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साहेबपुर कमाल: MY गढ़ पर NDA का ‘सहारा’! क्या चिराग और नीतीश मिलकर तोड़ पाएंगे RJD का अभेद्य किला?

परिणाम का पूर्वानुमान (विश्लेषणात्मक संभावना)

बेगूसराय जिले की साहेबपुर कमाल विधानसभा सीट पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का गढ़ रहा है। 2020 के चुनाव में RJD ने 14,225 वोटों के बड़े अंतर से यह सीट जीती थी।

इस सीट की राजनीति मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण पर हावी रहती है। चूंकि RJD इस समीकरण पर आधारित है और NDA गठबंधन में आंतरिक कलह के बावजूद, RJD के मौजूदा विधायक सत्तानन्द सम्बुद्ध उर्फ ललन की जीत की संभावनाएँ सबसे अधिक हैं।

  • संभावित विजेता: सत्तानन्द सम्बुद्ध उर्फ ललन (महागठबंधन – RJD)
  • NDA के मुख्य दावेदार: लोजपा (रामविलास) के सुरेंद्र विवेक या JDU के उम्मीदवार (गठबंधन के सीट बंटवारे पर निर्भर)।

जीत/हार का निर्णायक विश्लेषण (अनुकूल और प्रतिकूल तथ्य)

साहेबपुर कमाल सीट का मुकाबला सीधा RJD के मजबूत जातीय समीकरण और NDA के संयुक्त वोट बैंक के बीच होगा।

उम्मीदवार/पार्टी वर्तमान स्थिति 2020 चुनाव परिणाम मुख्य राजनीतिक आधार
सत्तानन्द सम्बुद्ध उर्फ ललन (MGB – RJD) मौजूदा विधायक। 14,225 वोटों से विजेता (RJD) यादव (पारंपरिक RJD वोट) + मुस्लिम (अल्पसंख्यक वर्चस्व) = MY फैक्टर
NDA उम्मीदवार (LJP-RV/JDU) गठबंधन के प्रत्याशी (संभावित रूप से LJP या JDU)। उपविजेता (JDU), तीसरा स्थान (LJP) सवर्ण (भूमिहार निर्णायक), EBC और OBC वोट

1. महागठबंधन (RJD) की जीत के पक्ष में विश्लेषण (अनुकूल तथ्य और सांख्यिकी)

सत्तानन्द सम्बुद्ध उर्फ ललन की संभावित जीत के मुख्य कारण और अनुकूल तथ्य निम्नलिखित हैं:

  • अभेद्य MY समीकरण: साहेबपुर कमाल सीट पर यादव और मुस्लिम वोटरों का स्पष्ट दबदबा है। RJD के पास इन दोनों समुदायों का ठोस और पारंपरिक समर्थन है, जो किसी भी उम्मीदवार की जीत के लिए निर्णायक होता है।
  • 2020 की बड़ी जीत का अंतर: 2020 में RJD उम्मीदवार ने 14,225 वोटों के एक स्वस्थ अंतर से जीत दर्ज की थी। यह अंतर यह दर्शाता है कि NDA के संयुक्त प्रयासों के बावजूद, RJD का आधार अटूट रहा।
  • सत्तानन्द सम्बुद्ध का मजबूत परिवारिक आधार: मौजूदा विधायक और उनका परिवार दो दशकों से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहा है, जो उनकी गहरी स्थानीय पकड़ और व्यक्तिगत विश्वसनीयता को दर्शाता है।
  • NDA वोट का बिखराव (2020 की सांख्यिकी): 2020 में JDU के शशि कांत कुमार शशि को 50,663 वोट मिले थे, जबकि NDA से अलग होकर लड़ी LJP के सुरेंद्र कुमार ने 22,871 वोट काट लिए थे। यदि इस बार भी NDA गठबंधन में आंतरिक मतभेद होता है या उम्मीदवार का चयन कमजोर होता है, तो RJD को आसानी से लाभ मिलेगा।

2. NDA उम्मीदवार की हार के पक्ष में विश्लेषण (प्रतिकूल तथ्य और चुनौतियाँ)

NDA (संभावित रूप से JDU या LJP-RV) उम्मीदवार की संभावित हार के मुख्य कारण और प्रतिकूल सांख्यिकी निम्नलिखित हैं:

  • NDA के भीतर सीट बंटवारे की चुनौती:
    • 2020 में, LJP के कारण JDU की हार हुई थी। इस बार NDA में JDU और LJP (रामविलास) दोनों हैं और दोनों इस सीट पर दावा कर रहे हैं। यदि यह सीट LJP(RV) को मिलती है, तो JDU के पारंपरिक वोट में नाराजगी हो सकती है, और यदि JDU को मिलती है, तो चिराग पासवान फैक्टर से वंचित होने का खतरा रहेगा।
  • अल्पसंख्यक वोटरों का RJD के प्रति झुकाव:
    • यह सीट अल्पसंख्यक उम्मीदवारों के लिए उर्वर मानी जाती है। मुस्लिम वोट बैंक (जो यहाँ निर्णायक है) का झुकाव पारंपरिक रूप से RJD की ओर रहता है। AIMIM ने 2020 में 7,933 वोट लेकर भी कोई बड़ा उलटफेर नहीं किया था, यह दर्शाता है कि मुस्लिम वोट बैंक महागठबंधन के साथ संगठित रहता है।
  • 2024 लोकसभा चुनाव में कम बढ़त:
    • बेगूसराय लोकसभा सीट पर BJP के गिरिराज सिंह ने जीत दर्ज की थी, लेकिन साहेबपुर कमाल विधानसभा क्षेत्र में उनकी बढ़त केवल 1,453 वोटों की थी। 2020 के 14,225 वोटों के घाटे को भरने के लिए यह बढ़त बहुत कम है और विधानसभा चुनाव में यह मार्जिन आसानी से पलट सकता है।

निष्कर्ष

साहेबपुर कमाल विधानसभा सीट पर महागठबंधन (RJD) की स्थिति बहुत मजबूत है। RJD उम्मीदवार सत्तानन्द सम्बुद्ध उर्फ ललन के पास मुस्लिम और यादव वोटों का अटूट आधार है, जिसे NDA के लिए तोड़ना बहुत मुश्किल होगा।

NDA के लिए एकमात्र उम्मीद यह है कि वे एक मजबूत उम्मीदवार उतारें, JDU और LJP(RV) का संयुक्त वोट बैंक पूरी तरह से एकजुट हो जाए, और 2024 लोकसभा चुनाव की 1,453 वोटों की बढ़त को बरकरार रखते हुए RJD के MY फैक्टर में सेंध लगा सकें। हालाँकि, पिछली बार के 14 हजार वोटों के अंतर को देखते हुए, RJD उम्मीदवार की जीत निश्चित प्रतीत होती है

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