बिहार विधानसभा चुनाव की लड़ाई सिर्फ पार्टियों के बीच नहीं है, बल्कि यह राज्य के बड़े और कद्दावर नेताओं के लिए साख की लड़ाई बन गई है। पहले चरण में जहाँ मुख्यमंत्री पद के दो सबसे बड़े चेहरे मैदान में थे, वहीं दूसरे चरण में मौजूदा सरकार के एक दर्जन मंत्रियों का भविष्य दांव पर लगा है।
1. पहले चरण के दो सबसे बड़े और हाई-प्रोफाइल मुकाबले
पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को हो चुका है, जहाँ सबकी नज़रें दो सबसे महत्वपूर्ण सीटों पर थीं:1
क. राघोपुर (Raghopur) – तेजस्वी यादव (MGB CM उम्मीदवार)
- उम्मीदवार: तेजस्वी यादव (राजद – RJD)2
- सामने कौन: सतीश कुमार (भाजपा – BJP)
- सीट का महत्व:
- यह सीट लालू परिवार का पारंपरिक गढ़ मानी जाती है। लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी दोनों यहाँ से जीत चुके हैं।
- तेजस्वी यादव महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के प्रमुख उम्मीदवार हैं। अगर वह यह सीट नहीं जीत पाते, तो महागठबंधन की पूरी रणनीति और जीत का दावा कमजोर पड़ जाएगा।
- टक्कर: भाजपा ने यहाँ सतीश कुमार को उतारा है, जिन्होंने 2010 में राबड़ी देवी को हराकर इस गढ़ में सेंध लगाई थी।3 इससे यह मुकाबला सीधी और कांटे की टक्कर का बन गया है।
- वोटिंग: राघोपुर में मतदान का प्रतिशत 70.66% रहा, जो बताता है कि जनता ने इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है।4
ख. तारापुर (Tarapur) – सम्राट चौधरी (उपमुख्यमंत्री, NDA)5
- उम्मीदवार: सम्राट चौधरी (भाजपा – BJP, उपमुख्यमंत्री)
- सामने कौन: अरुण कुमार (राजद – RJD)
- सीट का महत्व:
- यह सीट सम्राट चौधरी का पुश्तैनी गढ़ रही है। उनके पिता शकुनी चौधरी भी यहाँ से विधायक रहे हैं।
- सम्राट चौधरी NDA के एक सबसे कद्दावर ओबीसी (OBC) नेता हैं और भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में से एक हैं। यह सीट जीतना उनके राजनीतिक भविष्य के लिए बहुत ज़रूरी है।
- टक्कर: सम्राट चौधरी का मुकाबला राजद के अरुण कुमार से है, जो पिछले चुनाव में बहुत कम अंतर से हारे थे। इससे यह सीट इस बार सम्राट चौधरी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है।
- जीत/हार का संकेत: अगर सम्राट चौधरी बड़े अंतर से जीतते हैं, तो यह NDA की ओबीसी वोटों पर पकड़ को मज़बूत करेगा, और अगर हारते हैं तो यह NDA के लिए बड़ा झटका होगा।
2. दूसरे चरण में 12 मंत्रियों का भाग्य दांव पर
दूसरा चरण, जिसका मतदान 11 नवंबर को होना है, राज्य सरकार के लिए करो या मरो की स्थिति पैदा कर सकता है। इस चरण में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार के कम से कम 12 मौजूदा मंत्रियों की किस्मत का फैसला होना है।
- इन मंत्रियों का जीतना NDA की वापसी के लिए बहुत ज़रूरी है, क्योंकि अगर इतने बड़े मंत्री हार जाते हैं, तो यह सीधे तौर पर सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) का संकेत होगा।
| मंत्री का नाम (सम्भावित) | सीट का नाम | गठबंधन/पार्टी | क्षेत्र का महत्व |
| बिजेंद्र प्रसाद यादव | सुपौल | JDU | मिथिलांचल का प्रमुख चेहरा और कद्दावर मंत्री। |
| नीतीश मिश्रा | झंझारपुर | BJP | मिथिलांचल में भाजपा का बड़ा चेहरा। |
| लेशी सिंह | धमदाहा | JDU | महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण सीट। |
| सुमित कुमार सिंह | चकाई | निर्दलीय (NDA समर्थित) | एक बाहुबली-प्रभावित सीट, जिसका नतीजा पूरे क्षेत्र को प्रभावित करता है। |
| प्रेम कुमार | गया टाउन | BJP | मगध क्षेत्र में भाजपा के सबसे पुराने और मज़बूत स्तंभ। |
| विजय कुमार सिन्हा | लखीसराय | BJP (उपमुख्यमंत्री) | लखीसराय से लगातार चौथी बार जीत की कोशिश। |
| मंगल पांडे | मधुबन | BJP | एक और प्रमुख मंत्री, जिनकी जीत NDA के लिए महत्वपूर्ण है। |
| (नोट: सीटों और उम्मीदवारों की अंतिम सूची राजनीतिक बदलाव के कारण बदल सकती है।) |
- महागठबंधन का दांव: महागठबंधन इन मंत्रियों को हराकर NDA की जड़ों को हिलाने की कोशिश कर रहा है। उनकी रणनीति है कि बेरोज़गारी और विकास की कमी का मुद्दा उठाकर इन मंत्रियों के खिलाफ माहौल बनाया जाए।
- NDA का बचाव: NDA के बड़े नेता (जैसे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री) ने इन क्षेत्रों में रैलियाँ करके व्यक्तिगत रूप से इन मंत्रियों के लिए वोट मांगे हैं, यह जानते हुए कि इनकी जीत NDA की सरकार बनाने की संभावना को बहुत मज़बूत करेगी।
3. यह मुकाबला क्यों है ‘हाई-स्टेक्स’?
यह चुनाव सिर्फ विधायकों का नहीं है, बल्कि बिहार की भावी राजनीति का है।
- अगर तेजस्वी यादव (CM उम्मीदवार) और सम्राट चौधरी (डिप्टी CM) जैसे बड़े नेता अपनी सीटें जीतते हैं, तो उनकी राजनीतिक साख और भी मज़बूत होगी।
- अगर नीतीश सरकार के मंत्री बड़ी संख्या में हारते हैं, तो यह सीधे तौर पर NDA के नेतृत्व पर सवाल खड़ा करेगा, चाहे गठबंधन जीत भी जाए।
सारांश (Summary):
बिहार चुनाव के पहले चरण में तेजस्वी यादव (राघोपुर) और सम्राट चौधरी (तारापुर) जैसे मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी। अब 11 नवंबर को होने वाले दूसरे चरण में, नीतीश कुमार सरकार के कम से कम 12 मंत्रियों का भविष्य दांव पर है। ये सभी मुकाबले बिहार की सत्ता की कुंजी हैं, और 14 नवंबर को इनके नतीजे ही तय करेंगे कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।
