बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में दरभंगा जिले की हायाघाट सीट एक महत्वपूर्ण और कांटे की टक्कर वाली सीट मानी जाती है। यह ग्रामीण बहुल क्षेत्र है जहां जातीय समीकरण और स्थानीय मुद्दे निर्णायक भूमिका निभाते हैं। वर्तमान में यह सीट भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पास है, और 2025 में भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार के जीतने की मजबूत संभावना है।
संभावित विजेता: राम चंद्र प्रसाद (भारतीय जनता पार्टी – BJP) – NDA (यदि NDA उन्हें फिर से उम्मीदवार बनाती है)
राम चंद्र प्रसाद (BJP) की जीत के पक्ष में विस्तृत विश्लेषण और तथ्य:
- वर्तमान विधायक और जीत का अच्छा अंतर (2020):
- 2020 के चुनाव में, भाजपा के राम चंद्र प्रसाद ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भोला यादव को 10,252 वोटों के अंतर से हराया था। यह अंतर (लगभग 7.30%) एक ग्रामीण सीट पर काफी निर्णायक माना जाता है, जो उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता और पार्टी के आधार को दर्शाता है।
- राम चंद्र प्रसाद को 67,030 वोट (48.04%) मिले थे।
- जातीय समीकरण में बिखराव का लाभ:
- हायाघाट की राजनीति में मुस्लिम (लगभग 20%+) और यादव (लगभग 12%) मतदाताओं की बड़ी संख्या है, जो RJD का कोर वोट बैंक (‘MY’ समीकरण) बनाते हैं।
- 2020 में मुस्लिम वोटों में बंटवारा हुआ था (अन्य मुस्लिम उम्मीदवारों के कारण)। 2025 में भी यदि ओवैसी की AIMIM या अन्य दल मजबूत मुस्लिम उम्मीदवार उतारते हैं, तो यह सीधा लाभ NDA को देगा।
- NDA को सवर्ण, अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और गैर-यादव OBC वोटों का एक बड़ा हिस्सा मिलता है, जो ‘MY’ समीकरण पर भारी पड़ जाता है।
- NDA की एकजुटता और केंद्र/राज्य का प्रभाव:
- 2025 में NDA के एकजुट होकर लड़ने की स्थिति में, भाजपा को जदयू (JDU) और अन्य सहयोगियों के पारंपरिक वोट (खासकर EBC और महिला वोट) का लाभ मिलेगा।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में किए गए विकास कार्यों और योजनाओं का लाभ सीधे हायाघाट के ग्रामीण मतदाताओं तक पहुंचता है, जो निर्णायक हो सकता है।
- 2024 लोकसभा चुनाव का रुझान:
- 2024 के लोकसभा चुनाव में, NDA ने पूरे मिथिलांचल और दरभंगा जिले में मजबूत प्रदर्शन किया। यह संकेत देता है कि विधानसभा चुनाव में भी NDA के पक्ष में माहौल है।
भोला यादव (RJD) की हार के प्रतिकूल तथ्य और आंकड़े:
RJD के उम्मीदवार भोला यादव (या कोई अन्य महागठबंधन उम्मीदवार) को निम्नलिखित चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है:
- लगातार हार का दबाव (2020):
- RJD के मजबूत उम्मीदवार भोला यादव 2020 में 10 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हार गए थे। यह पिछली हार का बड़ा अंतर 2025 में उनके लिए मनोबल और विश्वास के लिहाज से एक बड़ी चुनौती है।
- वोटों का संभावित बंटवारा:
- हायाघाट सीट पर वाम दलों (जैसे माकपा) द्वारा उम्मीदवार उतारे जाने की संभावना है। माकपा के उम्मीदवार RJD के कोर वोटों (पिछड़ा वर्ग/अति पिछड़ा वर्ग) और मुस्लिम वोटों को विभाजित कर सकते हैं, जिसका सीधा फायदा NDA को मिलेगा।
- गैर-यादव OBC का झुकाव:
- यादव समुदाय RJD का मुख्य आधार है, लेकिन गैर-यादव OBC और अति-पिछड़ा वर्ग का बड़ा तबका नीतीश कुमार के साथ NDA गठबंधन में है। यह RJD के लिए सबसे बड़ी बाधा है।
निष्कर्ष और पूर्वानुमान:
राम चंद्र प्रसाद (BJP-NDA) हायाघाट सीट पर कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद अपनी जीत बरकरार रख सकते हैं।
