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हाजीपुर का किला: क्या BJP का ‘गढ़’ ढहेगा या NDA का कमल खिलेगा? – 2025 का ध्रुवीकृत चुनावी विश्लेषण

हाजीपुर विधानसभा सीट (संख्या 123) वैशाली जिले की एक प्रतिष्ठित सीट है, जो पिछले दो दशकों से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का गढ़ मानी जाती रही है। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय इस सीट से लगातार चार बार (2000-2014) विधायक रहे। वर्तमान में, BJP के अवधेश सिंह यहां के विधायक हैं। 2025 का चुनाव भी BJP और RJD के बीच एक कड़ा, कांटे का मुकाबला होने की संभावना है, जैसा कि 2020 में केवल 2,990 वोटों के अंतर से देखा गया था।

यहां 2025 के संभावित विजेता और उसके विश्लेषण को प्रस्तुत किया गया है।


संभावित विजेता: अवधेश सिंह (भारतीय जनता पार्टी – BJP) / राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA)

(यह भविष्यवाणी BJP के मजबूत कोर वोट बैंक, स्थानीय जातीय समीकरणों पर पकड़ और चिराग पासवान के समर्थन के कारण की गई है।)

जीत के मुख्य कारण और विश्लेषण (फेवर में जाने वाले तथ्य)

तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
मजबूत कोर वोट बैंक हाजीपुर में राजपूत (करीब 15%) और गैर-यादव ओबीसी (कुशवाहा, तेली, बनिया आदि) मतदाताओं का मजबूत गठबंधन BJP के पक्ष में रहा है। अवधेश सिंह खुद राजपूत समुदाय से आते हैं, जो सवर्ण वोटों को एकजुट रखते हैं।
‘मोदी फैक्टर’ और नित्यानंद राय की विरासत यह सीट BJP की सबसे मजबूत सीटों में से एक मानी जाती है, जिस पर लंबे समय तक नित्यानंद राय (पिछड़ा वर्ग के कद्दावर नेता) का प्रभाव रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता और चिराग पासवान (हाजीपुर के लोकसभा सांसद) का प्रभाव NDA के पक्ष में माहौल बनाएगा।
रामविलास पासवान परिवार का समर्थन हाजीपुर लोकसभा सीट से चिराग पासवान (LJP-R) की जीत (2024 में बड़े अंतर से) का सीधा लाभ BJP को विधानसभा चुनाव में मिलेगा। पासवान समुदाय (करीब 21% अनुसूचित जाति मतदाता) का बड़ा हिस्सा NDA के गठबंधन के कारण BJP उम्मीदवार को ट्रांसफर होगा।
RJD के जीत के अंतर में कमी 2020 में RJD उम्मीदवार देव कुमार चौरसिया केवल 2,990 वोटों के बहुत कम अंतर से हारे थे। यह दर्शाता है कि RJD का कोर वोट बैंक (यादव+मुस्लिम) एकजुट होने के बावजूद BJP के गढ़ को भेद नहीं पाया।

अन्य उम्मीदवार (देव कुमार चौरसिया/RJD/महागठबंधन) के न जीतने के प्रतिकूल तथ्य

प्रतिकूल तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
M-Y समीकरण की सीमा हाजीपुर में यादव मतदाताओं की संख्या करीब 19% है, और मुस्लिम मतदाता करीब 8% हैं। यह RJD का कोर वोट बैंक है। हालांकि, यह समीकरण BJP के मजबूत सवर्ण और गैर-यादव OBC वोट बैंक के सामने अक्सर कमजोर पड़ जाता है, खासकर तब जब पासवान वोट NDA के पक्ष में चला जाता है।
RJD उम्मीदवार पर एंटी-इनकम्बेंसी RJD ने देव कुमार चौरसिया को 2020 में टिकट दिया था, जहां वह हार गए थे। बार-बार एक ही हारने वाले उम्मीदवार पर दांव लगाना (यदि RJD उन्हें दोहराती है), RJD की जीत की राह को कठिन बना सकता है। (हालांकि, स्थानीय मतदाताओं का एक वर्ग ‘सत्ता परिवर्तन’ और ‘तेजस्वी को मौका’ देने की बात करता है)।
स्थानीय विकास का मुद्दा बनाम जाति हाजीपुर के निवासी बुनियादी सुविधाओं, खराब सड़कों और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को लेकर असंतोष व्यक्त करते हैं। यदि महागठबंधन केवल जातीय समीकरण पर ध्यान केंद्रित करता है और स्थानीय विकास के मुद्दों को प्रभावी ढंग से नहीं उठा पाता है, तो ‘मोदी फैक्टर’ के सामने ये असंतोष दब जाएगा।
वोटों का संभावित बिखराव इस सीट पर जन सुराज (प्रशांत किशोर) जैसे नए दल के आने से गैर-पारंपरिक और गैर-जातिवादी वोट बंट सकते हैं। यदि जन सुराज RJD के वोट बैंक में सेंध लगाता है, तो इसका सीधा लाभ BJP को मिलेगा।

निष्कर्ष:

हाजीपुर विधानसभा सीट एक BJP का सुरक्षित गढ़ बनी हुई है, लेकिन 2020 का चुनाव दिखाता है कि जीत का अंतर बेहद कम रह सकता है।

  • BJP के अवधेश सिंह की जीत की संभावना अधिक है, बशर्ते NDA (BJP+JDU+LJP) गठबंधन एकजुट होकर राजपूत, गैर-यादव OBC और पासवान वोटों को अपने पक्ष में बनाए रखे।
  • RJD के लिए चुनौती यह है कि वह अपने मजबूत यादव-मुस्लिम आधार को कायम रखते हुए अत्यंत पिछड़े वर्ग (EBC) और दलित (SC) वोटों में सेंध लगाए। यदि चिराग पासवान का वोट NDA से कटता है या स्थानीय एंटी-इनकम्बेंसी मजबूत होती है, तो ही महागठबंधन इस सीट को जीत सकता है।
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