सोनपुर विधानसभा सीट (संख्या 122) बिहार के सारण जिले में आती है और इसका ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्व है। यह सीट कभी लालू प्रसाद यादव की पहली कर्मभूमि रही है और इसे राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का गढ़ माना जाता है। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यहां कड़ी टक्कर दी है। 2025 का चुनाव मुख्य रूप से डॉ. रामानुज प्रसाद (RJD) और विनय कुमार सिंह (BJP) के बीच का पारंपरिक मुकाबला ही होगा, जहां जातीय समीकरण और स्थानीय उम्मीदवार की छवि निर्णायक साबित होगी।

यहां 2025 के चुनाव परिणाम का विश्लेषण और प्रमुख उम्मीदवार की जीत के कारणों का विस्तृत विवरण दिया गया है।


संभावित विजेता: डॉ. रामानुज प्रसाद (राष्ट्रीय जनता दल – RJD) / महागठबंधन

(यह भविष्यवाणी RJD के मजबूत M-Y (मुस्लिम-यादव) समीकरण, डॉ. रामानुज प्रसाद की लगातार जीत की प्रवृत्ति, और BJP उम्मीदवार के प्रति एंटी-इनकम्बेंसी के आधार पर की गई है।)

जीत के मुख्य कारण और विश्लेषण (फेवर में जाने वाले तथ्य)

तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
M-Y समीकरण का मजबूत आधार सोनपुर लालू प्रसाद यादव का गृह क्षेत्र रहा है। यहां यादव समुदाय और मुस्लिम समुदाय का मजबूत गठबंधन RJD के लिए निर्णायक है। RJD के डॉ. रामानुज प्रसाद को 2020 में 43.11% वोट मिले, जो मुख्य रूप से इस M-Y बेस से आते हैं।
लगातार जीत की प्रवृत्ति (एंटी-विनय फैक्टर) डॉ. रामानुज प्रसाद ने लगातार दो बार (2015 और 2020) BJP के मजबूत उम्मीदवार विनय कुमार सिंह को हराया है। 2020 में जीत का अंतर 6,686 वोट था। लगातार हार के कारण BJP उम्मीदवार विनय सिंह के खिलाफ एंटी-इनकम्बेंसी (या कह सकते हैं एंटी-कैंडिडेट) की भावना मजबूत है, जो RJD को सीधा लाभ देगी।
यादव वोटों की एकजुटता परसा के विपरीत, सोनपुर में RJD को यादवों का मजबूत समर्थन मिलता रहा है। डॉ. रामानुज प्रसाद एक अनुभवी यादव नेता हैं, जो इस कोर वोट बैंक को एकजुट रखने में सफल रहे हैं।
स्थानीय मुद्दों पर पकड़ सोनपुर का बड़ा इलाका बाढ़ प्रभावित रहता है। स्थानीय लोगों के बीच मौजूदा विधायक की पहुंच और राहत कार्यों में भागीदारी (भले ही सीमित हो) उनकी छवि को बचाती है, जबकि विपक्षी दल (BJP) के नेता की गैर-मौजूदगी एक बड़ा मुद्दा है।

अन्य उम्मीदवार (विनय कुमार सिंह/BJP/NDA) के न जीतने के प्रतिकूल तथ्य

प्रतिकूल तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
विनय सिंह के खिलाफ मजबूत एंटी-इनकम्बेंसी 2015 और 2020 में लगातार हार के बावजूद, यदि BJP विनय सिंह को ही टिकट देती है, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान होगा। स्थानीय मतदाताओं का एक वर्ग खुले तौर पर कहता है कि “प्रत्याशी सही नहीं है” और “काम नहीं किए”। यह एंटी-कैंडिडेट भावना RJD को एक आसान जीत दिला सकती है।
जीत का मार्जिन लगातार कम होना 2020 में BJP का वोट शेयर 39.18% था, जबकि RJD का 43.11%। BJP को यह मार्जिन पाटने के लिए अपने कोर वोट बैंक (ब्राह्मण, राजपूत, गैर-यादव OBC) को पूरी तरह से एकजुट करना होगा, जिसमें विनय सिंह की व्यक्तिगत छवि बाधा बन सकती है।
नए उम्मीदवार को मौका न देना यदि BJP किसी नए और मजबूत गैर-यादव चेहरे (जैसे ओम कुमार सिंह या किसी अन्य राजपूत/भूमिहार नेता) को मौका नहीं देती है, तो RJD के जातीय समीकरण को भेदना लगभग असंभव होगा। सोनपुर की जनता में उम्मीदवार बदलने की मांग मजबूत है, जिसे अनदेखा करना BJP की हार का मुख्य कारण बनेगा।
विकास के बड़े मुद्दों पर फोकस का अभाव सोनपुर में रोजगार सृजन (इंडस्ट्रियल एरिया की मांग), बाढ़ नियंत्रण और बुनियादी ढांचे की कमी बड़े मुद्दे हैं। इन समस्याओं के प्रति NDA उम्मीदवार की पिछली उदासीनता (स्थानीय लोगों के अनुसार) उन्हें वोटर्स से दूर कर सकती है।

निष्कर्ष:

सोनपुर विधानसभा सीट पर महागठबंधन (RJD) की पकड़ मजबूत बनी हुई है।

  • डॉ. रामानुज प्रसाद (RJD) की जीत की संभावना अधिक है, क्योंकि उनके पास लालू परिवार का मजबूत मुस्लिम-यादव (M-Y) वोट बैंक है, और वह लगातार दो बार जीत चुके हैं।
  • NDA (BJP) की जीत केवल तभी संभव है जब वह विनय कुमार सिंह को बदलकर किसी नए और स्वच्छ छवि वाले सवर्ण उम्मीदवार को मैदान में उतारे और NDA का पूरा गैर-यादव/गैर-मुस्लिम वोट बैंक एकजुट होकर मतदान करे। मौजूदा परिस्थितियों में, RJD की हैट्रिक लगने की संभावना अधिक है।

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