परिणाम की भविष्यवाणी:
सुगौली विधानसभा सीट (पूर्वी चंपारण) पर महागठबंधन के लिए गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। $2020$ में यह सीट राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने बहुत कम अंतर (3,447 वोट) से जीती थी।2
वर्तमान परिस्थितियों और ताजा घटनाक्रम (RJD विधायक/VIP उम्मीदवार का नामांकन रद्द) को देखते हुए, NDA गठबंधन के उम्मीदवार, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राजेश कुमार उर्फ बब्लू गुप्ता की जीत की प्रबल संभावना है।
उनका मुख्य मुकाबला अब महागठबंधन के किसी नए उम्मीदवार (यदि घोषित होता है) या वीआईपी के पूर्व उम्मीदवार मनोज सहनी (जो बाद में मैदान में आए) या जन सुराज जैसे किसी प्रमुख निर्दलीय से होगा।
I. एनडीए (लोजपा-रा.) के राजेश कुमार (बब्लू गुप्ता) की जीत के पक्ष में विश्लेषण (अनुकूल तथ्य)
राजेश कुमार (बब्लू गुप्ता) (LJP-R) की जीत की संभावना को मजबूती देने वाले प्रमुख विश्लेषणात्मक कारक निम्नलिखित हैं:
1. महागठबंधन को सबसे बड़ा झटका (नामांकन रद्द)
- समीकरण में अचानक बदलाव: रिपोर्ट्स के अनुसार, महागठबंधन के प्रमुख उम्मीदवार (RJD विधायक/VIP उम्मीदवार) शशि भूषण सिंह का नामांकन रद्द हो गया है। यह घटनाक्रम महागठबंधन के लिए सबसे बड़ा झटका है।
- वोट ट्रांसफर में देरी: मौजूदा विधायक के अचानक बाहर होने से महागठबंधन को रातों-रात एक मजबूत, नया उम्मीदवार ढूंढना पड़ा है। इससे वोटरों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हुई है और नए उम्मीदवार को महागठबंधन के M-Y (मुस्लिम-यादव) और अन्य कोर वोट को समय पर एकजुट करने में कठिनाई होगी।
2. एनडीए का मजबूत गठबंधन और आधार वोट
- चिराग पासवान फैक्टर: लोजपा (रामविलास) का उम्मीदवार होने के नाते, राजेश कुमार को एनडीए के मजबूत कोर वोट ($BJP + JDU$ का पारंपरिक वोट) के साथ-साथ चिराग पासवान के नेतृत्व वाले पासवान वोटों का पूरा समर्थन मिलेगा, जो इस सीट पर निर्णायक साबित हो सकता है।
- गुप्ता समुदाय का समर्थन: बबलू गुप्ता स्वयं जिस समुदाय से आते हैं, उस वैश्य (गुप्ता) समुदाय का एक बड़ा हिस्सा बीजेपी गठबंधन का पारंपरिक वोट बैंक रहा है।
3. वोटों का विभाजन (रामचंद्र सहनी का प्रभाव)
- अति पिछड़ा वर्ग का विभाजन: 3$2020$ में 4$VIP$ के रामचंद्र सहनी (जो सहनी/मल्लाह समुदाय से आते हैं) दूसरे स्थान पर रहे थे।5 यदि वह या उनकी पार्टी (VIP) अब महागठबंधन में रहते हुए, सहनी समुदाय के मनोज सहनी को मैदान में उतारती है, तो सहनी वोटों का एक बड़ा हिस्सा वीआईपी/महागठबंधन को मिलेगा, जिससे $2020$ का अंतर बहुत कम रहा था। हालाँकि, नामांकन रद्द होने के बाद, एनडीए को उम्मीद है कि सहानुभूति वोट उन्हें मिल सकता है, खासकर यदि VIP के लिए सहनी समुदाय के वोट $100\%$ एकजुट न हुए।
4. पिछले प्रदर्शन में भाजपा की मज़बूती
