परिणाम का पूर्वानुमान (विश्लेषणात्मक संभावना)
समस्तीपुर जिले की रोसड़ा (अनुसूचित जाति-SC के लिए आरक्षित) विधानसभा सीट पर NDA (BJP) की स्थिति वर्तमान में मजबूत दिख रही है, जिसका मुख्य कारण 2020 की बड़ी जीत और 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली निर्णायक बढ़त है।
- संभावित विजेता (NDA की निर्णायक ताकत और महागठबंधन में अंदरूनी कलह के आधार पर): NDA के उम्मीदवार (BJP के बीरेन्द्र कुमार)।
BJP के बीरेन्द्र कुमार के पक्ष में मजबूत समीकरण है क्योंकि महागठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर गंभीर मतभेद सामने आए हैं, जिसका सीधा फायदा NDA को मिल सकता है।
प्रमुख दावेदार और जीत/हार का निर्णायक विश्लेषण
1. बीरेन्द्र कुमार (BJP) की जीत के पक्ष में विश्लेषण (NDA की एकजुटता और निर्णायक बढ़त)
बीरेन्द्र कुमार की संभावित जीत के मुख्य कारण और अनुकूल तथ्य निम्नलिखित हैं:
- 2020 की भारी जीत का अंतर:
- 2020 के विधानसभा चुनाव में, BJP के बीरेन्द्र कुमार ने कांग्रेस के नागेंद्र कुमार पासवान को 35,744 वोटों के विशाल अंतर से हराया था। यह अंतर उस समय आया जब LJP ने अकेले चुनाव लड़ा था और 22,995 वोट हासिल किए थे। LJP के अब NDA में वापस आने से, यह वोट बैंक BJP के खाते में जुड़कर जीत के अंतर को और बढ़ाएगा।
- 2024 लोकसभा चुनाव का परिणाम:
- 2024 के लोकसभा चुनाव में, NDA (LJP-रामविलास) की उम्मीदवार शांभवी चौधरी ने रोसड़ा विधानसभा क्षेत्र समेत समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र की सभी सीटों पर निर्णायक बढ़त हासिल की थी। यह स्पष्ट रूप से क्षेत्र में NDA के पक्ष में एक मजबूत लहर को दर्शाता है।
- महागठबंधन में गंभीर अंदरूनी कलह (Friendly Fights):
- रोसड़ा सीट पर महागठबंधन में सीट बँटवारे को लेकर गंभीर दरार पड़ गई है। यह सीट कांग्रेस के खाते में गई है (उम्मीदवार: ब्रज किशोर रवि), लेकिन CPI ने भी स्थानीय माँग का हवाला देते हुए अपना उम्मीदवार (लक्ष्मण पासवान) उतार दिया है।
- यह “फ्रेंडली फाइट” महागठबंधन के वोटों को सीधे विभाजित करेगी। 2020 में भी CPI को 9,543 वोट मिले थे, और इन वोटों का बँटना BJP की जीत को आसान बना देगा।
- जातिगत समीकरण (SC और NDA का सामाजिक आधार):
- यह सीट SC आरक्षित है, जिसमें पासवान, रविदास, कोइरी और कुर्मी वोटों का प्रभाव है। NDA (BJP + JDU + LJP) का इन समुदायों के बीच एक मजबूत आधार है, खासकर LJP (रामविलास) के आने से पासवान वोटों का एकमुश्त समर्थन BJP के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
2. महागठबंधन उम्मीदवार की हार के लिए मुख्य चुनौतियाँ (वोटों का बिखराव और पिछले चुनाव की कमजोरी)
महागठबंधन (INC/RJD) के उम्मीदवार के लिए जीत हासिल करने में ये कारक बाधा उत्पन्न करेंगे:
- वोटों का स्पष्ट विभाजन:
- सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस और CPI के बीच सीधी टक्कर है। 2020 में भी कांग्रेस (51,419 वोट) और LJP (22,995 वोट) के वोटों को जोड़ने पर भी वे BJP (87,163 वोट) से पीछे थे। अब, CPI के अलग लड़ने और निर्दलीय/जन सुराज उम्मीदवारों (जैसे राजेश पासवान) के मैदान में उतरने से महागठबंधन का कोर वोट बैंक बिखर जाएगा, जिससे BJP के लिए जीत सुनिश्चित हो जाएगी।
- SC वोटों पर NDA की मजबूत पकड़:
- 2020 में INC उम्मीदवार एक SC समुदाय से थे, लेकिन फिर भी वे BJP उम्मीदवार से 35,000 से अधिक वोटों से हारे। 2024 के लोकसभा परिणाम ने भी यह स्थापित कर दिया है कि NDA, विशेष रूप से चिराग पासवान की LJP (रामविलास) के माध्यम से, SC समुदाय के एक बड़े हिस्से का समर्थन बरकरार रखती है।
- कमजोर ऐतिहासिक प्रदर्शन:
- हालाँकि रोसड़ा में कांग्रेस ने अतीत में सबसे अधिक जीत हासिल की है, लेकिन 2015 की जीत (NDA के खिलाफ) को छोड़कर, पिछले दशकों में NDA के मुकाबले कांग्रेस का प्रदर्शन अस्थिर रहा है, और RJD/यादव-मुस्लिम समीकरण रोसड़ा की SC आरक्षित सीट पर स्वयं में निर्णायक नहीं है।
निष्कर्ष
रोसड़ा (सुरक्षित) विधानसभा सीट पर NDA (BJP) का पलड़ा भारी है। 2020 की बड़ी जीत, 2024 लोकसभा में मिली बढ़त, और महागठबंधन में CPI बनाम कांग्रेस के बीच हो रहे स्पष्ट वोट विभाजन के कारण NDA उम्मीदवार बीरेन्द्र कुमार की जीत लगभग सुनिश्चित मानी जा सकती है। महागठबंधन की एकता में आई दरार और वोटों का बिखराव ही उनकी हार का सबसे बड़ा कारण बनेगा।
