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साहेबगंज का ‘चौथा संग्राम’: क्या BJP का ‘नए’ गढ़ पर कब्जा बरकरार रहेगा, या RJD का ‘चाणक्य’ पलटेगा पासा?

साहेबगंज (मुजफ्फरपुर जिला) विधानसभा सीट – एक गहरा विश्लेषण

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए साहेबगंज सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प होने की उम्मीद है। यह सीट मुजफ्फरपुर जिले के अंतर्गत आती है और यहां मुख्य मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार और महागठबंधन (MGB) के उम्मीदवार के बीच माना जा रहा है।

जीतने वाले उम्मीदवार का अनुमान: डॉ. राजू कुमार सिंह (भारतीय जनता पार्टी – BJP / NDA)

वर्तमान में बिहार सरकार में मंत्री और मौजूदा विधायक डॉ. राजू कुमार सिंह को इस सीट पर जीत का मजबूत दावेदार माना जा सकता है।

जीत के संभावित विश्लेषण (राजू कुमार सिंह के पक्ष में):

विश्लेषण बिंदु तथ्य और आंकड़े (राजू कुमार सिंह के पक्ष में)
वर्तमान स्थिति और दल-बदल का फायदा 2020 में वीआईपी (VIP) के टिकट पर 15,333 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए और वर्तमान में राज्य सरकार में पर्यटन मंत्री हैं। मंत्री बनने से क्षेत्र में विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद रहती है, जिससे उनकी छवि को लाभ मिल सकता है।
व्यक्तिगत रिकॉर्ड राजू कुमार सिंह इस सीट से कुल चार बार विधायक रह चुके हैं (2005-फरवरी, 2005-अक्टूबर, 2010, और 2020)। उनका लगातार चुनावी अनुभव और व्यक्तिगत प्रभाव उन्हें मजबूती देता है।
गठबंधन का आधार 2025 में वह BJP के उम्मीदवार हैं, जो NDA का एक प्रमुख दल है। NDA (BJP + JDU + LJP (RV) आदि) का मजबूत जातिगत और संगठनात्मक आधार उन्हें एक निर्णायक बढ़त दिला सकता है, खासकर तब जब पिछली बार उन्होंने VIP के टिकट पर भी जीत हासिल की थी।
लोकसभा चुनाव 2024 का प्रदर्शन 2024 के लोकसभा चुनावों में, साहेबगंज विधानसभा क्षेत्र में NDA की सहयोगी LJP (RV) की उम्मीदवार वीणा देवी ने 4,504 वोटों की बढ़त हासिल की थी, जो NDA के पक्ष में माहौल का संकेत देता है।

हारने वाले उम्मीदवार का अनुमान (मुख्य प्रतिद्वंद्वी): राम विचार राय (राष्ट्रीय जनता दल – RJD / महागठबंधन)

साहेबगंज सीट पर उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी राजद के अनुभवी नेता राम विचार राय हैं, जो इस सीट से चार बार (1990, 1995, 2000 और 2015) विधायक रह चुके हैं।1

हार के संभावित विश्लेषण (राम विचार राय के विपक्ष में):

विश्लेषण बिंदु तथ्य और आंकड़े (राम विचार राय के विपक्ष में)
पिछली हार का अंतर 2020 के चुनाव में, वह वीआईपी के राजू कुमार सिंह से 15,333 वोटों (लगभग 8.40% के अंतर) से हार गए थे। यह अंतर उनकी वापसी की राह को मुश्किल बना सकता है।
लगातार हार-जीत का पैटर्न राम विचार राय ने 2015 में राजू कुमार सिंह (तब BJP में) को हराया था, लेकिन 2020 में वह खुद हार गए। 2010 में भी वह राजू सिंह (तब JDU में) से हार चुके थे। यह दिखाता है कि सीट पर कांटे की टक्कर रहती है, लेकिन मौजूदा ट्रेंड विपक्ष के लिए चुनौतीपूर्ण है।
सत्ता विरोधी लहर का अभाव (NDA के लिए) यदि राज्य में NDA के पक्ष में लहर होती है, तो यह महागठबंधन के उम्मीदवार के लिए एक बड़ी बाधा बन सकती है, खासकर जब उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी सत्ताधारी पार्टी के कद्दावर नेता बन चुके हैं।
स्थानीय मुद्दे और मतदाताओं की अपेक्षा क्षेत्र में बाढ़ नियंत्रण, रोजगार और बेहतर सड़कों जैसे कई अधूरे विकास कार्य हैं। यदि मौजूदा विधायक (राजू सिंह) मंत्री के रूप में इन समस्याओं को दूर करने का कुछ हद तक भी प्रयास करते हैं, तो यह मतदाताओं के बीच राय की वापसी को कठिन बना सकता है।

निष्कर्ष:

साहेबगंज विधानसभा सीट पर मुकाबला डॉ. राजू कुमार सिंह (BJP) और राम विचार राय (RJD) के बीच केंद्रित रहने की संभावना है। राजू कुमार सिंह की वर्तमान में मंत्री पद की स्थिति, मजबूत NDA गठबंधन का समर्थन और व्यक्तिगत जीत का ट्रैक रिकॉर्ड उन्हें एक मजबूत उम्मीदवार बनाता है। हालांकि, राजद उम्मीदवार का पुराना जनाधार और महागठबंधन की एकजुटता मुकाबले को कड़ा कर सकती है। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और पिछले चुनाव के परिणामों को देखते हुए, राजू कुमार सिंह के लिए अपनी सीट बरकरार रखना अधिक संभावित प्रतीत होता है।


अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि यह विश्लेषण वर्तमान राजनीतिक माहौल, पिछले चुनावों के आंकड़ों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। चुनाव परिणाम कई कारकों पर निर्भर करते हैं और अंतिम परिणाम मतदान के दिन मतदाताओं के रुख पर निर्भर करेगा।

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