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लौकहा विधानसभा: ‘MY’ समीकरण का गढ़ या NDA की वापसी? 2025 की जंग में कौन पड़ेगा भारी!

लौकहा विधानसभा (सीट संख्या 40) बिहार के मधुबनी जिले में स्थित है और यह मिथिलांचल की एक महत्वपूर्ण सीट है जहाँ का चुनावी इतिहास अस्थिर रहा है, यानी किसी एक पार्टी का लंबे समय तक दबदबा नहीं रहा है।1 वर्तमान में यह सीट राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के पास है।

प्रमुख दावेदार और पिछला परिणाम (2020):

उम्मीदवार पार्टी प्राप्त वोट जीत का अंतर
भारत भूषण मंडल (विजेता) RJD (महागठबंधन) 78,523 10,077 वोट
लक्ष्मेश्वर राय JDU (NDA) 68,288

(टिप्पणी: 2020 में RJD ने JDU को लगभग 10 हज़ार वोटों के अंतर से हराया था।)2


भारत भूषण मंडल / महागठबंधन (RJD) की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण

अनुकूल तथ्य/विश्लेषण विवरण
मज़बूत ‘M-Y’ (मुस्लिम-यादव) बेस लौकहा सीट पर यादव (लगभग 15.30%) और मुस्लिम (लगभग 15.60%) मतदाताओं की बड़ी संख्या है, जो RJD का कोर वोट बैंक है। यह संयुक्त वोट शेयर निर्णायक भूमिका निभाता है और 2020 की जीत का मुख्य आधार था।
सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) से बचाव वर्तमान में विधायक RJD के हैं, लेकिन अगर RJD सत्ता में नहीं आती है (यानी NDA सत्ता में रहती है), तो महागठबंधन के पास एंटी-इनकंबेंसी को भुनाने का मौका रहेगा, खासकर स्थानीय विधायक के खिलाफ थोड़ी-बहुत नाराज़गी को दबाने का।
पूर्व JDU नेता का RJD में आना JDU के पूर्व मंत्री लक्ष्मेश्वर राय को 2025 में टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने RJD का दामन थाम लिया है। यदि वह भारत भूषण मंडल के लिए ज़मीन पर काम करते हैं, तो JDU के वोटों में सेंधमारी हो सकती है।
स्थानीय मुद्दों पर आक्रामक रुख विधायक के पास शिक्षित युवा नेतृत्व होने के कारण वह रोज़गार और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे मुद्दों पर आक्रामक रूप से लड़ाई लड़ सकते हैं, जो क्षेत्र के युवाओं को आकर्षित करेगा।
अस्थिर चुनावी इतिहास इस सीट पर कोई एक दल लगातार हावी नहीं रहा है (RJD/JDU/CPI बारी-बारी से जीते हैं)। RJD अपनी पिछली जीत के आधार पर लौकहा में वापसी की संभावना को मजबूत मानकर चलेगी।

NDA (संभावित JDU/BJP) की हार के संभावित प्रतिकूल तथ्य और विश्लेषण

प्रतिकूल तथ्य/विश्लेषण (NDA की हार के संभावित कारण) विवरण
2020 विधानसभा की हार का अंतर 2020 में JDU उम्मीदवार लक्ष्मेश्वर राय को RJD ने 10,077 वोटों से हराया था, जो यह दर्शाता है कि MY समीकरण NDA के EBC + सवर्ण वोटरों पर भारी पड़ा।
JDU के दिग्गज नेता का बागी होना JDU के पूर्व मंत्री लक्ष्मेश्वर राय को टिकट न मिलने पर उनका असंतुष्ट होना और RJD का साथ देना NDA के लिए बड़ा झटका है। उनके समर्थक वोट, खासकर अति पिछड़ा वर्ग से आने वाले वोट, बिखर सकते हैं।
यादव/मुस्लिम प्रभुत्व को नहीं भेद पाना लौकहा में RJD का M-Y समीकरण इतना मज़बूत है कि NDA को यह सीट जीतने के लिए यादव या मुस्लिम वोटों में बड़ी सेंध लगानी होगी, या अति पिछड़ा और सवर्ण वोटों का पूर्ण ध्रुवीकरण करना होगा, जो चुनौतीपूर्ण है।
स्थानीय विकास के अधूरे वादे क्षेत्र में उच्च शिक्षा संस्थान (डिग्री कॉलेज), सिंचाई सुविधाओं की कमी, और स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की कमी जैसे मुद्दे अधूरे हैं। NDA पर इन मुद्दों को पूरा न करने का आरोप लग सकता है।
सीट बंटवारे और उम्मीदवार की समस्या यदि NDA (JDU/BJP) कोई कमज़ोर या बाहरी उम्मीदवार उतारती है, या अंतिम समय में टिकट को लेकर खींचतान होती है, तो इसका सीधा फायदा RJD के मजबूत M-Y बेस को मिलेगा।
2024 लोकसभा चुनाव के रुझान की सीमा भले ही 2024 लोकसभा चुनाव में JDU ने इस खंड में RJD पर 26,992 वोटों की बढ़त हासिल की हो, लेकिन विधानसभा चुनाव में मतदाता स्थानीय उम्मीदवार और जातीय समीकरणों के आधार पर वोट करते हैं, जिससे यह बढ़त कायम रखना आसान नहीं होगा।

निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):

लौकहा विधानसभा सीट पर महागठबंधन (RJD) का पलड़ा थोड़ा भारी दिखता है क्योंकि यह सीट उनके M-Y (मुस्लिम-यादव) समीकरण का गढ़ है, जो यहाँ के जातीय गणित में एक मज़बूत आधार प्रदान करता है।

NDA के लिए सबसे बड़ी चुनौती RJD के कोर वोट बैंक को तोड़ने और JDU के पूर्व नेता लक्ष्मेश्वर राय की बगावत से हुए नुकसान को संभालना होगा। NDA को जीतने के लिए अति पिछड़ा (EBC), सवर्ण (Upper Castes), और वैश्य वोटों का पूर्ण ध्रुवीकरण करना होगा।

संभावित विजेता: भारत भूषण मंडल (RJD – महागठबंधन), लेकिन NDA की कड़ी चुनौती के कारण यह मुकाबला अंतिम चरण तक कांटे का बना रहेगा।

**(मौजूदा विधायक और M-Y समीकरण की मज़बूती के आधार पर RJD को मामूली बढ़त है।)

फाइनल संभावित विजेता (मौजूदा समीकरणों के आधार पर): भारत भूषण मंडल (RJD – महागठबंधन)

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