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सूर्यगढ़ा का सियासी संग्राम 2025: प्रहलाद यादव के बिना RJD की चुनौती बनाम NDA के बिखराव का खेल

 

1️⃣ प्रमुख उम्मीदवार और मुकाबला

गठबंधन/पार्टी उम्मीदवार (संभावित) स्थिति और पृष्ठभूमि
महागठबंधन (RJD) (नया उम्मीदवार, क्योंकि प्रहलाद यादव चुनाव मैदान से बाहर हैं) RJD की जीत अब ‘MY’ समीकरण और तेजस्वी लहर पर निर्भर करेगी।
NDA (JDU/BJP) रामानंद मंडल (JDU) या प्रेम रंजन पटेल (BJP) NDA में यह सीट किस पार्टी को जाएगी, इस पर खींचतान है। 2020 में JDU के रामानंद मंडल उपविजेता रहे थे।
निर्दलीय/अन्य रविशंकर प्रसाद सिंह उर्फ अशोक सिंह (भूमिहार नेता) 2020 में LJP से लड़कर 44,797 वोट लाए थे। इस बार निर्दलीय मैदान में होने से भूमिहार वोटों का बड़ा हिस्सा काट सकते हैं।
अन्य अमित सागर (जनसुराज) कुर्मी समुदाय से आते हैं, जिससे NDA के पारंपरिक कुर्मी-धानुक वोटों में सेंधमारी हो सकती है।

2️⃣ 🏆 NDA उम्मीदवार (संभावित) की जीत के कारण (अनुकूल तथ्य)

चूंकि RJD के दिग्गज नेता प्रहलाद यादव इस बार मैदान से बाहर हैं, इसलिए NDA को इस सीट पर जीत का सबसे बड़ा मौका दिख रहा है।


3️⃣ ❌ महागठबंधन (RJD) उम्मीदवार की हार के कारण (प्रतिकूल तथ्य)

RJD के लिए इस सीट को बरकरार रखना बहुत मुश्किल साबित हो सकता है।


4️⃣ निर्णायक फैक्टर: वोट का बिखराव

सूर्यगढ़ा का परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि निर्दलीय/अन्य उम्मीदवार (अशोक सिंह और अमित सागर) किसका वोट बैंक काटते हैं।

निष्कर्ष: प्रहलाद यादव की अनुपस्थिति RJD के लिए एक बड़ा झटका है, जबकि NDA में भी टिकट को लेकर खींचतान है। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक रुझानों और RJD के खिलाफ स्थानीय एंटी-इनकम्बेंसी को देखते हुए, NDA (संभावित JDU या BJP उम्मीदवार) के लिए यह सीट जीतना आसान हो सकता है, बशर्ते वे अपने बागी वोटों को नियंत्रित कर लें।

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