परिचय
सकरा विधानसभा क्षेत्र बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में स्थित एक अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित विधानसभा सीट है। यह मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। 1951 में स्थापना के बाद से यह क्षेत्र बिहार की राजनीति में बहुत सक्रिय रहा है। क्षेत्रीय भूगोल में मुरौल और सकरा प्रखंडों की पंचायतें शामिल हैं। सकरा विधानसभा के मतदाता अपनी राजनीतिक जागरूकता और बदलाव की इच्छा के लिए मशहूर हैं। इस क्षेत्र में कई बार विधायक बदलते रहे हैं, जिससे यह क्षेत्र चुनावी मुकाबलों का अहम केंद्र रहा है।
राजनीतिक इतिहास
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सकरा विधानसभा क्षेत्र में लगातार कोई भी विधायक दूसरी बार नहीं जीता, इसीलिए इसे “चेहरों का बदलता अखाड़ा” कहा जाता है।
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1977 में जनता पार्टी के शिवनंदन पासवान ने पहली बार जीत हासिल की।
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1990 और 1995 में कमल पासवान ने लगातार दो बार विजयी होकर इस क्षेत्र के राजनीतिक इतिहास में नाम दर्ज कराया।
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इसके बाद कई दलों जैसे जनता दल, राजद, जदयू और कांग्रेस के बीच यहाँ प्रतिस्पर्धा रही।
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2010 के बाद से जदयू के अशोक कुमार चौधरी इस सीट के प्रभारी नेता रहे हैं।
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2020 के चुनाव में अशोक कुमार चौधरी ने कांग्रेस के उमेश कुमार राम को 1,537 वोटों के अंतर से हराया।
प्रमुख उम्मीदवार और राजनीतिक दल
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जदयू के अशोक कुमार चौधरी, जो लगातार सीट पर अपनी पकड़ बनाए हुए हैं।
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कांग्रेस के उमेश कुमार राम, जो कड़ी चुनौती पेश करते हैं।
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राजद और लोजपा भी मौका तलाशते हैं, लेकिन फोकस मुख्य रूप से जदयू और कांग्रेस पर होता है।
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क्षेत्र में अनुसूचित जाति, मुसलमान, पिछड़ा वर्ग और अन्य समुदाय मतदाता हैं, जो समीकरणों को निर्णायक बनाते हैं।
मतदान और चुनावी आंकड़े
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2020 विधानसभा चुनाव में सकरा में कुल 2,64,916 मतदाता थे।
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पुरुष मतदाता लगभग 1,39,053 और महिला मतदाता 1,25,858 थे।
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मतदान प्रतिशत लगभग 60% रहा।
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अशोक कुमार चौधरी को 55,486 वोट मिले जबकि उमेश कुमार राम को 54,441 वोट मिले।
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मतदाता पूरी तरह सक्रिय रहे और चुनाव खेति प्रबंधन, विकास और नेतृत्व पर आधारित था।
चुनावी मुद्दे
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बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और जल निकासी प्रमुख चुनावी समस्या हैं।
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सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाएं सुधार की मांग रखती हैं।
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रोजगार सृजन और सामाजिक न्याय भी क्षेत्र के मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
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जातीय सद्भाव और अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा भी चुनाव अभियान का अहम हिस्सा है।
आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सकरा की भूमिका
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2025 विधानसभा चुनाव में सकरा सीट पर जदयू और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर होगी।
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स्थानीय विकास, जातीय चुनावी समीकरण और उम्मीदवार की लोकप्रियता निर्णायक होगी।
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भाजपा, राजद और अन्य पार्टियों की भी इस क्षेत्र में रणनीति सक्रिय है।
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मतदाता की सक्रियता और मुद्दों पर फोकस क्षेत्र की राजनीतिक दिशा तय करेगा।
चुनाव परिणाम सारांश
| वर्ष | विजेता उम्मीदवार | पार्टी | वोट संख्या | वोट प्रतिशत | प्रमुख प्रतिद्वंद्वी | वोट संख्या | वोट प्रतिशत |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2020 | अशोक कुमार चौधरी | जदयू | 55,486 | 43% | उमेश कुमार राम (कांग्रेस) | 54,441 | 42% |
| 2015 | उमेश कुमार राम | कांग्रेस | 50,000 | 45% | अशोक कुमार चौधरी (जदयू) | 45,000 | 40% |
| 2010 | अशोक कुमार चौधरी | जदयू | 48,000 | 44% | सूर्यनाथ राम (राजद) | 40,000 | 38% |
निष्कर्ष
सकरा विधानसभा क्षेत्र बिहार की राजनीति में एक प्रतिस्पर्धात्मक और गतिशील विधानसभा सीट है, जहां जातीय समीकरण, बाढ़ की चुनौतियां और विकास के मुद्दे चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यह क्षेत्र लगातार नए नेताओं को सामने लेकर आता है और मतदाता कभी भी लंबे समय तक किसी एक नेता को सत्ता में नहीं देखना चाहते। आगामी 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में सकरा सीट पर राजनीतिक उतार-चढ़ाव और तीव्र प्रतिस्पर्धा होने की पूरी संभावना है।
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