परिणाम की भविष्यवाणी:

हरसिद्धि विधानसभा सीट (सुरक्षित, पूर्वी चंपारण) एक ऐसी सीट रही है जहाँ ‘हर पांच साल में विधायक बदलने’ का एक मज़बूत ट्रेंड रहा है। हालांकि, वर्तमान विधायक और गन्ना एवं उद्योग मंत्री कृष्णनंदन पासवान (BJP) की सीट पर मज़बूत पकड़ है।

गहन विश्लेषण के आधार पर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कृष्णनंदन पासवान की जीत की संभावना अधिक है। NDA की एकजुटता और कृष्णनंदन पासवान के मंत्री पद पर रहते हुए किए गए विकास कार्यों के कारण उन्हें अपने प्रतिद्वंद्वी पर बढ़त मिल सकती है।


I. बीजेपी (BJP) के कृष्णनंदन पासवान की जीत के पक्ष में विश्लेषण (अनुकूल तथ्य)

कृष्णनंदन पासवान (BJP) की जीत को मज़बूती देने वाले प्रमुख विश्लेषणात्मक कारक निम्नलिखित हैं:

1. संगठनात्मक शक्ति और NDA का कोर वोट बैंक

  • NDA का समीकरण: यह सीट पारंपरिक रूप से $BJP$ के लिए एक मजबूत गढ़ रही है। $NDA$ का कोर वोट बैंक (सवर्ण, वैश्य, और अति पिछड़ा वर्ग) इस सीट पर निर्णायक भूमिका निभाता है।
  • पासवान-दलित वोट का ध्रुवीकरण: $BJP$ उम्मीदवार स्वयं पासवान समुदाय से आते हैं, जो दलित समुदाय के भीतर एक प्रमुख जाति है। $BJP$ की केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के कारण दलित वोटों का एक बड़ा हिस्सा उनके पक्ष में ध्रुवीकृत हो सकता है।
  • $2020$ की जीत का मार्जिन: 1$2020$ के चुनाव में उन्होंने 2$RJD$ उम्मीदवार कुमार नागेंद्र बिहारी को 3$15,685$ वोटों (लगभग 4$9.40\%$ के अंतर) से हराया था, जो यह दर्शाता है कि 5$NDA$ की संगठनात्मक शक्ति काम करती है।6

2. मंत्री पद और विकास कार्य का लाभ

  • सरकारी लाभ: कृष्णनंदन पासवान वर्तमान में गन्ना एवं उद्योग विभाग के मंत्री हैं।7 मंत्री रहते हुए उन्होंने क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछाने, घर-घर बिजली और पानी पहुंचाने जैसे आधारभूत संरचना के विकास का दावा किया है। मंत्री का पद उन्हें प्रशासनिक पहुँच और संसाधनों के उपयोग में बढ़त दिलाता है, जिसका सीधा लाभ उन्हें चुनाव में मिलेगा।
  • स्थापित चेहरा: वह 8$2010$ और 9$2020$ में दो बार इस सीट से जीत चुके हैं, जो उनकी स्थानीय पहचान और अनुभव को दर्शाता है।

3. ‘हर $5$ साल में विधायक बदलने’ के ट्रेंड को तोड़ने का प्रयास

  • हरसिद्धि सीट पर लगभग $1990$ के बाद से हर चुनाव में विधायक बदलता रहा है ($2010$ में $BJP$, $2015$ में $RJD$, $2020$ में $BJP$)। $BJP$ उम्मीदवार का प्रयास है कि मंत्री रहते हुए किए गए विकास कार्यों के बल पर इस ‘एंटी-इनकम्बेंसी’ ट्रेंड को तोड़कर लगातार दूसरी जीत हासिल करें।

II. महागठबंधन (RJD) के राजेंद्र कुमार राम की हार के विपक्ष में विश्लेषण (प्रतिकूल तथ्य)

महागठबंधन (RJD) के उम्मीदवार राजेंद्र कुमार राम की जीत की संभावनाओं को कम करने वाले मुख्य कारक इस प्रकार हैं:

1. मज़बूत $RJD$ कोर के बावजूद व्यक्तिगत हार

  • $2020$ की हार का झटका: $RJD$ ने इस बार $2015$ के विजेता राजेंद्र कुमार राम को मैदान में उतारा है। लेकिन 11$2020$ में, जब 12$RJD$ ने उन्हें छोड़कर कुमार नागेंद्र बिहारी को टिकट दिया था, तब वह 13$15,685$ वोटों से हार गए थे।14 यह मार्जिन $RJD$ के लिए चिंता का विषय है।
  • M-Y पर निर्भरता: $RJD$ का मुख्य आधार मुस्लिम-यादव ($M-Y$) वोट बैंक है। हरसिद्धि सीट पर मुस्लिम मतदाता 15$49,564$ और अनुसूचित जाति के मतदाता 16$43,349$ हैं।17 जीत के लिए $RJD$ को $M-Y$ के अलावा दलित वोटों में $BJP$ की सेंधमारी को रोकना होगा, जो एक $SC$ आरक्षित सीट होने के नाते चुनौतीपूर्ण है।

2. स्थानीय मुद्दों का प्रभाव

  • विकास में कमी का आरोप: राजेंद्र कुमार राम मंत्री पर स्थानीय समस्याओं को हल न कर पाने का आरोप लगा सकते हैं। खबरों के अनुसार, क्षेत्र में कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग के लिए प्लांट न लगना, मन के विकास का अधूरा रहना और सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार (रिश्वतखोरी) जैसे मुद्दे हैं। यदि $RJD$ इन स्थानीय मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठा पाता है, तो यह $BJP$ के खिलाफ काम कर सकता है।
  • $RJD$ की पिछली जीत का कारण: 18$2015$ में 19$RJD$ के राजेंद्र कुमार ने 20$BJP$ के कृष्णनंदन पासवान को 21$10,267$ वोटों के मामूली अंतर से हराया था।22 यह जीत नीतीश कुमार के साथ $RJD$ के गठबंधन के कारण संभव हुई थी, लेकिन $2025$ में वे आमने-सामने हैं।

3. $NDA$ की एकजुटता

  • $2025$ में $BJP$ के साथ $JDU$ (नीतीश कुमार) का मज़बूत गठबंधन है। $NDA$ की एकजुटता $RJD$ के वोटबैंक में सेंधमारी को कठिन बना देगी, क्योंकि $JDU$ का अति-पिछड़ा वर्ग ($EBC$) का वोट $BJP$ को मजबूती देगा।

निष्कर्ष: हरसिद्धि का चुनावी इतिहास बताता है कि यह सीट हर चुनाव में दल बदलती है। $BJP$ के कृष्णनंदन पासवान एक स्थापित नेता और वर्तमान मंत्री हैं, जिनके पास विकास कार्यों का सहारा है। वहीं, 23$RJD$ के राजेंद्र कुमार राम एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी हैं, जो 24$2015$ में जीत चुके हैं और 25$M-Y$ समीकरण पर निर्भर रहेंगे।26 हालांकि, $NDA$ की संगठनात्मक और $BJP$ उम्मीदवार की व्यक्तिगत शक्ति को देखते हुए, कृष्णनंदन पासवान की जीत की संभावना अधिक है।

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