बिहार की चुनावी लड़ाई में इस बार जाति, धर्म या कानून-व्यवस्था से भी ज़्यादा ज़ोरदार आवाज़ ‘रोज़गार’ और ‘पलायन’ की है। बिहार की आधी से ज़्यादा आबादी युवा है, और ये युवा वोटर्स तय करेंगे कि अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा।
1. समस्या क्या है? (The Core Problem)
क. रोज़गार सृजन की कमी (Lack of Job Creation):
- बिहार लंबे समय से उद्योगों और बड़े निवेश (Industrial Investment) के मामले में पिछड़ रहा है।
- राष्ट्रीय औसत से दोगुनी बेरोज़गारी दर: आधिकारिक आँकड़े बताते हैं कि बिहार में बेरोज़गारी दर (Unemployment Rate) देश के राष्ट्रीय औसत से लगभग दोगुनी है। यानी, नौकरी चाहने वाले हर 100 युवाओं में से बहुत ज़्यादा बिहार में बेरोजगार हैं।
- सरकारी नौकरी पर निर्भरता: राज्य में निजी क्षेत्र (Private Sector) में कम नौकरियाँ होने के कारण, बिहार के युवाओं में सरकारी नौकरी पाने की ललक बहुत ज़्यादा है।
ख. मजबूरी में पलायन (Compulsory Migration):
- हर साल लाखों का पलायन: अनुमान है कि हर साल लाखों युवा बेहतर शिक्षा और रोज़गार की तलाश में बिहार छोड़कर देश के अन्य राज्यों (जैसे दिल्ली, मुंबई, गुजरात, पंजाब, दक्षिण भारत) में जाते हैं।
- परिवारों पर असर: पलायन करने वाले इन युवाओं को अपने परिवार से दूर रहना पड़ता है, जिससे गाँवों में बूढ़े माता-पिता और बच्चों की देखभाल एक बड़ी समस्या बन जाती है।
- कोविड-19 का दर्द: कोविड-19 महामारी के दौरान जब लाखों प्रवासी मजदूर वापस बिहार लौटे थे, तो उनके दर्द और परेशानी ने इस मुद्दे को और भी ज़्यादा भावनात्मक और राजनीतिक बना दिया है।
सीधा मतलब: बिहार का युवा अब ‘रोटी-रोज़ी’ (आजीविका) के लिए अपने राज्य से बाहर नहीं जाना चाहता। वे अब यहीं काम करना चाहते हैं। इसलिए, जो पार्टी उन्हें ‘घर में नौकरी’ का वादा कर रही है, वही उनके वोट की हकदार है।
2. महागठबंधन का चुनावी दांव: ‘हर घर एक सरकारी नौकरी’
विपक्षी गठबंधन ‘महागठबंधन’ (MGB), जिसका नेतृत्व तेजस्वी यादव कर रहे हैं, ने इस मुद्दे को चुनावी लड़ाई का केंद्र बिंदु बना दिया है।
- तेजस्वी का मुख्य नारा: “हर परिवार को एक सरकारी नौकरी।”
- विस्तृत वादा: तेजस्वी यादव ने यह वादा किया है कि अगर उनकी सरकार बनी, तो वे राज्य के हर परिवार से एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देंगे।
- वित्तीय पहलू पर सवाल: विपक्षी (NDA) ने इस वादे पर सवाल उठाया है कि बिहार में 2 करोड़ 97 लाख (लगभग 3 करोड़) परिवार हैं, और इतनी बड़ी संख्या में सरकारी नौकरियाँ देना असंभव है। उन्होंने पूछा है कि इसके लिए इतना पैसा कहाँ से आएगा, क्योंकि यह राशि बिहार के पूरे सालाना बजट से भी ज़्यादा है।
- महागठबंधन का पलटवार: महागठबंधन का कहना है कि वे नौकरियों का सृजन करके, खाली पड़े सरकारी पदों को भरकर और केवल ‘रोज़गार’ नहीं बल्कि ‘सरकारी नौकरी’ देकर युवाओं का पलायन रोकेंगे।
