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समस्तीपुर संग्राम 2025: राजद का ‘MY-प्लस’ समीकरण बनाम NDA की जाति-विकास की जुगलबंदी

परिणाम का पूर्वानुमान (विश्लेषणात्मक संभावना)

समस्तीपुर विधानसभा सीट एक हाई-वोल्टेज सीट रही है, जिस पर 2010 से लगातार राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के उम्मीदवार का कब्ज़ा है।1 हालांकि, 2020 में जीत का अंतर काफी कम हो गया था। इस बार, यह सीट महागठबंधन (INDIA) के पक्ष में थोड़ी झुकी हुई मानी जा रही है, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव के रुझानों के कारण NDA एक कड़ी चुनौती पेश करेगा।

RJD उम्मीदवार की स्थिति मजबूत होने का मुख्य कारण क्षेत्र में MY समीकरण का प्रभुत्व और उनकी लगातार तीन बार की जीत है।


प्रमुख दावेदार और जीत के लिए मुख्य विश्लेषण

उम्मीदवार/पार्टी वर्तमान स्थिति 2020 चुनाव परिणाम मुख्य राजनीतिक गठबंधन
अख्तरुल इस्लाम शाहीन (RJD) मौजूदा विधायक (तीन बार से) 68,507 वोट (जीत) महागठबंधन (INDIA)
NDA उम्मीदवार (संभावित: अश्वमेध देवी – JDU या BJP) उपविजेता (अश्वमेध देवी – JDU) 63,793 वोट (हार) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA)

1. अख्तरुल इस्लाम शाहीन (RJD) की जीत के पक्ष में विश्लेषण (महागठबंधन की मजबूती)

अख्तरुल इस्लाम शाहीन (RJD) की संभावित जीत का आधार निम्नलिखित कारकों पर टिका होगा:

2. NDA उम्मीदवार की जीत के पक्ष में विश्लेषण (NDA की चुनौती)

NDA उम्मीदवार की जीत की संभावनाएँ निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करेंगी:


अन्य उम्मीदवार के लिए प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी

महागठबंधन उम्मीदवार (अख्तरुल इस्लाम शाहीन) के लिए प्रतिकूल तथ्य (चुनौतियाँ)

प्रतिकूल तथ्य/चुनौती विश्लेषण
2024 लोकसभा चुनाव का विपरीत रुझान समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र में NDA की बड़ी बढ़त उनके लिए सबसे गंभीर चुनौती है। यह दर्शाता है कि राज्य और केंद्र की नीतियों के कारण गैर-MY वोटबैंक NDA के पक्ष में एकजुट हो रहा है।
घटता जीत का अंतर 2015 में 31,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत के बाद, 2020 में यह अंतर घटकर केवल 4,714 रह गया, जो उनकी घटती लोकप्रियता या NDA की मजबूत चुनौती को दर्शाता है।
स्थानीय मुद्दे (जल जमाव, विकास) स्थानीय लोगों ने जल जमाव जैसे स्थानीय मुद्दों पर मौजूदा विधायक के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की है, जिसका फायदा NDA उम्मीदवार उठा सकते हैं।

NDA उम्मीदवार के लिए प्रतिकूल तथ्य (बाधाएँ)

प्रतिकूल तथ्य/सांख्यिकी विश्लेषण
RJD का पारंपरिक गढ़ यह सीट 2010 से RJD के पास है, और यह क्षेत्र RJD का एक पारंपरिक गढ़ माना जाता है। इस मजबूत आधार को तोड़ना NDA के लिए मुश्किल होगा।
मुस्लिम-यादव वोट का ध्रुवीकरण समस्तीपुर में MY वोट निर्णायक है। यदि यह वोट बैंक पूरी तरह से RJD के पक्ष में लामबंद होता है, तो NDA के लिए जीत हासिल करना लगभग असंभव होगा, भले ही वह EBC और सवर्ण वोट जुटा ले।
JDU बनाम BJP का आंतरिक संघर्ष यदि NDA में यह सीट JDU को जाती है, तो BJP के स्थानीय कार्यकर्ताओं का पूरा समर्थन नहीं मिलने की आशंका हो सकती है, जो 2020 में भी एक महत्वपूर्ण कारक रहा था।

निष्कर्ष:

समस्तीपुर की लड़ाई मुख्य रूप से MY समीकरण के ध्रुवीकरण और गैर-MY वोटों को एकजुट करने की NDA की क्षमता पर निर्भर करेगी। RJD के अख्तरुल इस्लाम शाहीन अपनी व्यक्तिगत पकड़ और कोर वोट बैंक के कारण मजबूत स्थिति में हैं। हालाँकि, 2020 का कम जीत का अंतर और 2024 लोकसभा का NDA-समर्थक रुझान बताता है कि यह मुकाबला बेहद कड़ा होगा। यदि NDA (विशेषकर LJP-RV के साथ आने से) EBC, सवर्ण और कुर्मी/कोइरी वोटों को पूरी तरह से एकजुट करने में सफल हो जाता है, तो वह राजद के इस गढ़ में उलटफेर कर सकता है। लेकिन वर्तमान सांख्यिकी और क्षेत्रीय इतिहास को देखते हुए RJD उम्मीदवार की स्थिति थोड़ी बेहतर प्रतीत होती है।

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