बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में रूपौली (Rupauli) सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प और अनिश्चित रहने वाला है। हालिया उपचुनाव के नतीजों ने इस सीट की राजनीति को पूरी तरह से बदल दिया है। यहाँ मुख्य मुकाबला निर्दलीय विधायक शंकर सिंह और पूर्व विधायक बीमा भारती (RJD) के बीच माना जा रहा है, जबकि JDU (NDA) के उम्मीदवार भी मुकाबले में रहेंगे।
उपलब्ध विश्लेषण और हाल के उपचुनाव परिणामों के आधार पर, निर्दलीय उम्मीदवार शंकर सिंह (या NDA समर्थित उम्मीदवार) के जीतने की संभावना प्रबल है।
विजेता की संभावित जीत के पक्ष में विश्लेषण (निर्दलीय/NDA – शंकर सिंह)
संभावित विजेता: शंकर सिंह (निर्दलीय/NDA उम्मीदवार)
1. हालिया उपचुनाव की निर्णायक जीत (2024):
- निर्दलीय ताकत: 2024 के उपचुनाव में शंकर सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में JDU के कलाधर मंडल और RJD की बीमा भारती (जो पाँच बार विधायक रह चुकी थीं) दोनों को हराकर जीत हासिल की। उन्होंने JDU उम्मीदवार को 8,246 वोटों के अंतर से हराया, जबकि बीमा भारती तीसरे स्थान पर रहीं। यह उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता और जातीय समीकरणों को साधने की क्षमता का सबसे मजबूत प्रमाण है।
- एंटी-इनकम्बेंसी का लाभ: बीमा भारती के विधायक पद से इस्तीफा देकर लोकसभा चुनाव लड़ने और फिर हारने के बाद, मतदाताओं में उनके प्रति पैदा हुए विरोध (एंटी-इनकम्बेंसी) का सीधा लाभ शंकर सिंह को मिला।
2. मजबूत व्यक्तिगत जनाधार और जातीय समीकरण:
- शंकर सिंह का राजपूत समाज से आना रूपौली के सवर्ण वोटों (राजपूत, ब्राह्मण) को एकजुट करने में मदद करता है।
- 2020 में LJP के टिकट पर लड़ते हुए भी वह JDU की बीमा भारती के खिलाफ दूसरे स्थान पर रहे थे, जो उनके व्यक्तिगत प्रभाव को दर्शाता है।
- विकास पुरुष की छवि: उपचुनाव जीतने के बाद, शंकर सिंह ने विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया है, खासकर बाढ़ और कटाव जैसी स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास किए हैं (जैसे रिंग बांध का प्रस्ताव)। उनकी यह छवि उन्हें जातिगत सीमाओं से ऊपर उठकर वोट दिला सकती है।
3. NDA का संभावित समर्थन:
- यदि NDA (JDU और BJP) 2025 के चुनाव में शंकर सिंह को औपचारिक रूप से अपना समर्थन दे देता है (या JDU से टिकट मिलता है), तो उनकी जीत निश्चित हो जाएगी। 2024 के उपचुनाव में वह निर्दलीय के रूप में जीते थे, और अब सत्ता पक्ष (NDA) की ओर से उन्हें समर्थन मिलने की प्रबल संभावना है।
अन्य उम्मीदवार की संभावित हार के प्रतिकूल तथ्य (महागठबंधन – RJD)
संभावित उपविजेता: बीमा भारती (RJD)
1. कमजोर होती व्यक्तिगत पकड़ और लगातार हार:
- 2024 की दोहरी हार: बीमा भारती को 2024 के लोकसभा चुनाव में पूर्णिया से RJD उम्मीदवार के रूप में हार मिली, और उसके तुरंत बाद रूपौली विधानसभा उपचुनाव में भी वह तीसरे स्थान पर रहीं। यह स्पष्ट संकेत है कि जनता का भरोसा उनसे हटा है।
- पप्पू यादव फैक्टर: पूर्णिया लोकसभा चुनाव में निर्दलीय पप्पू यादव की जीत ने सीमांचल की राजनीति में गैर-पारंपरिक वोटों के बिखराव को दिखाया। 2024 के उपचुनाव में पप्पू यादव ने बीमा भारती का समर्थन किया था, इसके बावजूद उन्हें हार मिली, जो दिखाता है कि केवल MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण और पप्पू यादव के समर्थन से रूपौली की जीत सुनिश्चित नहीं हो सकती।
2. अति-आत्मविश्वास और राजनीतिक पलायन (Political Migration):
- बीमा भारती ने JDU से इस्तीफा देकर RJD में शामिल होने का कदम उठाया। मतदाताओं में यह संदेश जा सकता है कि उन्होंने अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा को क्षेत्र के प्रतिनिधित्व से ऊपर रखा। इस बार-बार पाला बदलने की राजनीति से एक वर्ग के मतदाता उनसे नाराज हो सकते हैं।
3. त्रिकोणीय/बहुकोणीय मुकाबले का खतरा:
- रूपौली सीट पर पारंपरिक रूप से JDU/RJD, CPI और निर्दलीय मजबूत रहे हैं। 2020 में CPI के विकास चंद्र मंडल को 41,963 वोट मिले थे। 2025 में जनसुराज की नई एंट्री भी मुकाबला बहुकोणीय बना सकती है। ऐसे में MY समीकरण पर निर्भर RJD के लिए वोटों के बिखराव से नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्योंकि शंकर सिंह को एकमुश्त सवर्ण और एक हिस्सा EBC वोट का मिल सकता है।
4. 2020 में जीत का आधार (अब नहीं):
- 2020 में बीमा भारती की जीत (19,330 वोटों से) JDU के टिकट पर हुई थी, जब JDU, BJP के साथ गठबंधन में थी। आज वह RJD में हैं और JDU/BJP गठबंधन के खिलाफ लड़ रही हैं। JDU के पारंपरिक EBC (अति पिछड़ा वर्ग) और महिला वोट अब उन्हें मिलने की संभावना कम है, क्योंकि JDU/NDA अब अपना मजबूत उम्मीदवार (या शंकर सिंह को समर्थन) उतारेगी।
निष्कर्ष
रूपौली में मुकाबला त्रिकोणीय रहेगा, लेकिन शंकर सिंह की स्थिति सबसे मजबूत है। 2024 के उपचुनाव की जीत ने उन्हें विधायक की कुर्सी के साथ-साथ एक अभेद्य व्यक्तिगत जनाधार भी दिया है। यदि वह NDA के समर्थन को अपने निर्दलीय जनाधार और राजपूत/सवर्ण वोटों के साथ मिला लेते हैं, तो उनकी जीत निश्चित है।
दूसरी ओर, बीमा भारती के लिए अपनी लगातार दो हार के बाद वापसी करना एक बड़ी चुनौती है। उन्हें RJD के कोर MY समीकरण के साथ EBC और अति दलित वोटों में बड़ी सेंध लगानी होगी, जो हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण मुश्किल लग रहा है।