चुनावी असर: तेजस्वी यादव की रैलियों में उमड़ रही युवाओं की भारी भीड़ को इस वादे से जोड़कर देखा जा रहा है। युवाओं को लग रहा है कि यह वादा उनके जीवन को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।
3. NDA का जवाब: ‘एक करोड़ रोज़गार और कौशल विकास’3
सत्ताधारी गठबंधन NDA (भारतीय जनता पार्टी और JDU), ने महागठबंधन के सरकारी नौकरी के वादे का जवाब ‘बड़ा विजन’ देकर दिया है।
- NDA का मुख्य वादा: NDA ने अपने ‘संकल्प पत्र’ (Manifesto) में अगले 5 सालों में 1 करोड़ से ज़्यादा रोज़गार और नौकरी के अवसर पैदा करने का वादा किया है।4
- कैसे मिलेगा रोज़गार? NDA ने साफ किया है कि यह केवल सरकारी नौकरी नहीं होगी, बल्कि इसमें रोज़गार (Employment – जैसे अपना व्यवसाय, ठेके पर काम) और सरकारी नौकरी दोनों शामिल होंगी।
- औद्योगिक निवेश (Industrial Investment): NDA का कहना है कि वे बड़े उद्योगों को बिहार में निवेश के लिए आकर्षित करेंगे, जिससे निजी क्षेत्र में लाखों नौकरियाँ पैदा होंगी।
- ग्लोबल स्किलिंग सेंटर (Global Skilling Centres): उनका बड़ा प्लान यह है कि बिहार के हर जिले में ‘मेगा स्किल सेंटर’ खोले जाएंगे। इन सेंटरों में युवाओं को ऐसी ट्रेनिंग दी जाएगी कि वे न सिर्फ बिहार में, बल्कि देश और विदेश (Global) में भी अच्छी नौकरी पाने के लायक बन सकें।
- करोड़पति दीदी योजना: महिलाओं को रोज़गार से जोड़ने के लिए ‘मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना’ और ‘करोड़पति दीदी’ (1 करोड़ महिलाओं को सालाना 1 लाख रुपये से ज़्यादा कमाने में मदद) जैसी योजनाएँ भी NDA के घोषणापत्र में शामिल हैं।
चुनावी असर: NDA का तर्क है कि सरकारी नौकरी का वादा झूठा है, जबकि उनका ‘विजन’ टिकाऊ है, जो बिहार को ‘स्किलिंग हब’ बनाकर पूरे राज्य को आर्थिक रूप से मज़बूत करेगा।
4. किसकी बात पर भरोसा? (The Voter’s Dilemma)
चुनाव में अब मतदाता को यह तय करना है कि वह किस पर भरोसा करे:
| आधार (Basis) | महागठबंधन (Tejashwi Yadav) | NDA (Nitish Kumar/Samrat Chaudhary) |
| वादे का स्वरूप | सीधी सरकारी नौकरी (हर परिवार को एक)। | 1 करोड़ रोज़गार (सरकारी, निजी और स्वरोजगार)। |
| मुख्य लक्ष्य | युवाओं को तुरंत सरकारी नौकरी देना। | उद्योगों को बढ़ावा और युवाओं को कुशल (Skilled) बनाना। |
| जोखिम | वादा आर्थिक रूप से पूरा करना मुश्किल लग सकता है। | 15 साल की सत्ता में बेरोज़गारी कम क्यों नहीं हुई, यह सवाल है। |
सारांश:
रोज़गार और पलायन का मुद्दा इस बिहार चुनाव में सबसे बड़ी राजनीतिक संपत्ति बन गया है। महागठबंधन इस पर हमलावर है, तो NDA इस पर अपना बड़ा विजन पेश कर रहा है। अंततः, 14 नवंबर को जब नतीजे आएंगे, तभी पता चलेगा कि बिहार के युवा मतदाताओं ने ‘बदलाव की तात्कालिक नौकरी’ को चुना है या ‘विकास और कौशल के दीर्घकालिक वादे’ को।5
