदार और वर्तमान स्थिति (2025 के विश्लेषण के आधार पर):

  • बैद्यनाथ प्रसाद (NDA/BJP): सीटिंग विधायक मोती लाल प्रसाद की जगह भाजपा ने बैद्यनाथ प्रसाद को उम्मीदवार बनाया है (हालिया रिपोर्ट के अनुसार)।
  • अमित कुमार टुन्ना (महागठबंधन/Congress): 2015 के विजेता और 2020 के उपविजेता, कांग्रेस के मजबूत उम्मीदवार।2
  • कृष्ण मोहन (जन सुराज): जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार, जो वोटों का विभाजन कर सकते हैं।

बैद्यनाथ प्रसाद/NDA (BJP) की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण

अनुकूल तथ्य/विश्लेषण विवरण
रीगा चीनी मिल का पुनर्चालन रीगा की अर्थव्यवस्था और किसानों के लिए बंद पड़ी रीगा चीनी मिल एक भावनात्मक मुद्दा था। विधायक मोती लाल प्रसाद (जिनका टिकट काटकर बैद्यनाथ प्रसाद को दिया गया है, पर क्षेत्र में प्रभाव बरकरार) के कार्यकाल में दिसंबर 2024 में मिल का चालू होना (नए मालिकों द्वारा) एक बड़ी उपलब्धि है। इससे 30-35 हजार किसानों को सीधा लाभ होने की संभावना है, जिसका श्रेय NDA को मिल सकता है।
मजबूत जातीय समीकरण रीगा सीट पर वैश्य (Bania), राजपूत और ब्राह्मण मतदाताओं की अहम भूमिका है। वैश्य समाज का वर्चस्व रहा है और यह परंपरागत रूप से BJP का कोर वोट बैंक माना जाता है। NDA इस मजबूत सामाजिक आधार के सहारे चुनाव जीतने की उम्मीद करेगी।
मोदी फैक्टर और राष्ट्रवाद यह सीट नेपाल सीमा के पास होने के कारण सीमावर्ती क्षेत्र का विकास और राष्ट्रवाद का मुद्दा प्रभावी रहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर मिलने वाले सवर्ण और अन्य पिछड़ा वर्ग के वोटों का बड़ा हिस्सा BJP को लाभ पहुंचाएगा।
जीत का विशाल मार्जिन (2020) 2020 में BJP ने कांग्रेस उम्मीदवार को 32,495 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। यह मार्जिन NDA की संगठनात्मक और चुनावी ताकत को दर्शाता है।

अमित कुमार टुन्ना/महागठबंधन (INC) के लिए जीत की राह और प्रतिकूल तथ्य

अनुकूल तथ्य/विश्लेषण विवरण
एंटी-इनकम्बेंसी और टिकट कटने का असर वर्तमान विधायक मोती लाल प्रसाद का टिकट कटने से उनके समर्थक निराश हो सकते हैं और यह वोट अमित कुमार टुन्ना को स्थानांतरित हो सकता है। सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) का सीधा फायदा महागठबंधन को मिलेगा।
स्थानीय मुद्दे और समस्याएं रीगा में बागमती नदी के कटाव से बचाव के स्थायी उपाय का अभाव, उच्च शिक्षा के लिए डिग्री कॉलेज न होना, और बिजली की अनियमित आपूर्ति जैसे मुद्दे अब भी बने हुए हैं। पूर्व विधायक अमित कुमार इन समस्याओं को जोर-शोर से उठाकर जनता का विश्वास जीत सकते हैं।
माइक्रो सोशल इंजीनियरिंग महागठबंधन (RJD+Congress) अपने परंपरागत M-Y (मुस्लिम-यादव) वोटों को एकजुट करने की कोशिश करेगा। इसके साथ ही, यदि वह कोइरी/EBC वोटों में सेंध लगा पाते हैं, तो उनका सामाजिक आधार मजबूत होगा। रीगा में मुस्लिम समुदाय निर्णायक भूमिका में रहता है, जिसका फायदा कांग्रेस को मिल सकता है।
ऐतिहासिक प्रदर्शन अमित कुमार टुन्ना 2015 में इस सीट से जीत चुके हैं और 2020 में उपविजेता रहे थे। उनकी व्यक्तिगत पहचान और स्थानीय जुड़ाव उन्हें मजबूत दावेदार बनाता है।

निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):

रीगा विधानसभा सीट पर जीत का फैसला गन्ना किसानों के बीच रीगा शुगर मिल के पुनर्चालन से मिली खुशी और स्थानीय विकास की कमी के बीच झूल रहा है।

  • NDA को अपने वैश्य/सवर्ण वोट बैंक + मिल चालू होने की उपलब्धि + मोदी फैक्टर का स्पष्ट लाभ मिलेगा, जो इसे मजबूत स्थिति में रखता है।
  • महागठबंधन की जीत इस बात पर निर्भर करेगी कि वह विधायक का टिकट कटने के कारण उपजी विरोध की भावना और स्थानीय समस्याओं को कितनी सफलता से भुनाती है, साथ ही M-Y वोट बैंक को पूरी तरह एकजुट रखती है।

वर्तमान राजनीतिक विश्लेषण के आधार पर, रीगा सीट पर NDA (BJP) उम्मीदवार को महागठबंधन के मुकाबले थोड़ी अधिक बढ़त मिलने की संभावना है, लेकिन यह एक कड़ी टक्कर होगी।

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