- 2015 की जीत (बीजेपी): 6$2015$ में भी रामचंद्र सहनी बीजेपी के टिकट पर जीते थे, जो यह दर्शाता है कि यह सीट बीजेपी गठबंधन के लिए जीताऊ सीट है, भले ही उम्मीदवार कोई भी हो।7 $2024$ के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने सुगौली विधानसभा क्षेत्र में 8$32,390$ वोटों की बढ़त बनाई थी।9
II. महागठबंधन की हार के विपक्ष में विश्लेषण (प्रतिकूल तथ्य)
महागठबंधन (RJD/VIP) की जीत की संभावनाओं को कम करने वाले मुख्य कारक इस प्रकार हैं:
1. विधायक/वीआईपी उम्मीदवार का नामांकन रद्द होना
- राजनीतिक शून्य: वर्तमान विधायक/वीआईपी उम्मीदवार शशि भूषण सिंह का नामांकन रद्द होना महागठबंधन के लिए सबसे बड़ा नकारात्मक कारक है। इससे आखिरी समय में संगठन और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर बुरा असर पड़ेगा।
- भविष्य की अनिश्चितता: अगर महागठबंधन को नया उम्मीदवार उतारना पड़ा है, तो उसे अपनी राजनीतिक पूंजी और समय, वोटरों के बीच एक नया चेहरा स्थापित करने में लगाना पड़ेगा।
2. एंटी-इनकम्बेंसी का सामना
- कम जीत का अंतर: 10$2020$ में RJD के शशि भूषण सिंह ने मात्र 11$2.00\%$ (12$3,447$ वोट) के मामूली अंतर से जीत हासिल की थी।13 यह इंगित करता है कि महागठबंधन की जीत का आधार बहुत मजबूत नहीं था और विधायक के प्रति असंतोष (विकास कार्यों पर सवाल) मौजूद था।
- विकास की कमी के आरोप: ग्रामीणों की राय के अनुसार, विधायक की कार्यशैली (फोन न उठाना, वादे पूरे न करना) पर सवाल उठे थे, जिससे उनके खिलाफ स्थानीय स्तर पर एंटी-इनकम्बेंसी मौजूद थी।
3. जातीय समीकरणों का जटिल गणित
- सहनी समुदाय का विरोधाभास: सहनी (अति पिछड़ा वर्ग) समुदाय का बड़ा वोट बैंक $2020$ में $VIP$ (तब NDA से बाहर) के साथ गया था। अब $VIP$ महागठबंधन का हिस्सा है। यदि $VIP$ से मनोज सहनी उम्मीदवार हैं, तो सहनी वोट तो मिलेंगे, लेकिन गैर-यादव OBC/EBC वोटों पर लोजपा-आर और $VIP$ के बीच गहरा विभाजन होगा, जिसका सीधा फायदा बीजेपी के गठबंधन को मिलेगा।
- LJP(R) का $OBC$ वोटों में सेंध: चिराग पासवान की LJP(R) का $OBC$ और युवा वोटों पर बढ़ता प्रभाव महागठबंधन के लिए $RJD$ के M-Y आधार से बाहर के वोटों को जुटाना मुश्किल कर देगा।
निष्कर्ष: सुगौली की सीट $2020$ में महागठबंधन ने बहुत कठिन लड़ाई के बाद जीती थी। $2025$ में, विधायक (शशि भूषण सिंह) का नामांकन रद्द होने के कारण महागठबंधन को रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक दोनों तरह से बड़ा नुकसान हुआ है। एनडीए, विशेष रूप से लोजपा (रा.) के राजेश कुमार उर्फ बब्लू गुप्ता, को इस राजनीतिक शून्य का सीधा लाभ मिलने की संभावना है। NDA इस सीट को महागठबंधन से छीन सकता है। मुकाबला $NDA$ उम्मीदवार और $VIP$ के मनोज सहनी (महागठबंधन से) के बीच केंद्रित होगा, जिसमें $NDA$ को बढ़त मिलने की उम्मीद है।