बिहार के रोहतास जिले की सासाराम विधानसभा सीट (संख्या 208) राजनीति, इतिहास और सामाजिक चेतना — तीनों का संगम है। शेरशाह सूरी के राज का यह ऐतिहासिक नगर न केवल वास्तुकला और शिक्षा का प्रतीक है, बल्कि यह बिहार की राजनीतिक दिशा तय करने वाली सीटों में भी अग्रणी रही है। 2025 का विधानसभा चुनाव सासाराम के लिए सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि विकास, जातीय संतुलन और नेतृत्व के पुनर्मूल्यांकन का मंच बन गया है ।
भूगोल और सामाजिक पहचान
सासाराम विधानसभा रोहतास जिले का प्रमुख शहरी क्षेत्र है, जहाँ ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों का संतुलित मिश्रण है। यह कैमूर की तलहटी और सोन नदी के किनारे फैला है, जो इसे कृषि और व्यावसायिक केंद्र दोनों रूपों में स्थापित करता है।
2024 के मतदाता सूची के अनुसार, सासाराम क्षेत्र में कुल 3,39,218 पंजीकृत मतदाता हैं, जिनमें पुरुष मतदाता लगभग 1.78 लाख और महिला मतदाता 1.61 लाख हैं ।
यह क्षेत्र जातीय दृष्टि से अत्यंत बहुस्तरीय है। इसमें कुशवाहा, यादव, ब्राह्मण, दलित, राजपूत और मुस्लिम समुदायों की पर्याप्त भागीदारी है ।
कुशवाहा समुदाय का प्रभाव यहाँ निर्णायक माना जाता है, जिसके कारण प्रमुख दल उम्मीदवार चयन करते समय विशेष रणनीति अपनाते हैं।
ऐतिहासिक और राजनैतिक पृष्ठभूमि
सासाराम की राजनीतिक यात्रा स्वतंत्रता के शुरुआती दौर में कांग्रेस के वर्चस्व से शुरू होती है।
1977 की जनता लहर ने यहाँ नई दिशा दी जब रामदेव महतो (जनता पार्टी) ने कांग्रेस को भारी मतों से हराया।
1980 और 1985 में कांग्रेस उम्मीदवार शरत कुमार जैन ने जीतकर दोबारा सत्ता सिद्ध की, लेकिन 1990 के बाद जनता दल और भाजपा के दौर ने नई करवट ली।
2000 में भाजपा के नंद किशोर यादव ने 65,377 वोट प्राप्त कर जीत दर्ज की और सासाराम को भाजपा का गढ़ बना दिया ।
इसके बाद सियासी समीकरणों में बदलाव आया — 2010 में भाजपा की जीत के बावजूद 2015 में राजद ने यहाँ वापसी की और अब 2020 से यह सीट राजद के नियंत्रण में है ।
2020 का चुनावी परिणाम
2020 के विधानसभा चुनाव में सासाराम का परिणाम बिहार के लिए संकेतक साबित हुआ।
राजद के विजय गुप्ता ने जदयू के अशोक कुमार को 26,423 वोटों के अंतर से हराते हुए सत्ता में शानदार वापसी की ।
| उम्मीदवार | दल | प्राप्त वोट | वोट शेयर |
|---|---|---|---|
| विजय गुप्ता | आरजेडी | 83,303 | 46.54% |
| अशोक कुमार | जदयू | 56,880 | 31.78% |
| रमेश्वर प्रसाद | एलजेपी | 21,426 | 11.97% |
| अन्य | निर्दलीय और छोटे दल | शेष वोट | – |
यह जीत न केवल राजद की राजनीतिक पुनर्स्थापना का प्रतीक बनी, बल्कि महागठबंधन की रणनीति को भी बल मिला।
2020 में कुल 46.54% वोटिंग हुई थी, जिसमें युवा और महिला मतदाताओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही।
2025 का चुनावी समीकरण
2025 के विधानसभा चुनाव में सासाराम सीट फिर से सुर्खियों में है।
राजद ने पुनः विजय गुप्ता पर भरोसा जताया है, जो अपने सामाजिक जुड़ाव अभियान और विकास कार्यों की बदौलत जनता के बीच लोकप्रिय बने हुए हैं।
दूसरी ओर, एनडीए ने अपने खास उम्मीदवार नीरज कुशवाहा (जदयू) को उतारा है, ताकि कुशवाहा समाज को साधा जा सके। भाजपा ने सीट जदयू को छोड़ते हुए गठबंधन राजनीति को प्राथमिकता दी है ।
महागठबंधन ने इसे “जनता बनाम शासन” की लड़ाई बताया है, जबकि एनडीए ने “विकास और स्थिरता” का नारा दिया है।
इस बार मुकाबला दो प्रमुख गठबंधनों — राजद-कांग्रेस-वाम बनाम जदयू-भाजपा-लोजपा — के बीच त्रिकोणीय होता दिख रहा है।
जातीय समीकरण और चुनावी गणित
सासाराम के जातीय समीकरण हर चुनाव की धुरी रहे हैं।
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कुशवाहा और यादव मतदाता लगभग 32% हैं।
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ब्राह्मण, भूमिहार और राजपूत वर्ग करीब 24% हैं।
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दलित और अनुसूचित जातियाँ 18-20% हिस्सा रखती हैं।
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मुस्लिम मतदाता लगभग 8-9% वोटों के साथ निर्णायक भूमिका में हैं ।
इन मतदाताओं के समर्थन या असंतोष से परिणाम की दिशा बदल जाती है।
2020 में यादव और कुशवाहा मतदाताओं के एकजुट समर्थन से राजद की जीत हुई थी। इस बार जदयू उसी समीकरण को तोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
सामाजिक–आर्थिक स्थिति और प्रमुख मुद्दे
