1️⃣ प्रमुख उम्मीदवार और मुकाबला
| गठबंधन/पार्टी | संभावित उम्मीदवार | स्थिति और पृष्ठभूमि |
| NDA (JD(U)) | हरि नारायण सिंह (वर्तमान विधायक) या नया चेहरा (टिकट कटने की चर्चाएँ) | लगातार 3 बार (2010, 2015, 2020) जीत चुके हैं। मजबूत कुर्मी समुदाय से आते हैं। मुख्यमंत्री के नजदीकी होने के कारण जीत की गारंटी। |
| महागठबंधन (RJD/अन्य) | मजबूत यादव/भूमिहार चेहरा (RJD इस सीट पर कभी नहीं जीती) | RJD इस अभेद्य किले को भेदने के लिए इस बार कोई बड़ा दांव खेल सकती है। 2020 में LJP (तब NDA से अलग) दूसरे स्थान पर थी। |
2️⃣ 🏆 JD(U)/NDA की जीत के कारण (अनुकूल तथ्य)
NDA (JD(U)) के पक्ष में हरि नारायण सिंह या उनके उत्तराधिकारी की जीत के निम्नलिखित निर्णायक कारक हैं:
- मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र फैक्टर (नीतीश फैक्टर): हरनौत सीधे तौर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रतिष्ठा से जुड़ी हुई है। यह उनकी पैतृक कर्मभूमि है, और यहाँ के मतदाता स्थानीय उम्मीदवार से नाराजगी होने के बावजूद नीतीश कुमार के सम्मान के लिए JD(U) को वोट देते आए हैं।
- अभेद्य गढ़ की विरासत: 1990 के दशक से लेकर अब तक यह सीट JD(U) (और पहले समता पार्टी) के पास रही है। कांग्रेस, RJD या LJP यहाँ कभी नहीं जीत पाई है। यह चुनावी रिकॉर्ड JD(U) के पक्ष में एक मजबूत मनोवैज्ञानिक बढ़त देता है।
- कुर्मी-EBC-दलित समीकरण: हरनौत सीट पर कुर्मी मतदाताओं की अच्छी संख्या है, जो JD(U) का कोर वोट बैंक है। इसके साथ ही, अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और दलितों का एक बड़ा हिस्सा (नीतीश कुमार के ‘न्याय के साथ विकास’ के कारण) JD(U) के साथ मजबूती से खड़ा रहता है।
- विकास कार्य: हरनौत क्षेत्र में नीतीश कुमार के कार्यकाल में हुए बुनियादी विकास कार्य (सड़क, बिजली, रेलवे वर्कशॉप की उपस्थिति) भी JD(U) के पक्ष में माहौल बनाते हैं।
- NDA की एकजुटता: 2020 में LJP के अलग लड़ने के बावजूद JD(U) ने बड़ी जीत दर्ज की थी। 2025 में NDA के एकजुट होने से (जिसमें LJP भी शामिल है) JD(U) को पासवान वोटों का भी लाभ मिलेगा, जिससे जीत का अंतर और बढ़ सकता है।
3️⃣ ❌ महागठबंधन (RJD) की हार के कारण (प्रतिकूल तथ्य)
महागठबंधन (RJD) के लिए इस सीट पर जीत हासिल करना लगभग असंभव है, क्योंकि:
- RJD का ऐतिहासिक शून्य रिकॉर्ड: हरनौत में RJD का जीरो जीत का रिकॉर्ड है। उनके पास इस क्षेत्र में कोई मजबूत स्थानीय संगठनात्मक आधार और स्थापित नेता नहीं है जो JD(U) के गढ़ को भेद सके।
- यादव-मुस्लिम वोट बैंक का अपर्याप्त होना: RJD का पारंपरिक माई (MY) समीकरण (मुस्लिम-यादव) इस सीट पर जीत के लिए पर्याप्त नहीं है। जीत के लिए उन्हें कुर्मी, EBC और सवर्ण वोटों में बड़ी सेंध लगानी होगी, जो इस क्षेत्र में बहुत मुश्किल है।
- सशक्त उम्मीदवार की कमी: RJD को इस सीट को भेदने के लिए कुर्मी या सवर्ण वर्ग से किसी प्रभावशाली उम्मीदवार की आवश्यकता होगी, लेकिन पार्टी के पास ऐसा दमदार चेहरा खोजना एक बड़ी चुनौती है।
- NDA का बड़ा जनादेश: लोकसभा चुनावों में भी JD(U) ने हरनौत विधानसभा क्षेत्र से बड़ी बढ़त (2024 में 31 हजार से अधिक) हासिल की थी, जो दिखाता है कि यहाँ NDA के पक्ष में एक स्थिर और बड़ा जनादेश मौजूद है।
4️⃣ निर्णायक फैक्टर: विधायक के प्रति एंटी-इनकम्बेंसी
- वर्तमान विधायक (हरि नारायण सिंह) के प्रति नाराजगी: यदि वर्तमान विधायक (हरि नारायण सिंह) के खिलाफ स्थानीय स्तर पर मजबूत एंटी-इनकम्बेंसी है और पार्टी उनका टिकट काटती है, तो नए उम्मीदवार को टिकट मिलने पर भी JD(U) का नीतीश फैक्टर भारी पड़ सकता है। हालांकि, यदि टिकट नहीं कटता है, तो भी नीतीश फैक्टर उन्हें बचा सकता है, जैसा कि पिछली बार 27,000 से अधिक वोटों के अंतर से हुआ था।
निष्कर्ष:
हरनौत सीट NDA (JD(U)) का सबसे बड़ा गढ़ है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रभाव क्षेत्र में आता है। यहाँ जातीय समीकरण, विकास के मुद्दे और ऐतिहासिक जनादेश सभी JD(U) के पक्ष में हैं।
इसलिए, बिहार चुनाव 2025 में हरनौत सीट पर एक बार फिर NDA (JD(U)) के उम्मीदवार की आसान जीत की संभावनाएँ प्रबल हैं।
