बिहार विधानसभा चुनाव में, दूसरे और अंतिम चरण के प्रचार का शोर थमने से पहले, देश और राज्य के सबसे बड़े नेताओं ने ज़मीन पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी। यह एक तरह से रणनीतिक लड़ाई थी, जहाँ हर नेता अपने गठबंधन के लिए अंतिम वोट खींचने की कोशिश कर रहा था।
इस लड़ाई में दो प्रमुख खेमे थे:
| खेमा | प्रमुख स्टार प्रचारक | मुख्य नारा और मुद्दा |
| NDA | नरेंद्र मोदी (प्रधानमंत्री), अमित शाह (केंद्रीय गृह मंत्री), नीतीश कुमार (मुख्यमंत्री) | ‘जंगलराज’ से मुक्ति, विकास, सुशासन, महिला सशक्तिकरण। |
| महागठबंधन (MGB) | राहुल गांधी (वरिष्ठ कांग्रेस नेता), तेजस्वी यादव (RJD नेता और CM उम्मीदवार) | रोज़गार (नौकरी), बदलाव की लहर, सत्ता विरोधी लहर। |
1. NDA का त्रिमूर्ति हमला (The NDA Trio Attack)
NDA ने अपने तीन सबसे बड़े चेहरों को एक साथ मैदान में उतारा, जिन्होंने अलग-अलग तरह से मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की।
क. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (The National Face):
- भूमिका: प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय विकास के साथ बिहार के भावनात्मक जुड़ाव को साधा। उन्होंने अपनी रैलियों को ‘डबल इंजन की सरकार’ के फायदे गिनाने पर केंद्रित किया।
- मुख्य हमले:
- ‘जंगलराज’ की याद: उन्होंने बार-बार ‘जंगलराज’ (यानी लालू-राबड़ी शासन के समय की कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति) की याद दिलाई और कहा कि अगर महागठबंधन जीतता है, तो बिहार फिर से अंधेरे में चला जाएगा।
- परिवारवाद पर निशाना: उन्होंने महागठबंधन को ‘परिवारवादी पार्टी’ बताया और कहा कि वे केवल अपने परिवार का विकास कर सकते हैं, बिहार का नहीं।
- छठ पूजा: उन्होंने छठ पूजा जैसे त्योहारों का ज़िक्र करके सांस्कृतिक और भावनात्मक अपील की।
- अंतिम संदेश: “बिहार ने सुशासन को वोट देने का मन बना लिया है। बिहार को अब कट्टा (हथियार) नहीं, कानून चाहिए।”
ख. गृह मंत्री अमित शाह (The Strategist):
- भूमिका: शाह ने रणनीति और सीधे हमलों पर ज़ोर दिया। उनकी रैलियाँ विशेष रूप से NDA के गढ़ (जैसे मिथिलांचल और चंपारण) को मज़बूत करने पर केंद्रित थीं।
- मुख्य हमले:
- तेजस्वी पर सीधा वार: उन्होंने तेजस्वी यादव के सरकारी नौकरी के वादे को ‘झूठा’ बताया और कहा कि 20 साल में जो नहीं हुआ, वह अब कहाँ से होगा।
- परिवार पर कटाक्ष: उन्होंने लालू परिवार को एक ‘प्राइवेट कंपनी’ बताया और कहा कि वे बिहार को अपनी संपत्ति मानते हैं।
- मोदी-नीतीश का नेतृत्व: उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि केंद्र में मोदी और बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही बिहार आगे बढ़ सकता है।
ग. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (The Local Appeal):
- भूमिका: नीतीश कुमार ने ‘ज़मीनी काम’ और 15 साल के ‘सुशासन’ का हिसाब दिया। उन्होंने अपनी रैलियों में सड़कों, बिजली, पानी और महिला सशक्तिकरण के कार्यों को गिनाया।
- मुख्य अपील: उन्होंने मतदाताओं से व्यक्तिगत भावनात्मक अपील की और कहा कि उन्होंने बिहार के लिए कितना संघर्ष किया है।
2. महागठबंधन का ‘बदलाव’ का मोर्चा (The MGB ‘Change’ Front)
महागठबंधन ने दो युवा और आक्रामक चेहरों को एक साथ लाकर NDA के अनुभवी नेतृत्व को चुनौती दी।
क. तेजस्वी यादव (The Youth Icon):
- भूमिका: तेजस्वी यादव इस चुनाव के सबसे बड़े आकर्षण रहे। उन्होंने एक दिन में दर्जनों रैलियाँ करके अपनी शारीरिक और राजनीतिक क्षमता का प्रदर्शन किया।
- मुख्य मुद्दे:
- ‘रोज़गार’ ही मुख्य मुद्दा: उनका पूरा प्रचार केवल ’10 लाख सरकारी नौकरी’ के वादे पर केंद्रित रहा। उन्होंने भीड़ से पूछा कि उन्हें नौकरी चाहिए या नहीं?
- ‘सत्ता विरोधी लहर’ को हवा: उन्होंने नीतीश कुमार के 20 साल के शासन को बेरोज़गारी और पलायन का कारण बताया और कहा कि अब बदलाव का समय आ गया है।
- थकावट का आरोप: उन्होंने नीतीश कुमार पर ‘थक जाने’ और बीजेपी के ‘रिमोट कंट्रोल’ से चलने का आरोप लगाया।
- अंतिम संदेश: “यह चुनाव महज़ सत्ता का नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य का है।”
ख. राहुल गांधी (The National Challenger):
- भूमिका: राहुल गांधी ने राष्ट्रीय मुद्दों को जोड़ते हुए मोदी सरकार पर हमला किया और तेजस्वी के ‘रोज़गार’ के मुद्दे को मज़बूती दी।
- मुख्य हमले:
- ‘दो हिंदुस्तान’ का आरोप: उन्होंने कहा कि मोदी सरकार अंबानी और अडानी के लिए एक हिंदुस्तान और गरीबों के लिए दूसरा हिंदुस्तान बना रही है।
- चीन और रोज़गार: उन्होंने आरोप लगाया कि नोटबंदी और GST ने छोटे कारोबारों को खत्म कर दिया, जिससे ‘मेड इन चाइना’ को बढ़ावा मिला, जबकि उन्हें ‘मेड इन बिहार’ चाहिए।
- वोट चोरी की चेतावनी: उन्होंने मतदाताओं को ‘वोट चोरी’ (ईवीएम और चुनाव आयोग के माध्यम से धांधली) के प्रयासों के खिलाफ सतर्क रहने की चेतावनी दी।
3. निर्णायक लड़ाई का सार
अंतिम चरण के प्रचार ने बिहार चुनाव को ‘जंगलराज’ बनाम ‘रोज़गार’ की लड़ाई बना दिया है।
- NDA का फोकस: अतीत (Past) के डर को दिखाकर वर्तमान (Present) के ‘सुशासन’ को बचाना।
- महागठबंधन का फोकस: वर्तमान (Present) की बेरोज़गारी का डर दिखाकर भविष्य (Future) में ‘बदलाव’ लाना।
यह स्टार प्रचारकों का आमना-सामना अब 11 नवंबर को मतदाताओं के वोट के रूप में और 14 नवंबर को नतीजों के रूप में सामने आएगा।
