रुन्नीसैदपुर विधानसभा (सीट क्रम संख्या 29) सीतामढ़ी जिले की एक प्रमुख ग्रामीण-प्रधान सीट है।1 यह सीट मुख्य रूप से भूमिहार, यादव और मुस्लिम मतदाताओं के वर्चस्व और JDU तथा RJD के बीच सीधी टक्कर के लिए जानी जाती है।
प्रमुख दावेदार और पिछला परिणाम (2020):
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट | जीत का अंतर |
| पंकज कुमार मिश्र (विजेता) | JDU (NDA) | 73,205 | 24,629 वोट |
| मंगिता देवी | RJD (महागठबंधन) | 48,576 | – |
| गुड्डी देवी | LJP (तीसरे स्थान पर) | 16,038 | – |
पंकज कुमार मिश्र/NDA (JDU) की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण
| अनुकूल तथ्य/विश्लेषण | विवरण |
| बड़ा जीत का अंतर (2020) | 2020 में JDU के पंकज कुमार मिश्र ने RJD की मंगिता देवी को 24,629 वोटों के भारी अंतर से हराया था। यह अंतर दर्शाता है कि उनके पक्ष में मजबूत लहर थी, और यह उन्हें 2025 में एक मजबूत दावेदार बनाता है। |
| गैर-M-Y वोटों का ध्रुवीकरण | इस सीट पर भूमिहार मतदाताओं का अच्छा खासा प्रभाव है, और पंकज कुमार मिश्र इसी समुदाय से आते हैं। NDA के पारंपरिक वोट बैंक (सवर्ण, अतिपिछड़ा, पसमांदा मुस्लिम का एक हिस्सा) का एकजुट समर्थन उन्हें निर्णायक बढ़त दिलाता है। |
| LJP के वोट NDA में वापसी | 2020 में LJP की गुड्डी देवी (जो JDU की पूर्व विधायक भी थीं) ने चुनाव लड़कर NDA के वोटों में सेंध लगाई थी। इसके बावजूद JDU ने बड़ी जीत हासिल की थी। 2025 में यदि LJP-रामविलास NDA के साथ मिलकर चुनाव लड़ती है या LJP का उम्मीदवार कमजोर होता है, तो NDA के वोट और मजबूत होंगे। |
| विकास के मुद्दे (नीतीश की छवि) | JDU उम्मीदवार होने के नाते उन्हें नीतीश कुमार के विकास कार्यों (सड़क, बिजली, नल जल योजना) और महिला मतदाताओं के बीच उनकी लोकप्रियता का लाभ मिलता है। |
मंगिता देवी/महागठबंधन (RJD) की जीत की राह और JDU उम्मीदवार की हार के संभावित प्रतिकूल तथ्य
| प्रतिकूल तथ्य/विश्लेषण (JDU की हार के संभावित कारण) | विवरण |
| M-Y समीकरण की ताकत | रुन्नीसैदपुर RJD का पारंपरिक गढ़ रहा है, जहाँ यादव और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है। यदि RJD अपने M-Y समीकरण को पूरी तरह से एकजुट करने और उसमें अन्य पिछड़ी जातियों (जैसे कुशवाहा, कुर्मी) का साथ जोड़ने में सफल होती है, तो वह पिछले अंतर को पाट सकती है। 2015 में RJD की मंगिता देवी ने यह सीट जीती थी। |
| स्थानीय मुद्दे और एंटी-इनकम्बेंसी | यह ग्रामीण क्षेत्र बाढ़-प्रवण है, और यहाँ बिजली, किसानों के मुद्दे (बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई) तथा स्वास्थ्य व शिक्षा जैसी बुनियादी समस्याओं का समाधान न होना विधायक के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) पैदा कर सकता है। |
| जातीय समीकरण का विभाजन | यदि JDU का पारंपरिक सवर्ण/भूमिहार वोट बैंक किसी कारण से बँटता है (जैसे किसी मजबूत निर्दलीय उम्मीदवार के आने से), तो यह RJD के लिए वापसी का मौका हो सकता है। |
| तेजस्वी फैक्टर | RJD प्रमुख तेजस्वी यादव की लोकप्रियता और उनके द्वारा उठाए गए रोजगार जैसे मुद्दों से युवा और वंचित वर्ग के मतदाता बड़ी संख्या में महागठबंधन की ओर आकर्षित हो सकते हैं। |
निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):
रुन्नीसैदपुर की राजनीति हमेशा से दो प्रमुख जातीय ध्रुवों – भूमिहार-आधारित JDU और M-Y-आधारित RJD के बीच घूमती रही है।
- JDU की ताकत 2020 में मिली 24,629 वोटों की बड़ी बढ़त और पंकज कुमार मिश्र के मजबूत व्यक्तिगत आधार में निहित है।2
- RJD की चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि उसका M-Y समीकरण पूरी तरह से एकजुट हो और वह ग्रामीण इलाकों के स्थानीय मुद्दों को NDA के खिलाफ एक मजबूत हथियार के तौर पर इस्तेमाल करे।
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य और 2020 के परिणामों के भारी अंतर को देखते हुए, NDA (JDU) का पलड़ा एक बार फिर भारी है। हालांकि, यह सीट कांटे की टक्कर में बदल सकती है यदि RJD एक मजबूत स्थानीय उम्मीदवार उतारने और सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाने में सफल होता है।
संभावित विजेता: JDU के पंकज कुमार मिश्र। (NDA गठबंधन की ताकत और भारी जीत के अंतर के कारण JDU इस सीट को बरकरार रख सकती है।)
