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सुरसंड का सियासी संग्राम: क्या JDU अपनी ‘अगुआई’ कायम रखेगी या RJD के ‘MY’ फैक्टर से पलटेगी बाज़ी?

सुरसंड विधानसभा (सीट क्रम संख्या 26) बिहार के सीतामढ़ी जिले की एक महत्वपूर्ण ग्रामीण और कृषि प्रधान सीट है, जो भारत-नेपाल सीमा के निकट स्थित है। यह सीट दशकों तक कांग्रेस का गढ़ रही, लेकिन अब JDU और RJD के बीच सीधा और कड़ा मुकाबला देखने को मिलता है।1

प्रमुख दावेदार और पिछला परिणाम (2020):

उम्मीदवार पार्टी प्राप्त वोट जीत का अंतर
दिलीप राय (विजेता) JDU (NDA) 67,193 8,876 वोट
सैयद अबु दोजाना (उपविजेता) RJD (महागठबंधन) 58,317

दिलीप राय/NDA (JDU) की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण

अनुकूल तथ्य/विश्लेषण विवरण
2020 की निर्णायक जीत 2020 में JDU के दिलीप राय ने RJD के मजबूत उम्मीदवार सैयद अबु दोजाना को 8,876 वोटों (5.20% अंतर) के अंतर से हराया था। यह अंतर दर्शाता है कि NDA के पक्ष में एक मजबूत वोट ट्रांसफर हुआ था।
NDA का मजबूत अतिपिछड़ा/सवर्ण आधार सुरसंड में अतिपिछड़ा, सवर्ण (ब्राह्मण, राजपूत) और गैर-यादव ओबीसी मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा NDA के समर्थन में गोलबंद होता है। यह गठबंधन ‘M-Y’ (मुस्लिम-यादव) के मुकाबले ‘L-K’ (लव-कुश) + अतिपिछड़ा + सवर्ण समीकरण पर निर्भर करता है।
विधायक का स्थानीय विकास कार्य विधायक दिलीप राय ने पुल-पुलिया निर्माण, सड़कों के सुधार और सरकारी योजनाओं को ज़मीन पर उतारने का प्रयास किया है, जिसका लाभ उन्हें सत्ता समर्थक लहर (Pro-Incumbency) के रूप में मिल सकता है।
JDU का ऐतिहासिक प्रभाव कांग्रेस के पतन के बाद से इस सीट पर JDU और RJD बारी-बारी से जीतते रहे हैं। JDU ने 2010 और 2020 में जीत हासिल की है, जो इस क्षेत्र में पार्टी के प्रभाव को दिखाता है।
वोटों का विभाजन (त्रिकोणीय संघर्ष) 2020 में LJP (R) के उम्मीदवार ने 20,281 वोट पाकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया था, जिससे सीधे मुकाबले में NDA को फायदा हुआ था। 2025 में भी यदि कोई अन्य दल RJD के आधार में सेंध लगाता है, तो JDU की राह आसान होगी।

सैयद अबु दोजाना/महागठबंधन (RJD) की जीत की राह और JDU उम्मीदवार की हार के संभावित प्रतिकूल तथ्य

प्रतिकूल तथ्य/विश्लेषण (JDU की हार के संभावित कारण) विवरण
M-Y (मुस्लिम-यादव) वोट बैंक का वर्चस्व सुरसंड विधानसभा में मुस्लिम (लगभग 22.40%) और यादव मतदाताओं की संख्या बहुत अधिक है। यदि महागठबंधन M-Y समीकरण को पूरी तरह से एकजुट करने में सफल रहता है, तो यह JDU की जीत के अंतर को पाट सकता है।
सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) यह क्षेत्र बाढ़-प्रवण है और यहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं (अनुमंडलीय अस्पताल का अधूरा रहना), बिजली की कमी और उच्च शिक्षा संस्थानों की कमी जैसे गंभीर स्थानीय मुद्दे हैं। इन समस्याओं के कारण विधायक के प्रति सत्ता विरोधी लहर प्रबल हो सकती है।
RJD उम्मीदवार की मज़बूत पकड़ RJD के सैयद अबु दोजाना (2015 के विजेता और 2020 के उपविजेता) एक मजबूत और अनुभवी उम्मीदवार हैं, जिनकी स्थानीय स्तर पर अच्छी पहचान है। उनके व्यक्तिगत प्रभाव से मुस्लिम और यादव वोटों के अलावा अन्य समुदायों के वोटों में भी सेंध लगाई जा सकती है।
पलायन और बेरोजगारी यह एक कृषि-प्रधान क्षेत्र है जहाँ सीमित रोजगार अवसरों के कारण युवाओं का बड़े पैमाने पर पलायन होता है। महागठबंधन रोजगार और पलायन के मुद्दे को उठाकर युवाओं के वोटों को अपनी ओर खींच सकता है।

निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):

सुरसंड विधानसभा सीट 2025 में भी NDA (JDU) और महागठबंधन (RJD) के बीच कड़े संघर्ष वाली सीट बनी रहेगी।

NDA के पास अपनी पिछली जीत का अंतर, संगठनात्मक ताकत और मजबूत सामाजिक समीकरण (अतिपिछड़ा, सवर्ण) की शक्ति है। वहीं, महागठबंधन के पास M-Y समीकरण की संख्यात्मक शक्ति और स्थानीय समस्याओं पर आधारित सत्ता विरोधी लहर को भुनाने का मौका है।

वर्तमान राजनीतिक विश्लेषण के आधार पर, यह सीट NDA के लिए अपनी पकड़ बनाए रखना एक कड़ी चुनौती होगी। यदि महागठबंधन M-Y और कुछ दलित/अतिपिछड़ा वोटों को अपनी ओर खींच लेता है, तो परिणाम उनके पक्ष में भी जा सकता है। हालाँकि, NDA/JDU के पास पिछली बार की जीत का जो मजबूत मार्जिन था, वह उन्हें इस मुकाबले में मामूली बढ़त दिलाता है।

संभावित विजेता: इस सीट पर JDU की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, लेकिन RJD के सैयद अबु दोजाना अपनी ज़ोरदार वापसी के लिए हर दांव लगाएंगे, जिससे यह एक अत्यंत कांटे की टक्कर की सीट है।

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