सीवान सदर विधानसभा सीट बिहार की सबसे प्रतिष्ठित और कांटे के मुकाबले वाली सीटों में से एक है। यह सीट वर्तमान में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के पास है, और निवर्तमान विधायक अवध बिहारी चौधरी (जो पूर्व विधानसभा अध्यक्ष भी रह चुके हैं) हैं। यह सीट यादव, मुस्लिम और भूमिहार मतदाताओं के प्रभाव के लिए जानी जाती है, और यहाँ का मुकाबला हमेशा बेहद करीबी रहा है।
जीत की संभावना (पूर्वानुमान)
2020 में RJD की 1,973 वोटों की मामूली बढ़त के कारण यह सीट हमेशा अनिश्चितता से भरी रहती है।1 हालांकि, RJD/महागठबंधन को अपने मजबूत जातीय समीकरण (M-Y) के कारण थोड़ा अग्रणी माना जा सकता है। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में NDA की बड़ी बढ़त इस सीट पर एक बड़ा पलटवार कर सकती है। यह मुकाबला ‘अत्यधिक कांटेदार’ होगा।
विजेता उम्मीदवार के जीतने के मुख्य कारण और विश्लेषण (अवध बिहारी चौधरी – RJD/महागठबंधन)
| तथ्य एवं सांख्यिकी | विश्लेषण एवं कारण |
| मजबूत जातीय आधार (M-Y) | सीवान सदर में सबसे अधिक मुस्लिम और यादव मतदाता हैं। RJD के वरिष्ठ नेता अवध बिहारी चौधरी (यादव) को इस मुस्लिम-यादव समीकरण का पूर्ण लाभ मिलता है, जो जीत का सबसे बड़ा आधार है। सीवान में ‘शहाबुद्दीन प्रभाव’ भी इस आधार को और मजबूत करता है। |
| 2020 की करीबी जीत | अवध बिहारी चौधरी ने 2020 में भाजपा के ओम प्रकाश यादव को 1,973 वोटों के बेहद कम अंतर से हराया था। यह जीत दर्शाती है कि M-Y आधार एकजुट रहने पर महागठबंधन को मामूली बढ़त हासिल होती है। |
| व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और अनुभव | अवध बिहारी चौधरी 1985 से 2005 तक लगातार विधायक रहे और बाद में विधानसभा अध्यक्ष भी बने। उनकी लंबी राजनीतिक पारी और स्थानीय पकड़ महागठबंधन के पक्ष में एक मजबूत व्यक्तिगत जनाधार बनाती है। |
| NDA वोटों का संभावित बिखराव | यदि NDA (BJP+JDU) गठबंधन में सीट-बंटवारा सही नहीं हुआ या किसी भी दल ने अपने उम्मीदवार को लेकर कोई गलती की, तो इसका सीधा लाभ RJD को मिलेगा। इसके अलावा, AIMIM जैसे छोटे दलों की मौजूदगी मुस्लिम वोटों में बिखराव कर NDA के लिए भी खतरा पैदा कर सकती है। |
अन्य उम्मीदवार के न जीतने के प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी (NDA उम्मीदवार – संभावित BJP)
| प्रतिकूल तथ्य एवं सांख्यिकी | विश्लेषण एवं कारण |
| 2024 लोकसभा चुनाव की लीड (NDA) | 2024 के लोकसभा चुनाव में, NDA (JDU) को सीवान विधानसभा क्षेत्र में RJD पर 9,548 वोटों की बड़ी लीड मिली थी। यह सबसे बड़ा प्रतिकूल तथ्य है, जो दिखाता है कि विधानसभा चुनाव में NDA को अपने पारंपरिक वोट बैंक (उच्च जातियां, वैश्य, और अन्य) को एकजुट करने में सफलता मिली तो परिणाम पलट सकता है। |
| भाजपा का मजबूत प्रदर्शन इतिहास | 2020 से पहले, भाजपा के व्यास देव प्रसाद ने 2005 से 2015 तक लगातार तीन बार इस सीट पर जीत दर्ज की थी। भाजपा यहाँ मजबूत रही है और उसका पारंपरिक कोर वोट बैंक (उच्च जातियाँ, वैश्य) सीट पर एक निर्णायक फैक्टर है। |
| करीबी जीत का दबाव (एंटी-इंकम्बेंसी) | 2020 में RJD की जीत का अंतर 1.20% था, जो बहुत कम है। यह विधायक के प्रति किसी भी छोटी एंटी-इंकम्बेंसी (सत्ता विरोधी लहर) को NDA के पक्ष में आसानी से बदल सकता है। |
| वोटिंग प्रतिशत की संवेदनशीलता | सीवान में मतदान प्रतिशत आम तौर पर 54% से 57% के बीच रहता है। मतदान प्रतिशत में कोई भी महत्वपूर्ण बदलाव (विशेषकर यदि उच्च जातियों और अति-पिछड़ों का मतदान बढ़ा) NDA के लिए फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि महागठबंधन का कोर वोटर (M-Y) लगभग स्थिर रहता है। |
निष्कर्ष:
सीवान सदर सीट पर NDA (BJP) और महागठबंधन (RJD) के बीच कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। जहाँ RJD के अवध बिहारी चौधरी को अपने मजबूत यादव-मुस्लिम आधार का लाभ मिलेगा, वहीं NDA 2024 के लोकसभा चुनाव की बढ़त और अपने कोर वोटर (भूमिहार, वैश्य, उच्च जातियाँ) की मजबूत पकड़ के दम पर वापसी की पुरजोर कोशिश करेगी।
इस सीट का विजेता अंततः इस बात पर निर्भर करेगा कि शहाबुद्दीन परिवार का प्रभाव मुस्लिम वोटों को कितना एकजुट रख पाता है, और क्या NDA 2024 के लोकसभा चुनाव की सफलता को विधानसभा चुनाव में दोहरा पाती है। यह बिहार के 2025 के सबसे रोमांचक और अनिश्चित मुकाबलों में से एक होगा।
(अस्वीकरण: यह विश्लेषण मौजूदा राजनीतिक डेटा, जातीय समीकरणों और पिछले चुनावों के रुझानों पर आधारित एक अनुमान है। अंतिम परिणाम चुनावी दिन के मतदान, उम्मीदवारों की लोकप्रियता और गठबंधन की रणनीति पर निर्भर करेगा।)
