1️⃣ प्रमुख उम्मीदवार और मुकाबला

गठबंधन/पार्टी उम्मीदवार स्थिति और पृष्ठभूमि
महागठबंधन (RJD) विजय कुमार ‘सम्राट’ वर्तमान विधायक (2020 से)। यादव समुदाय से आते हैं। महागठबंधन की ओर से प्रमुख दावेदार।
NDA (JD-U) रणधीर कुमार सोनी पूर्व विधायक (2010, 2015)। दो बार यह सीट जीत चुके हैं। NDA (JD-U) के अनुभवी उम्मीदवार।

2️⃣ 🌟 महागठबंधन उम्मीदवार (विजय कुमार ‘सम्राट’) की जीत के कारण (अनुकूल तथ्य)

RJD उम्मीदवार विजय कुमार ‘सम्राट’ की जीत की संभावनाएँ निम्नलिखित कारणों पर आधारित हैं:

  • यादव बहुल क्षेत्र: शेखपुरा विधानसभा सीट पर यादव मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक है, जिसके बाद कुर्मी और भूमिहार मतदाता निर्णायक भूमिका में होते हैं। विजय कुमार यादव समुदाय से आते हैं, और RJD का परंपरागत मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण यहाँ एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
  • तेजस्वी यादव का प्रभाव: RJD की ओर से तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाली ‘युवा सरकार’ के नारे और रोजगार के वादे ने युवाओं और वंचित वर्गों के बीच एक नई उम्मीद जगाई है, जिसका लाभ विधायक को मिल सकता है।
  • एंटी-इनकम्बेंसी का बदलाव: 2020 में यह सीट JD(U) से RJD के पाले में आई, जो सत्ता-विरोधी लहर (एंटी-इनकम्बेंसी) का परिणाम थी। विजय सम्राट अपनी व्यक्तिगत छवि और विधायक के रूप में किए गए कार्यों के बल पर इस लहर को अपने पक्ष में बनाए रखने की कोशिश करेंगे।
  • कार्यकर्ता और स्थानीय पकड़: RJD के स्थानीय कार्यकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क और विधायक की ज़मीनी पकड़ उन्हें छोटे अंतर से जीत दिलाने में सहायक हो सकती है।

 

3️⃣ ❌ NDA उम्मीदवार (रणधीर कुमार सोनी) की हार के कारण (प्रतिकूल तथ्य)

 

JD(U) उम्मीदवार रणधीर कुमार सोनी के लिए यह सीट वापस जीतना आसान नहीं होगा:

  • सत्ता-विरोधी लहर (Anti-Incumbency): JD(U) उम्मीदवार होने के नाते, उन्हें न केवल अपनी पिछली हार का बोझ उठाना है, बल्कि राज्य में NDA सरकार के खिलाफ किसी भी संभावित सत्ता-विरोधी लहर का सामना भी करना पड़ सकता है, खासकर स्थानीय विकास और सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन को लेकर।
  • जातीय गणित को साधना मुश्किल: रणधीर सोनी को जीत सुनिश्चित करने के लिए यादव बहुल क्षेत्र में कुर्मी (नीतीश कुमार का कोर वोट), भूमिहार और अन्य सवर्ण/अतिपिछड़ा वोटों को एकजुट करना होगा। यदि भूमिहार वोट किसी तीसरे उम्मीदवार की ओर बँटते हैं, तो उनकी हार तय हो सकती है।
  • व्यक्तिगत प्रदर्शन पर सवाल: 2010 और 2015 में विधायक रहने के बावजूद, 2020 में उनकी हार से पता चलता है कि मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा उनके प्रदर्शन से असंतुष्ट था। 6,116 वोटों का अंतर उनकी वापसी को कठिन बना रहा है।
  • स्थानीय विकास के मुद्दे: स्थानीय लोगों में बेरोज़गारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर मौजूदा और पूर्व दोनों विधायकों के प्रति नाराजगी है, जो NDA उम्मीदवार के लिए प्रतिकूल हो सकता है।

 

4️⃣ निर्णायक फैक्टर: कुर्मी और भूमिहार वोटों का रुख

  • JD(U) की उम्मीद: रणधीर सोनी की जीत मुख्य रूप से नीतीश कुमार की अपील पर कुर्मी वोटों के मजबूत गोलबंदी और भूमिहार वोटों के एकतरफा समर्थन पर निर्भर करेगी। यदि ये दोनों समुदाय NDA के लिए एकजुट होते हैं, तो मुकाबला पलट सकता है।
  • RJD की चुनौती: RJD के लिए यह आवश्यक है कि वह अपने MY (मुस्लिम-यादव) आधार को सुरक्षित रखे और साथ ही अतिपिछड़ा/दलित वोटों को ‘रोजगार’ और ‘गरीबों को सम्मान’ के वादे पर अपनी ओर खींचे। 2020 की तरह ही, यदि महागठबंधन इस समीकरण में सफल होता है, तो विजय सम्राट अपनी सीट बचा सकते हैं।

निष्कर्ष: शेखपुरा में मुकाबला मौजूदा विधायक विजय सम्राट (RJD) और पूर्व विधायक रणधीर कुमार सोनी (JD-U) के बीच काँटे की टक्कर वाला रहेगा। यादव वोटों की अधिकता और तेजस्वी फैक्टर के कारण वर्तमान में महागठबंधन (RJD) का पलड़ा थोड़ा भारी दिखता है, लेकिन NDA की मजबूत जातीय गोलबंदी इस सीट का परिणाम किसी भी तरफ मोड़ सकती है।

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