सासाराम बिहार के प्रगतिशील जिलों में गिना जाता है, लेकिन यहाँ विकास का लाभ समान रूप से सभी वर्गों तक नहीं पहुँच पाया है।
मुख्य मुद्दे हैं:
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शहरी क्षेत्रों में जलनिकासी और ट्रैफिक समस्या
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कैमूर पहाड़ी क्षेत्र से जलस्रोत प्रबंधन
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छोटे उद्योगों के लिए विद्युत संकट
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बेरोजगारी और शिक्षा में असमानता
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महिला सुरक्षा और स्वावलंबन योजना का क्रियान्वयन
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स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
महिलाओं के रोजगार और उद्यमशीलता का मुद्दा इस चुनाव में प्रमुख बन गया है। राजद ने अपने चुनावी घोषणापत्र में “महिला प्रगति मिशन” और जदयू ने “घर तक पाइपलाइन जल योजना” को मुख्य आधार बनाया है।
ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण चुनावी डेटा
| वर्ष | विजेता उम्मीदवार | पार्टी | वोट | विरोधी उम्मीदवार | दल | वोट अंतर |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 2020 | विजय गुप्ता | राजद | 83,303 | अशोक कुमार | जदयू | 26,423 |
| 2015 | अशोक कुमार | राजद | 82,766 | जवाहर प्रसाद | भाजपा | 19,612 |
| 2010 | जवाहर प्रसाद | भाजपा | 50,856 | अशोक कुमार | राजद | 5,411 |
| 2005 | जय कुमार सिंह | जदयू | 41,765 | अखलाक अहमद | राजद | 12,421 |
| 2000 | नंद किशोर यादव | भाजपा | 65,377 | ज्ञानेंद्र यादव | राजद | 31,492 |
| 1995 | नंद किशोर यादव | भाजपा | 41,228 | रामलखन सिंह | जनता दल | 6,430 |
| 1990 | महताब लाल सिंह | जनता दल | 27,092 | विमलेश सिंह | भाजपा | 6,165 |
| 1985 | शरद कुमार जैन | कांग्रेस | 25,008 | रामलखन यादव | CPI | 2,767 |
| 1980 | शरद कुमार जैन | कांग्रेस(I) | 15,691 | रामदेव महतो | भाजपा | 280 |
| 1977 | रामदेव महतो | जनता पार्टी | 44,251 | राम रण विजय सिंह | कांग्रेस | 31,660 |
जनता की नब्ज़
सासाराम के नागरिक अब केवल जातीय समीकरण से नहीं, बल्कि परिणामों से राजनीति का मूल्यांकन करने लगे हैं। 2020 में हुए सर्वेक्षणों के अनुसार, यहाँ 58% मतदाता “स्थानीय उम्मीदवार की मौजूदगी” को सबसे बड़ा चुनावी कारक मानते हैं।
2025 में यह प्रवृत्ति और गहरी दिख रही है — वोटर अब विकास, सड़क, शिक्षा और औद्योगिक अवसरों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
चुनाव 2025: प्रमुख वादे और एजेंडे
राजद का घोषणा पत्र (2025):
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सासाराम नगर को “शेरशाह स्मार्ट सिटी” के रूप में विकसित करना
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युवाओं के लिए “सोन वैली टेक्नोलॉजी पार्क”
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शिक्षा संस्थानों में मुफ्त टैब योजना
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स्थानीय व्यापार हेतु ऋण सुविधा
एनडीए का घोषणा पत्र (2025):
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“हर घर नल का जल 2.0”
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कुशवाहा समुदाय के लिए विशेष उद्यम अनुदान
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औद्योगिक एरिया में एमएसएमई पार्क का विस्तार
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महिला सुरक्षा के लिए “स्मार्ट पुलिस नेटवर्क”
2025 चुनाव कार्यक्रम
चुनाव आयोग ने सासाराम सीट को दूसरे चरण (11 नवंबर 2025) में शामिल किया है।
नामांकन 13 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक चले, और मतदान के बाद 14 नवंबर 2025 को परिणाम घोषित होंगे ।
निष्कर्ष
सासाराम विधानसभा की कहानी केवल राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की नहीं, बल्कि बिहार के सामाजिक परिवर्तन की भी कहानी है।
यहाँ हर चुनाव जनता के धैर्य, रणनीति और जागरूकता की नई परीक्षा होती है।
2025 में भी यह सीट तय करेगी कि क्या जनता विकास और स्थिरता को प्राथमिकता देगी या सामाजिक बदलाव की नई दिशा चुनेगी।
इतिहास और लोकतंत्र के इस संगम पर सासाराम एक बार फिर बिहार की राजनीति की धुरी बनने को तैयार है ।
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