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💼 बिहार चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा: बेरोज़गारी और युवाओं का पलायन

बिहार की चुनावी लड़ाई में इस बार जाति, धर्म या कानून-व्यवस्था से भी ज़्यादा ज़ोरदार आवाज़ ‘रोज़गार’ और ‘पलायन’ की है। बिहार की आधी से ज़्यादा आबादी युवा है, और ये युवा वोटर्स तय करेंगे कि अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा।

1. समस्या क्या है? (The Core Problem)

क. रोज़गार सृजन की कमी (Lack of Job Creation):

ख. मजबूरी में पलायन (Compulsory Migration):

सीधा मतलब: बिहार का युवा अब ‘रोटी-रोज़ी’ (आजीविका) के लिए अपने राज्य से बाहर नहीं जाना चाहता। वे अब यहीं काम करना चाहते हैं। इसलिए, जो पार्टी उन्हें ‘घर में नौकरी’ का वादा कर रही है, वही उनके वोट की हकदार है।


 

2. महागठबंधन का चुनावी दांव: ‘हर घर एक सरकारी नौकरी’

विपक्षी गठबंधन ‘महागठबंधन’ (MGB), जिसका नेतृत्व तेजस्वी यादव कर रहे हैं, ने इस मुद्दे को चुनावी लड़ाई का केंद्र बिंदु बना दिया है।

चुनावी असर: तेजस्वी यादव की रैलियों में उमड़ रही युवाओं की भारी भीड़ को इस वादे से जोड़कर देखा जा रहा है। युवाओं को लग रहा है कि यह वादा उनके जीवन को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।


 

3. NDA का जवाब: ‘एक करोड़ रोज़गार और कौशल विकास’3

सत्ताधारी गठबंधन NDA (भारतीय जनता पार्टी और JDU), ने महागठबंधन के सरकारी नौकरी के वादे का जवाब ‘बड़ा विजन’ देकर दिया है।

चुनावी असर: NDA का तर्क है कि सरकारी नौकरी का वादा झूठा है, जबकि उनका ‘विजन’ टिकाऊ है, जो बिहार को ‘स्किलिंग हब’ बनाकर पूरे राज्य को आर्थिक रूप से मज़बूत करेगा।


 

4. किसकी बात पर भरोसा? (The Voter’s Dilemma)

चुनाव में अब मतदाता को यह तय करना है कि वह किस पर भरोसा करे:

आधार (Basis) महागठबंधन (Tejashwi Yadav) NDA (Nitish Kumar/Samrat Chaudhary)
वादे का स्वरूप सीधी सरकारी नौकरी (हर परिवार को एक)। 1 करोड़ रोज़गार (सरकारी, निजी और स्वरोजगार)।
मुख्य लक्ष्य युवाओं को तुरंत सरकारी नौकरी देना। उद्योगों को बढ़ावा और युवाओं को कुशल (Skilled) बनाना।
जोखिम वादा आर्थिक रूप से पूरा करना मुश्किल लग सकता है। 15 साल की सत्ता में बेरोज़गारी कम क्यों नहीं हुई, यह सवाल है।

सारांश:

रोज़गार और पलायन का मुद्दा इस बिहार चुनाव में सबसे बड़ी राजनीतिक संपत्ति बन गया है। महागठबंधन इस पर हमलावर है, तो NDA इस पर अपना बड़ा विजन पेश कर रहा है। अंततः, 14 नवंबर को जब नतीजे आएंगे, तभी पता चलेगा कि बिहार के युवा मतदाताओं ने ‘बदलाव की तात्कालिक नौकरी’ को चुना है या ‘विकास और कौशल के दीर्घकालिक वादे’ को।5

 

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