बिहार के सिवान जिले की प्रमुख विधानसभा सीट सिवान (क्रमांक 105) 2025 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर राजनीतिक हलचल का केंद्र बनी हुई है। यह सीट सिवान लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा होने के साथ-साथ बिहार में उच्च राजनीतिक महत्व रखती है। सिवान विधानसभा क्षेत्र का इतिहास सुदृढ़ राजनीतिक सक्रियता और मतदाता संघर्ष का गवाह है, जहां हर चुनाव तेजी से संघर्षपूर्ण होता रहा है। 1951 के पहले विधानसभा चुनाव से लेकर अब तक यहां राजनीति के बड़े चेहरे सक्रिय रहे हैं, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच कड़ा टक्कर होती रही है ।
भौगोलिक परिचय और जनसांख्यिकी
सिवान विधानसभा क्षेत्र सिवान जिले के मुख्य क्षेत्र को कवर करता है। यह इलाका जहां बिहार के पश्चिमोत्तर छोर पर स्थित है, उत्तर प्रदेश की सीमा से लगा हुआ है। इसके भौगोलिक महत्व के साथ-साथ सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व भी बहुत गहरा है। दाहा नदी के किनारे बसे इस क्षेत्र की जनसंख्या में मुख्य रूप से हिंदू, मुस्लिम, यादव, ब्राह्मण, और अन्य पिछड़ी जातियां सम्मिलित हैं। कुल मतदाता संख्या लगभग 3,02,187 है, जिनमें महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से तुलनात्मक रूप से संतुलित है ।
ऐतिहासिक राजनीतिक पृष्ठभूमि
1951 से आज तक सिवान विधानसभा सीट स्थानीय राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रही है। शुरुआती वर्षों में कांग्रेस का दबदबा था, लेकिन समय के साथ राजद, भाजपा, वामपंथी पार्टियों और निर्दलीयों का प्रभाव भी उभरा।
| वर्ष | विजेता उम्मीदवार | दल | वोट शेयर | मतों का अंतर |
|---|---|---|---|---|
| 2020 | अवध बिहारी चौधरी | राजद | 45.30% | 1,973 |
| 2015 | व्यासदेव प्रसाद | भाजपा | 35% | 3,534 |
| 2010 | व्यासदेव प्रसाद | भाजपा | 44% | 12,541 |
| 2005 | भोलाजी सिंह | भाजपा | 29% | 4,319 |
| 2000 | भोलाजी सिंह | भाजपा | 42% | 8,350 |
| 1995 | राजेंद्र प्रसाद सिंह | सीपीएम | 40% | 13,097 |
| 1990 | बसुदेव सिंह | सीपीएम | 41% | 2,931 |
| 1985 | भोलाजी सिंह | कांग्रेस | 46% | 9,385 |
यह तालिका दर्शाती है कि सिवान में चुनावी प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव के बावजूद भाजपा और राजद का प्रभाव प्रमुख रहा है। वामपंथी पार्टियों ने भी कभी-कभी यहां मजबूत पकड़ बनाई है ।
प्रमुख राजनीतिक चेहरे और दल
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अवध बिहारी चौधरी (राजद): 2020 के विजेता, पूर्व विधानसभा स्पीकर और इस क्षेत्र के वरिष्ठ नेता। उनकी मजबूत जनपक्षधर छवि है।
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ओम प्रकाश यादव (भाजपा): 2020 के उपविजेता, भाजपा के प्रमुख नेता और क्षेत्र के प्रभावशाली संगठनकर्ता।
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व्यासदेव प्रसाद (भाजपा): पूर्व विधायक और जमीनी नेता, जिन्होंने क्षेत्र में भाजपा की पहुंच बढ़ाई।
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अवधविहारी यादव (राजद): यादव समाज से जुड़े राजनेता और महत्वपूर्ण मतदाता वर्ग का नेतृत्व करते हैं।
इनके अलावा, क्षेत्र में कुछ स्वतंत्र और छोटे दलों के उम्मीदवार भी उतार-चढ़ाव में भूमिका निभाते हैं, जिससे चुनावी परिदृश्य हमेशा गतिशील रहता है ।
जातीय एवं सामाजिक समीकरण
सिवान विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में जातीय विविधता इसकी राजनीति का मूल आधार है।
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मुस्लिम मतदाता: लगभग 22% की आबादी के साथ महागठबंधन के लिए महत्वपूर्ण।
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यादव समाज: करीब 14% मतदाता जो अन्य पिछड़ी जातियों के साथ मिलकर निर्णायक हैं।
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ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार: लगभग 20%, जो भाजपा और अन्य सवर्ण समर्थक दलों का मुख्य आधार हैं।
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दलित और पिछड़ा वर्ग: रणनीतिक वोट समूह में आते हैं, जिनका वोट शेयर लगभग 30% तक हो सकता है।
जातिगत संतुलन चुनाव परिणामों को प्रभावी ढंग से संचालित करता है और पार्टियां इसी आधार पर अपनी रणनीति बनाती हैं ।
चुनावी मुद्दे और जनभावना
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बेरोजगारी और पलायन:
यहां का बड़ा युवा वर्ग रोजगार की कमी के कारण पलायन कर रहा है। रोजगार सृजन स्थानीय चुनाव मुद्दा बना। -
कृषि संकट:
सिंचाई और फसल संरक्षण की समस्याएं किसानों के लिए चिंता का विषय हैं। -
सड़क, विद्युत, एवं स्वास्थ्य सेवाएं:
ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर सुधार की मांग। -
शिक्षा:
क्षेत्र में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए योजनाएं, लेकिन कार्यान्वयन में कमी। -
सामाजिक समरसता और सुरक्षा:
मुस्लिम और हिंदू समुदाय के बीच सामंजस्य कायम रखने की व्यापक जरूरत भी एक मुद्दा है ।
2025 के चुनावी परिदृश्य
2025 के विधानसभा चुनाव में सत्ता में वापसी के लिए दोनों बड़े दल राजद और भाजपा कड़ी रणनीति बना रहे हैं। राजद अवध बिहारी चौधरी के जनाधार को मजबूत करने के लिए काम कर रहा है, जबकि भाजपा ओम प्रकाश यादव को फिर से मैदान में उतार सकती है। चुनावी प्रचार में विकास के साथ-साथ जाति और धर्म की राजनीति भी प्रमुख होगी।
चुनाव आयोग ने सिवान सीट की मतगणना 14 नवंबर 2025 को घोषित करने का कार्यक्रम रखा है। 2025 का यह चुनाव संभावित रूप से बिहार की सबसे कड़ी टक्कर में से एक माना जा रहा है ।
निष्कर्ष
सिवान विधानसभा सीट बिहार की राजनीति का बिंदु है, जहां जातिगत संवेदनशीलता, विकास के मुद्दे और नेतृत्व की क्षमता चुनाव परिणाम तय करती है। 2025 के चुनाव में भी यहां मัตदाताओं के फैसले से बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। यहां का चुनाव केवल एक सीट जीतने का मामला नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकतों का जनविरोध और समर्थन के बीच युद्ध है जो पूरे प्रदेश के लिए संकेत देगा कि जनता किस दिशा में बढ़ रही है ।
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